योगेंद्र साव गिरफ्तार: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और झारखंड सरकार में पूर्व मंत्री रहे योगेंद्र साव तथा उनकी पत्नी, बड़कागांव की पूर्व विधायक निर्मला देवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। यह गिरफ्तारी 19 फरवरी को दोपहर करीब तीन बजे हजारीबाग जिले के केरेडारी क्षेत्र अंतर्गत चट्टी बरियातू में चल रहे धरना स्थल से की गई।
धरना स्थल से हुई गिरफ्तारी
मिली जानकारी के अनुसार, योगेंद्र साव पिछले कई महीनों से NTPC और Adani Group से जुड़े कोल प्रोजेक्ट्स के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहे थे। 31 दिसंबर 2025 से वे चट्टी बरियातू स्थित एनटीपीसी कोल माइंस क्षेत्र में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। उनका आरोप था कि कोल परियोजनाओं के नाम पर स्थानीय ग्रामीणों की जमीन छीनी जा रही है, उन्हें न तो उचित मुआवजा दिया जा रहा है और न ही पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गई है।
बुधवार को जब योगेंद्र साव धरना स्थल पर मौजूद थे, उसी दौरान भारी पुलिस बल वहां पहुंचा और उन्हें हिरासत में ले लिया। उनके साथ मौजूद उनकी पत्नी निर्मला देवी को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद दोनों को संबंधित थानों में ले जाया गया, जहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कई थानों में दर्ज हैं मामले
पुलिस सूत्रों के अनुसार, योगेंद्र साव के खिलाफ बड़कागांव, केरेडारी, पगार ओपी समेत कई थानों में विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। इन मामलों में सरकारी कार्य में बाधा, कानून-व्यवस्था भंग करने और बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन जैसे आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि इन्हीं मामलों के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। उनका कहना है कि योगेंद्र साव लंबे समय से कोल परियोजनाओं के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, जिससे सरकार और कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा था।
दिल्ली दौरे से लौटते ही कार्रवाई
गिरफ्तारी से पहले योगेंद्र साव अपनी बेटी और बड़कागांव की वर्तमान विधायक अंबा प्रसाद के साथ दिल्ली गए थे। वहां उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान झारखंड में कोल परियोजनाओं से प्रभावित लोगों की समस्याओं, विस्थापन और मुआवजे के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
दिल्ली से लौटने के बाद योगेंद्र साव सीधे चट्टी बरियातू स्थित धरना स्थल पर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने वहां पहुंचकर उन्हें हिरासत में ले लिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद सरकार दबाव में आ गई और जल्दबाजी में यह कार्रवाई की गई।
कोल प्रोजेक्ट का विरोध क्यों?
योगेंद्र साव और निर्मला देवी लंबे समय से हजारीबाग और रामगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित कोल प्रोजेक्ट्स का विरोध करते रहे हैं। उनका आरोप है कि इन परियोजनाओं से हजारों आदिवासी और किसान परिवारों का विस्थापन होगा। उन्होंने कई बार कहा कि कंपनियां रोजगार और विकास का वादा तो करती हैं, लेकिन हकीकत में स्थानीय लोगों को बेरोजगार और बेघर कर दिया जाता है।
धरने के दौरान योगेंद्र साव ने यह भी आरोप लगाया था कि एनटीपीसी और अदाणी समूह से जुड़ी परियोजनाओं में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हो रहा है। जंगलों की कटाई, जल स्रोतों के सूखने और प्रदूषण बढ़ने से क्षेत्र की स्थिति बदतर हो रही है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही झारखंड की राजनीति गरमा गई। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है। कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हजारीबाग और रांची में प्रदर्शन की चेतावनी दी है। वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, धरना-प्रदर्शन के दौरान कई बार कानून व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिसके चलते यह कदम उठाया गया।
आगे क्या?
फिलहाल योगेंद्र साव और निर्मला देवी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है। उनके वकीलों की ओर से जमानत के लिए जल्द ही अदालत में याचिका दायर की जा सकती है। इस मामले पर कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।
हजारीबाग समेत आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
निष्कर्ष
योगेंद्र साव और निर्मला देवी की गिरफ्तारी ने एक बार फिर झारखंड में कोल परियोजनाओं, विस्थापन और स्थानीय लोगों के अधिकारों के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला सिर्फ कानूनी दायरे में सिमटता है या फिर एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता है।
Disclaimer
यह समाचार विभिन्न स्रोतों और प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। मामले से जुड़ी नई जानकारी आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।




