नामकुम थाना क्षेत्र : रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में हाल के दिनों में हुई लगातार गृहभेदन और चोरी की घटनाओं ने आम लोगों में चिंता बढ़ा दी थी। बंद पड़े घरों को निशाना बनाकर की जा रही इन वारदातों से स्थानीय नागरिकों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही थी। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य इन घटनाओं का शीघ्र उद्भेदन कर अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाना था।
एसआईटी की रणनीति और जांच प्रक्रिया
एसआईटी ने सबसे पहले पूर्व में आरोप पत्रित अपराधियों, संदिग्ध व्यक्तियों और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का गहन सत्यापन किया। इसके साथ ही तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और स्थानीय आसूचना तंत्र को सक्रिय किया गया। पुलिस ने यह पाया कि नामकुम थाना क्षेत्र में हुए गृहभेदन/चोरी के तीन मामलों—नामकुम थाना कांड संख्या 288/25, 20/26 एवं 31/26—के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था।
दिनांक 14 फरवरी 2026 को ठोस तकनीकी साक्ष्य और आसूचना के आधार पर एसआईटी ने इन तीनों मामलों का सफल उद्भेदन कर लिया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह मोहल्लों में घूम-घूमकर बंद पड़े घरों की रेकी करता था और अवसर मिलते ही चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था।
संगठित चोरी गिरोह का तरीका
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि गिरोह के सदस्य दिन और रात—दोनों समय चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। आमतौर पर लोग दिन में काम पर निकल जाते हैं या किसी समारोह में जाते हैं, उसी दौरान यह गिरोह बंद घरों को निशाना बनाता था। चोरी के दौरान मुख्य रूप से सोने-चांदी के आभूषण और नकदी पर फोकस किया जाता था, क्योंकि इन्हें आसानी से खपाया जा सकता है।
दो कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी
उद्भेदन के क्रम में पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े दो प्रमुख अपराधियों को गिरफ्तार किया—
- फिरदोस अली, उम्र 19 वर्ष, पिता स्वर्गीय सरवर अली, निवासी मौलाना आजाद कॉलोनी गली नंबर-05, थाना नामकुम, जिला रांची।
- दिलीप सोनी, उम्र 37 वर्ष, पिता स्वर्गीय सीताराम सोनी, निवासी एचबी रोड लोहरा कोंचा, थाना लालपुर, जिला रांची।
पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि दोनों अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास रहा है और वे पूर्व में भी ज्वेलरी चोरी और चोरी का सामान खपाने के आरोप में जेल जा चुके हैं।
ज्वेलरी खपाने का नेटवर्क
पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को कांटाटोली स्थित “मों ज्वेलर्स” नामक दुकान में सस्ते दामों पर बेचा जाता था। अभियुक्त दिलीप सोनी ज्वेलरी प्राप्त होते ही उसे गलाकर नए आभूषणों के निर्माण में उपयोग कर लेता था, जिससे चोरी के सामान की पहचान मुश्किल हो जाती थी। यह तरीका पेशेवर अपराधियों द्वारा अपनाया जाता है, जो संगठित अपराध की ओर इशारा करता है।
बरामदगी: चोरी का बड़ा जखीरा
पुलिस ने छापामारी के दौरान भारी मात्रा में चोरी का सामान बरामद किया, जिसमें शामिल हैं—
- गलाया हुआ सोना पत्तर 02 पीस, क्वॉइल 01 पीस और टूटा-फूटा स्क्रैप, कुल वजन लगभग 15.40 ग्राम
- 10 बड़े एवं 04 छोटे अंगूठी (वजन करीब 18 ग्राम)
- मंगलसूत्र का लॉकेट, 07 नथिया, 01 दोलना (कुल वजन लगभग 23.10 ग्राम)
- भगवान एवं अन्य डिज़ाइन के 13 लॉकेट (वजन करीब 08.5 ग्राम)
- छोटे कान के बाली 24 पीस (वजन 09.3 ग्राम)
- 11 जोड़ा टॉप्स, कुल 22 पीस (वजन लगभग 13.5 ग्राम)
- चांदी जैसे आभूषण—पायल, अंगूठी, नग जड़ा हुआ (वजन करीब 33.5 ग्राम)
- एक रजिस्टर, जिस पर “Aryan Chabak” लिखा है, जिसमें अभियुक्त व अन्य लोगों के मोबाइल नंबर दर्ज हैं
- ओप्पो कंपनी का एक मोबाइल फोन
छापामारी दल की भूमिका
इस सफल कार्रवाई में छापामारी दल की अहम भूमिका रही। दल का नेतृत्व श्री अमर कुमार पाण्डेय, वरीय पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय-1), रांची ने किया। उनके साथ नामकुम थाना के थाना प्रभारी श्री मनोज कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक शशि रंजन, गौतम कुमार, सोनू कुमार दास, सहायक अवर निरीक्षक देवेन्द्र कुमार सिंह, जयप्रकाश कुमार, उज्जवल कुमार सिंह तथा नामकुम थाना रिजर्व गार्ड के सशस्त्र बल शामिल थे।
पुलिस का संदेश और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। रांची पुलिस का कहना है कि संगठित अपराध के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
आम नागरिकों से अपील
रांची पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें, लंबे समय तक घर बंद छोड़ने पर पड़ोसियों और स्थानीय थाना को सूचना दें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
निष्कर्ष
नामकुम थाना क्षेत्र में गृहभेदन और चोरी के तीन मामलों का सफल उद्भेदन रांची पुलिस की सतर्कता, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क का परिणाम है। संगठित अपराधियों की गिरफ्तारी और चोरी गए आभूषणों की बरामदगी से न केवल पीड़ितों को राहत मिली है, बल्कि अपराधियों के हौसले भी पस्त हुए हैं। यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




