रांची:
झारखंड विधानसभा बजट सत्र 2026–27 : झारखंड विधानसभा का पंचम (बजट) सत्र वर्ष 2026–27 के लिए पूरी तरह ऐतिहासिक बनने जा रहा है। इस बार विधानसभा की कार्यवाही को डिजिटल और पेपरलेस रूप में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला न केवल प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि इससे झारखंड आधुनिक और पारदर्शी शासन प्रणाली की ओर तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
राज्य की राजधानी रांची स्थित झारखंड विधानसभा में होने वाले इस बजट सत्र के दौरान विधायी कार्यों में कागज के उपयोग को न्यूनतम किया जाएगा और अधिकतर प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी होंगी। विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी।
क्यों खास है यह बजट सत्र
झारखंड विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब बजट सत्र में नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) के माध्यम से कामकाज किया जाएगा। इसके तहत विधायकों को प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, विधेयक, संशोधन और बजट से जुड़े सभी दस्तावेज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य न सिर्फ कागज की खपत कम करना है, बल्कि विधायी प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और पर्यावरण के अनुकूल बनाना भी है।
NeVA ऐप से होगी पूरी कार्यवाही
डिजिटल विधानसभा के लिए विधायकों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें NeVA ऐप पहले से इंस्टॉल है। इस ऐप के जरिए विधायक:
- सदन की कार्यसूची देख सकेंगे
- विधेयकों और प्रस्तावों का अध्ययन कर सकेंगे
- संशोधन ऑनलाइन जमा कर सकेंगे
- प्रश्नोत्तर सत्र की जानकारी रियल टाइम में प्राप्त कर सकेंगे
इस व्यवस्था से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि दस्तावेजों के रख-रखाव और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस फैसले को झारखंड के लोकतांत्रिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव बताया है। उन्होंने कहा कि आज का दौर डिजिटल गवर्नेंस का है और विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था का डिजिटल होना समय की मांग है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, डिजिटल कार्यवाही से न केवल प्रशासनिक खर्च में कमी आएगी, बल्कि जनता को भी विधानसभा की गतिविधियों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
बजट सत्र 2026–27 की प्रमुख प्राथमिकताएं
इस सत्र में वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट पेश किया जाएगा, जिसमें सरकार की विकास योजनाओं और आर्थिक रणनीति की झलक मिलेगी। बजट में निम्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है:
- ग्रामीण विकास और कृषि
- महिला सशक्तिकरण
- शिक्षा और स्वास्थ्य
- बुनियादी ढांचा और सड़क निर्माण
- रोजगार और स्वरोजगार योजनाएं
सरकार का प्रयास है कि बजट जनहितकारी हो और राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
डिजिटल विधानसभा के फायदे
✅ पर्यावरण संरक्षण
कागज रहित कार्यवाही से लाखों पन्नों की बचत होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
✅ तेज और पारदर्शी प्रक्रिया
डिजिटल दस्तावेज तुरंत उपलब्ध होंगे, जिससे विधायकों को तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा और चर्चा अधिक सार्थक होगी।
✅ रिकॉर्ड सुरक्षित
डिजिटल डेटा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और भविष्य में आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि यह पहल सराहनीय है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। जैसे:
- सभी विधायकों की डिजिटल साक्षरता
- इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी बाधाएं
- डेटा सुरक्षा और साइबर सेफ्टी
इन चुनौतियों को देखते हुए विधानसभा सचिवालय द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण और आईटी सपोर्ट की व्यवस्था की गई है, ताकि सत्र के दौरान किसी प्रकार की समस्या न आए।
देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर झारखंड
देश के कई राज्यों में पहले से ही डिजिटल विधानसभा की व्यवस्था लागू है। अब झारखंड भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इससे राज्य की छवि एक आधुनिक और तकनीक-समर्थ शासन वाले प्रदेश के रूप में मजबूत होगी।
जनता के लिए क्या बदलेगा
डिजिटल कार्यवाही का सीधा लाभ आम जनता को भी मिलेगा। विधानसभा की कार्यवाही को ऑनलाइन देखा और समझा जा सकेगा। इससे लोकतंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों का विश्वास मजबूत होगा।
निष्कर्ष
झारखंड विधानसभा का डिजिटल और पेपरलेस बजट सत्र 2026–27 सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार की नई शुरुआत है। यह कदम राज्य को डिजिटल गवर्नेंस के नए युग में ले जाने वाला साबित हो सकता है।
अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में झारखंड देश के उन राज्यों में शामिल होगा, जो तकनीक के माध्यम से लोकतंत्र को और मजबूत बना रहे हैं।
डिस्क्लेमर:
यह समाचार विभिन्न आधिकारिक बैठकों और प्रशासनिक जानकारियों पर आधारित है। सत्र के दौरान निर्णयों और कार्यक्रमों में आवश्यकतानुसार बदलाव संभव है।




