खनिज निर्भरता से आगे बढ़कर विविध औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर सरकार का फोकस
दावोस/रांची। झारखंड ने वैश्विक निवेश मानचित्र पर अपनी मौजूदगी को और मजबूत करते हुए हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विश्व आर्थिक मंच के DAVOS 2026 सम्मेलन में राज्य की दीर्घकालिक निवेश और आर्थिक विकास रणनीति प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं के समक्ष झारखंड को केवल खनिज-आधारित अर्थव्यवस्था से बाहर निकालकर बहुआयामी औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने का स्पष्ट रोडमैप रखा।
खनिज संपदा से आगे की सोच
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड देश के सबसे खनिज-समृद्ध राज्यों में से एक है, लेकिन आने वाले दशक में केवल खनन पर निर्भर रहना राज्य के युवाओं और अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इसी सोच के तहत सरकार अब मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, पर्यटन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड की नई नीति “संसाधन दोहन” की जगह “संसाधन मूल्य संवर्धन (Value Addition)” पर केंद्रित है, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर पैदा हों।
निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल
DAVOS 2026 में झारखंड सरकार ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य में अब नीति स्थिरता, पारदर्शी प्रशासन और त्वरित स्वीकृति प्रणाली लागू की जा रही है। सिंगल विंडो क्लीयरेंस, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए निवेशकों की वर्षों पुरानी शिकायतों को दूर करने का प्रयास किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उद्योगों को केवल भूमि या कर छूट ही नहीं, बल्कि स्किल्ड मैनपावर, बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट भी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
रोजगार सृजन केंद्र में
झारखंड की इस नई निवेश रणनीति का सबसे अहम पहलू रोजगार सृजन है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच से दस वर्षों में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं। इसके लिए राज्य में स्किल डेवलपमेंट सेंटर, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (आईटीआई) का आधुनिकीकरण और उद्योगों के साथ साझेदारी पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देते हुए “लोकल टू ग्लोबल” मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे झारखंड के युवा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित हो सकें।
हरित ऊर्जा और सतत विकास
DAVOS जैसे वैश्विक मंच पर झारखंड ने हरित ऊर्जा और सतत विकास को अपनी आर्थिक नीति का अभिन्न हिस्सा बताया। सोलर, विंड और बायोएनर्जी प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए राज्य में अपार संभावनाएं हैं।
सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में झारखंड को ग्रीन इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास साथ-साथ चलेंगे। इससे न केवल कार्बन फुटप्रिंट कम होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
आदिवासी और स्थानीय समुदायों का समावेश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड की विकास नीति समावेशी है। राज्य में निवेश के साथ-साथ आदिवासी और स्थानीय समुदायों के अधिकार, संस्कृति और आजीविका का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता रहेगा।
उन्होंने कहा कि उद्योगों को CSR और स्थानीय भागीदारी के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में योगदान देना होगा, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था
झारखंड ने DAVOS 2026 में अपने पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को भी निवेश के बड़े अवसर के रूप में प्रस्तुत किया। नेतरहाट, बेतला, पारसनाथ और झारखंड के झरनों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने की योजना साझा की गई।
सरकार का मानना है कि इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन से न केवल विदेशी मुद्रा अर्जन होगा, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
वैश्विक मंच पर झारखंड की नई पहचान
DAVOS 2026 में झारखंड की सक्रिय भागीदारी को राज्य की बदलती छवि के रूप में देखा जा रहा है। अब झारखंड केवल खनिज संसाधनों वाला राज्य नहीं, बल्कि निवेश के लिए उभरता हुआ बहुआयामी केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पेश की गई यह रणनीति न केवल निवेश आकर्षित करने की कोशिश है, बल्कि राज्य के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का संकेत भी देती है।
निष्कर्ष
झारखंड द्वारा DAVOS 2026 में प्रस्तुत की गई निवेश रणनीति यह साफ दर्शाती है कि राज्य सरकार भविष्य की जरूरतों को समझते हुए आर्थिक ढांचे में बदलाव के लिए गंभीर है। खनिज निर्भरता से बाहर निकलकर विविध औद्योगिक विकास, हरित ऊर्जा, पर्यटन और रोजगार सृजन पर केंद्रित यह नीति आने वाले वर्षों में झारखंड की आर्थिक दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।
यदि यह योजनाएं जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो झारखंड न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बना सकता है।



