कोडरमा पुलिस की बड़ी सफलता: गया से बिरहोर जनजाति के 10 लापता बच्चों को सकुशल किया गया बरामद | Jharkhand News | Bhaiyajii News

कोडरमा लापता बच्चे | Jharkhand News | Bhaiyajii News

कोडरमा लापता बच्चे : झारखंड के कोडरमा जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है। कोडरमा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के 10 लापता बच्चों को बिहार के गया से सकुशल बरामद कर लिया है। बच्चों के सुरक्षित मिलने के बाद उनके परिजनों और पूरे इलाके में खुशी और राहत का माहौल है।

यह मामला न केवल पुलिस की सतर्कता और सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि आदिम जनजातियों के बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है।

कैसे हुए थे बच्चे लापता?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत गड़ियाही बिरहोर टोला से करीब 70 ग्रामीण एक सामूहिक कार्यक्रम (श्राद्ध/भोज) में शामिल होने के लिए गए थे। इसी दौरान 31 जनवरी को बिरहोर समुदाय के ये 10 बच्चे अपने परिजनों से बिछड़ गए।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब सभी लोग अपने गांव लौटे, तब यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 10 बच्चे उनके साथ नहीं हैं। पहले तो परिजनों ने आसपास के इलाकों में बच्चों की तलाश की, लेकिन जब काफी खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला, तब गांव में अफरा-तफरी मच गई।

थाने में शिकायत, पुलिस हरकत में आई

लगातार दो दिनों तक बच्चों का कोई पता नहीं चलने पर परिजनों ने 6 फरवरी को जयनगर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही कोडरमा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच शुरू कर दी

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर इस मामले के लिए 8 विशेष जांच टीमों का गठन किया गया। इन टीमों को अलग-अलग दिशाओं में रवाना किया गया ताकि बच्चों की जल्द से जल्द तलाश की जा सके।

कई राज्यों में चला सर्च ऑपरेशन

बच्चों की तलाश केवल कोडरमा तक सीमित नहीं रही। पुलिस टीमों ने:

  • रेलवे स्टेशन
  • बस स्टैंड
  • ढाबा और होटल
  • धार्मिक स्थल
  • प्रमुख बाजार और सार्वजनिक स्थान

पर छापेमारी और पूछताछ की।

इसके साथ ही बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में भी अलर्ट जारी किया गया। CCTV फुटेज खंगाले गए और स्थानीय पुलिस स्टेशनों से समन्वय स्थापित किया गया।

गया में मिला सुराग, बच्चों की पहचान हुई

सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि गया जिले के मुफस्सिल और परैया थाना क्षेत्र में कुछ आदिवासी बच्चे लावारिस हालत में देखे गए हैं। स्थानीय पुलिस ने बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर सेंटर (बाल संरक्षण गृह) में सुरक्षित रखा था।

कोडरमा पुलिस ने तुरंत गया पहुंचकर बच्चों की पहचान कराई। परिजनों द्वारा पहचान की पुष्टि होते ही यह साफ हो गया कि ये वही 10 लापता बिरहोर बच्चे हैं, जिनकी तलाश कई दिनों से चल रही थी।

बच्चों की उम्र और स्थिति

बरामद किए गए बच्चों की उम्र 5 से 14 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पूछताछ में सामने आया कि बच्चे रास्ता भटक गए थे और उन्हें सही दिशा का अंदाजा नहीं लग सका। हालांकि, इस मामले में पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं इसके पीछे मानव तस्करी या लापरवाही का कोई मामला तो नहीं है।

फिलहाल बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराई गई है और वे पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

कानूनी प्रक्रिया के बाद परिजनों को सौंपे जाएंगे बच्चे

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्चों को उनके माता-पिता और अभिभावकों को सौंप दिया जाएगा। जिला बाल संरक्षण इकाई और सामाजिक कल्याण विभाग भी इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।

परिजनों ने जताया पुलिस का आभार

बच्चों के मिलने के बाद बिरहोर समुदाय के लोगों ने कोडरमा पुलिस का आभार जताया। परिजनों ने कहा कि यदि पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं करती, तो बच्चों के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती थी।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि आदिम जनजातियों में शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण बच्चे अक्सर ऐसी घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

आदिम जनजातियों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर इस ओर इशारा करती है कि आदिम और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों के बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • जनजातीय इलाकों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं
  • बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा योजना बनाई जाए
  • सामूहिक कार्यक्रमों में बच्चों की निगरानी अनिवार्य की जाए

निष्कर्ष

कोडरमा पुलिस द्वारा बिरहोर जनजाति के 10 लापता बच्चों की सकुशल बरामदगी निस्संदेह एक सराहनीय और प्रेरणादायक कार्रवाई है। यह न केवल पुलिस की तत्परता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अगर प्रशासन सजग रहे तो बड़ी से बड़ी अनहोनी को टाला जा सकता है।

अब जरूरत है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए स्थायी समाधान और जागरूकता की दिशा में कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में कोई भी बच्चा इस तरह लापता न हो।

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