रांची में शिक्षकों के सम्मान की मिसाल: सेवानिवृत्ति के दिन ही पेंशन, शॉल और सम्मान पत्र | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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विशेष पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई समारोह ने रचा नया प्रशासनिक मॉडल

रांची, 31 जनवरी 2026।
रांची जिला प्रशासन ने शिक्षक सम्मान और कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए अनुकरणीय बनता जा रहा है। जिला जनसम्पर्क कार्यालय, रांची द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 76/2026 के अनुसार, जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समाहरणालय के ब्लॉक-ए स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में विशेष पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सेवानिवृत्ति के ठीक उसी दिन सभी पेंशनरी लाभ—पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट आदि—प्रदान किए गए। साथ ही, कुल 24 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

शिक्षकों को मिला सम्मान, प्रशासन ने जीता भरोसा

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने स्वयं मंच से एक-एक शिक्षक को सम्मानित करते हुए कहा कि “शिक्षक समाज की मजबूत नींव हैं। आने वाली पीढ़ियों का भविष्य उनके ज्ञान, संस्कार और समर्पण पर निर्भर करता है। ऐसे में सेवानिवृत्ति के समय उनका सम्मान और समयबद्ध लाभ देना प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।”

यह आयोजन केवल एक औपचारिक विदाई नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि रांची जिला प्रशासन कर्मचारी-केंद्रित, संवेदनशील और पारदर्शी प्रशासन के सिद्धांत पर काम कर रहा है।

24 शिक्षकों को मिला व्यक्तिगत सम्मान

इस अवसर पर तमाड़, कांके, नामकुम, बेड़ो, लापुंग, चान्हों, अनगड़ा, बुंडू, सिल्ली, सोनाहातु, ओरमांझी, खलारी और इटकी जैसे प्रखंडों से सेवानिवृत्त शिक्षकों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। उपायुक्त ने सभी शिक्षकों से व्यक्तिगत रूप से संवाद भी किया और उनके सेवा काल की सराहना की।

सम्मानित शिक्षकों में प्राथमिक, मध्य विद्यालयों के सहायक शिक्षक, प्रधानाध्यापक तथा महिला शिक्षिकाएं भी शामिल रहीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासन का यह सम्मान समावेशी और समानता आधारित है।

रिटायरमेंट के दिन ही पेंशन: बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि

कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने विशेष जोर देते हुए कहा:

“सेवानिवृत्ति के ठीक उसी दिन पेंशन और अन्य सभी लाभ प्रदान करना प्रशासन की संवेदनशीलता का प्रमाण है। हमारा प्रयास है कि कोई भी शिक्षक या कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद अनिश्चितता या मानसिक तनाव में न रहे।”

आमतौर पर सरकारी सेवाओं में रिटायरमेंट के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी मिलने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन रांची जिला प्रशासन ने इस परंपरा को बदलते हुए ‘जीरो वेटिंग’ मॉडल को लागू किया है। यही कारण है कि इस पहल की चर्चा अब राज्य स्तर पर भी हो रही है।

नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं और प्रेरणादायक संदेश

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सेवानिवृत्त शिक्षकों को जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा:

“आप सभी अपने अनुभव और ज्ञान को समाज सेवा, शिक्षा परामर्श, या अन्य रचनात्मक कार्यों में लगाएं। स्वयं को सक्रिय रखें, परिवार के साथ समय बिताएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।”

उनके इस संदेश ने समारोह को केवल प्रशासनिक कार्यक्रम न रखकर भावनात्मक और प्रेरणादायक आयोजन बना दिया।

शिक्षा विभाग की भूमिका की सराहना

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज और उनके कार्यालय के सभी कर्मचारियों की खुले मंच से सराहना की। उन्होंने कहा कि जनवरी 2025 से हर महीने इस तरह का आयोजन कर जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय ने पहले ही एक मजबूत नींव रख दी है, जिसे अब और सशक्त बनाया जाएगा।

अन्य विभागों के लिए भी मॉडल बने यह पहल

इस समारोह के बाद उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पहल केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा:

“अन्य सभी विभागों को भी इसी प्रकार के पेंशन दरबार और विदाई सम्मान समारोह शुरू करने चाहिए, ताकि हर सेवानिवृत्त कर्मचारी को सम्मान और समयबद्ध लाभ मिल सके।”

यह बयान प्रशासनिक हलकों में नीतिगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जिससे भविष्य में रांची जिले के सभी विभागों में इसी तरह की व्यवस्था लागू हो सकती है।

डीईओ कार्यालय को तुरंत लागू करने का निर्देश

उपायुक्त ने विशेष रूप से जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय को निर्देश दिया कि वे इस पहल को नियमित और संस्थागत रूप दें। उन्होंने कहा कि इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और भरोसा भी मजबूत होगा।

शिक्षक कल्याण: रांची प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता

यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि रांची जिला प्रशासन के लिए शिक्षक केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज निर्माता हैं। सम्मान, समयबद्ध पेंशन और गरिमामय विदाई—ये तीनों मिलकर एक ऐसा मॉडल बनाते हैं, जो प्रशासन और कर्मचारियों के बीच विश्वास को मजबूत करता है।

निष्कर्ष: एक आयोजन, कई संदेश

विशेष पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई सम्मान समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रांची जिला प्रशासन केवल योजनाओं की घोषणा नहीं करता, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू भी करता है।
यह पहल आने वाले समय में झारखंड के अन्य जिलों और विभागों के लिए रोल मॉडल साबित हो सकती है।

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