रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उस समय राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया, जब कोडरमा की विधायक नीरा यादव ने सदन में एक भावनात्मक और विवादित सवाल उठाते हुए कहा— “राम के नाम से नफरत क्यों?”। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली और कुछ समय के लिए सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
यह पूरा मामला राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उठा, जब नीरा यादव सरकार की नीतियों, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर अपनी बात रख रही थीं।
“भयमुक्त राज्य” के दावे पर सवाल
नीरा यादव ने सरकार के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें झारखंड को “भयमुक्त राज्य” बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य वास्तव में भयमुक्त है, तो फिर रांची से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लगातार हो रही हत्याएं, लूट, डकैती और महिलाओं के खिलाफ अपराध क्यों सामने आ रहे हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजधानी रांची में ही आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। ऐसे में सरकार का भयमुक्त राज्य का दावा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।
“राम के नाम से नफरत क्यों?”—बयान से मचा हंगामा
अपने भाषण के दौरान नीरा यादव ने कहा कि झारखंड की संस्कृति और परंपरा में राम केवल एक धार्मिक नाम नहीं, बल्कि आस्था, मर्यादा और संस्कार का प्रतीक हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि कुछ लोग या विचारधाराएं राम के नाम से असहज महसूस करती हैं।
इस टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष के विधायकों ने कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि विपक्ष जानबूझकर धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। सत्ता पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार किसी भी धर्म या आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी समुदायों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
सत्ता पक्ष का पलटवार
सत्ता पक्ष के नेताओं ने नीरा यादव के बयान को भड़काऊ करार देते हुए कहा कि विपक्ष जनता का ध्यान असली मुद्दों—जैसे रोजगार, विकास और बजट—से भटकाने की कोशिश कर रहा है।
सत्ता पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय में भ्रष्टाचार और अवैध खनन चरम पर था, जबकि मौजूदा सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।
अवैध खनन और पर्यावरण का मुद्दा
नीरा यादव ने अपने भाषण में अवैध खनन, जंगलों की कटाई और पहाड़ों के दोहन का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड कभी अपने हरे-भरे जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता था, लेकिन अब कई इलाकों में केवल कंक्रीट के जंगल नजर आते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर पर्यावरण को नजरअंदाज कर रही है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
भ्रष्टाचार और निकाय चुनाव पर आरोप
विधायक नीरा यादव ने डोमचांच नगर पंचायत का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भ्रष्टाचार से तंग आकर लोगों ने नामांकन प्रक्रिया का बहिष्कार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निकायों में पारदर्शिता की भारी कमी है और जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अब पहले से अधिक जागरूक हो चुकी हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रही हैं।
सदन में तीखी नोक-झोंक
इस दौरान सदन में कई बार शोर-शराबा भी हुआ। देवघर और दुमका से जुड़े अवैध गिट्टी लदे ट्रकों का मुद्दा भी उठा, जिस पर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगे।
एक तरफ जहां सत्ता पक्ष ने विपक्ष के शासनकाल की घटनाओं का जिक्र किया, वहीं विपक्ष ने मौजूदा सरकार पर “पहाड़ खाए जाने” जैसे तीखे तंज कसे।
राजनीतिक और सामाजिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीरा यादव का बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मूल्यों से जुड़ा हुआ संदेश भी है। ऐसे बयान जहां एक ओर समर्थकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी बढ़ाते हैं।
झारखंड विधानसभा का यह सत्र इस बात का संकेत है कि बजट पर चर्चा के साथ-साथ राज्य की राजनीति अब संस्कृति, आस्था और पहचान जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द भी घूम रही है।
निष्कर्ष
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में नीरा यादव द्वारा उठाया गया सवाल— “राम के नाम से नफरत क्यों?”—राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस ने यह साफ कर दिया कि आने वाले समय में ऐसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा बने रहेंगे।
अब देखना यह होगा कि सरकार इन बहसों के बीच विकास, कानून-व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर कितनी मजबूती से आगे बढ़ पाती है।
Disclaimer
यह समाचार विधानसभा की कार्यवाही और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। व्यक्त किए गए विचार संबंधित नेताओं के निजी/राजनीतिक बयान हैं। प्रकाशक इन विचारों की पुष्टि या समर्थन नहीं करता।


