17 फ़रवरी 2026 को पूरी दुनिया एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना की साक्षी बनेगी। इस दिन वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) घटित होगा। यह सूर्य ग्रहण सामान्य सूर्य ग्रहण से अलग और अधिक रोचक होता है, क्योंकि इसमें सूर्य पूरी तरह ढकता नहीं, बल्कि उसके चारों ओर आग के छल्ले (Ring of Fire) जैसा चमकदार घेरा दिखाई देता है।
यह आर्टिकल आपको बताएगा कि यह ग्रहण कब होगा, कहाँ होगा, किन जगहों पर दिखाई देगा, क्यों होता है, कैसे होता है, और इससे जुड़ी हर जरूरी जानकारी — सरल और प्रमाणिक भाषा में।
Annular Solar Eclipse 2026 कब है?
- तारीख: 17 फ़रवरी 2026
- दिन: मंगलवार
- ग्रहण का प्रकार: वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse)
इस दिन चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आएंगे, लेकिन चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होगा, जिसके कारण सूर्य पूरी तरह ढक नहीं पाएगा।
Annular Solar Eclipse कहाँ होगा?
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण पूरी पृथ्वी पर एक साथ नहीं दिखेगा। सूर्य ग्रहण हमेशा पृथ्वी के कुछ चुनिंदा हिस्सों में ही दिखाई देता है।
Ring of Fire (पूर्ण वलयाकार दृश्य) इन क्षेत्रों में:
- अंटार्कटिका के कुछ हिस्से
- दक्षिणी महासागर (Southern Ocean)
- दक्षिण अमेरिका के सीमित क्षेत्र
- अफ्रीका के दक्षिणी भाग
इन स्थानों पर सूर्य के चारों ओर स्पष्ट रूप से आग के छल्ले जैसा दृश्य दिखाई देगा, जो इस ग्रहण की सबसे बड़ी पहचान है।
आंशिक सूर्य ग्रहण कहाँ दिखाई देगा?
इन क्षेत्रों में सूर्य आंशिक रूप से ढका हुआ दिखाई देगा:
- अफ्रीका के बड़े हिस्से
- दक्षिण अमेरिका के अधिकांश क्षेत्र
- अटलांटिक महासागर से जुड़े द्वीप
भारत, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित पूरे दक्षिण एशिया में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
Annular Solar Eclipse क्या होता है?
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब:
- चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है
- लेकिन चंद्रमा पृथ्वी से थोड़ा दूर होता है
- चंद्रमा का आकार सूर्य से छोटा दिखाई देता है
- सूर्य का मध्य भाग ढक जाता है, किनारे खुले रहते हैं
इसी कारण सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकदार वलय बनाता है, जिसे Ring of Fire कहा जाता है।
सूर्य ग्रहण कैसे होता है?
- चंद्रमा अपनी अंडाकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है
- ग्रहण के समय चंद्रमा सूर्य के सामने आता है
- चंद्रमा पृथ्वी से दूर होने के कारण सूर्य को पूरा नहीं ढक पाता
- सूर्य का बाहरी किनारा चमकता रहता है
- यही दृश्य वलयाकार सूर्य ग्रहण कहलाता है
सूर्य ग्रहण क्यों होता है?
सूर्य ग्रहण का मुख्य कारण है:
- चंद्रमा की अंडाकार कक्षा
- पृथ्वी और सूर्य के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति
- दूरी में अंतर
जब चंद्रमा पास होता है → पूर्ण सूर्य ग्रहण
जब चंद्रमा दूर होता है → वलयाकार सूर्य ग्रहण
वलयाकार और पूर्ण सूर्य ग्रहण में अंतर
| बिंदु | वलयाकार सूर्य ग्रहण | पूर्ण सूर्य ग्रहण |
|---|---|---|
| सूर्य ढकता है | पूरी तरह नहीं | पूरी तरह |
| दृश्य | आग का छल्ला | पूर्ण अंधकार |
| कोरोना दिखाई देता है | ❌ नहीं | ✅ हाँ |
| रोशनी | बनी रहती है | बहुत कम हो जाती है |
सूर्य ग्रहण देखने के नियम
वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य का कुछ हिस्सा हमेशा दिखाई देता है, इसलिए यह आंखों के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकता है।
सुरक्षित तरीके:
- ISO प्रमाणित Solar Eclipse Glasses
- पिनहोल प्रोजेक्टर
- Shade-14 वेल्डिंग ग्लास
असुरक्षित:
- नंगी आंखों से देखना
- मोबाइल कैमरा से सीधा देखना
- दूरबीन या DSLR बिना सोलर फिल्टर
सूर्य ग्रहण का पृथ्वी पर प्रभाव
- प्रकाश में हल्की कमी
- तापमान में थोड़ी गिरावट
- पक्षियों और जानवरों के व्यवहार में अस्थायी बदलाव
- वातावरण में कुछ समय के लिए अजीब-सी शांति
निष्कर्ष
17 फ़रवरी 2026 का Annular Solar Eclipse एक दुर्लभ और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। इसमें सूर्य के चारों ओर आग के छल्ले जैसा दृश्य दिखाई देगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन विश्व के कई हिस्सों में यह एक यादगार खगोलीय दृश्य बनेगा।




