गिरिडीह में जतरामेला से लौट रहीं दो नाबालिग बच्चियों से सामूहिक दुष्कर्म का खुलासा, चार आरोपी गिरफ्तार, चार किशोर निरुद्ध | Jharkhand News | Bhaiyajii News

नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म | Jharkhand News | Bhaiyajii News

नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म : गिरिडीह जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक गंभीर आपराधिक घटना का पुलिस ने सफल उद्भेदन करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। हरलाडीह ओपी क्षेत्र अंतर्गत जतरामेला देखकर लौट रहीं दो नाबालिग बच्चियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य घटना में संलिप्त चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि चार विधि-विरुद्ध किशोरों को निरुद्ध किया गया है। यह कार्रवाई गिरिडीह पुलिस की त्वरित, समन्वित और तकनीकी जांच का परिणाम मानी जा रही है।

जतरामेला से लौटते समय हुई थी घटना

पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह दर्दनाक घटना 25 जनवरी 2026 की रात्रि की है। हरलाडीह ओपी क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित जतरामेला देखने गईं दो नाबालिग बच्चियां जब वापस लौट रही थीं, तभी सुनसान स्थान का फायदा उठाकर अज्ञात व्यक्तियों ने उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद पीड़ित बच्चियां किसी तरह अपने घर पहुंचीं और परिजनों को आपबीती बताई।

घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए 26 जनवरी 2026 को खुखरा (हरलाडीह) थाना कांड संख्या 02/26 दर्ज किया।

गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2) और 3(5) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 6/10 के तहत प्राथमिकी दर्ज की। चूंकि पीड़िताएं नाबालिग थीं, इसलिए यह मामला अत्यंत संवेदनशील और गंभीर श्रेणी में आता है।

एसआईटी का गठन, तकनीक और विज्ञान का सहारा

पुलिस अधीक्षक, गिरिडीह डॉ. बिमल कुमार (भा.पु.से.) ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक विशेष अनुसंधान दल (SIT) का गठन किया। इस टीम का नेतृत्व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, डुमरी को सौंपा गया।

जांच को प्रभावी बनाने के लिए घटनास्थल पर श्वान दस्ता, विधि-विज्ञान प्रयोगशाला रांची की टीम और तकनीकी शाखा को तैनात किया गया। घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक और डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए गए। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), स्थानीय सूचना तंत्र और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई।

चार अभियुक्त गिरफ्तार, चार किशोर निरुद्ध

लगातार छापेमारी और सटीक जांच के बाद पुलिस ने इस कांड में शामिल चार वयस्क अभियुक्तों को गिरफ्तार किया, जबकि चार विधि-विरुद्ध किशोरों को निरुद्ध किया गया है।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान

  1. राजेश मुर्मू (उम्र लगभग 26 वर्ष), पिता – मोहन मुर्मू, ग्राम मंडलडीह, थाना हरलाडीह ओपी (खुखरा), जिला गिरिडीह
  2. रवीन्द्र टुडू (उम्र लगभग 23 वर्ष), पिता – नासिर टुडू, ग्राम मंडलडीह, थाना हरलाडीह ओपी (खुखरा), जिला गिरिडीह
  3. संजय टुडू (उम्र लगभग 21 वर्ष), पिता – सुखदेव टुडू, ग्राम मझियारा, थाना मनियाडीह, जिला धनबाद
  4. सोहन टुडू (उम्र लगभग 23 वर्ष), पिता – जयाराम टुडू, ग्राम मझियारा, थाना मनियाडीह, जिला धनबाद

इसके अलावा, इस कांड में शामिल चार विधि-विरुद्ध किशोरों को भी पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है और उनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

बरामद सामग्री

पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के पास से महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनमें—

  • एक अभियुक्त का जींस पैंट, जो घटनास्थल से बरामद हुआ
  • कुल सात (07) मोबाइल फोन

इन सभी साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।

बड़ी छापामारी टीम की भूमिका

इस पूरे अभियान में गिरिडीह पुलिस की एक बड़ी और समर्पित टीम शामिल रही। छापामारी दल में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, प्रशिक्षु डीएसपी, थाना प्रभारी, महिला थाना की पदाधिकारी, तकनीकी शाखा और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। टीमवर्क और समन्वय के चलते ही इतनी जल्दी इस जघन्य अपराध का खुलासा संभव हो सका।

पुलिस की अपील और सामाजिक संदेश

गिरिडीह पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की आपराधिक घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। साथ ही, अभिभावकों से भी अनुरोध किया गया है कि वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें, विशेषकर मेलों और भीड़-भाड़ वाले आयोजनों के दौरान।

पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट कहा है कि नाबालिगों के विरुद्ध अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कठोरतम सजा दिलाने के लिए पुलिस पूरी मजबूती से केस को आगे बढ़ाएगी।

न्याय की दिशा में मजबूत कदम

यह कार्रवाई न केवल गिरिडीह पुलिस की कार्यशैली को दर्शाती है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देती है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों की जगह सलाखों के पीछे ही है। पुलिस की तत्परता से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद मिली है और आम लोगों का कानून पर भरोसा भी मजबूत हुआ है।

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