रांची। देश में लागू किए गए नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी अनुपालन, अनुसंधान प्रक्रिया को वैज्ञानिक और समयबद्ध बनाने तथा पुलिसिंग को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से आज दिनांक 20 फरवरी 2026 को पुलिस मुख्यालय सभागार, रांची में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की संयुक्त अध्यक्षता भारत सरकार के गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा-II) श्रीमती निष्ठा तिवारी तथा झारखंड की महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक (DGP) श्रीमती तदाशा मिश्र ने की।
यह बैठक विशेष रूप से भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 जैसे नए कानूनों के प्रावधानों के क्रियान्वयन, पुलिस अनुसंधान में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों और तकनीक आधारित साक्ष्य संकलन को लेकर आयोजित की गई।
नवीन आपराधिक कानूनों के अनुपालन पर विस्तार से चर्चा
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और पीड़ित-केंद्रित बनाना है। इसके लिए पुलिस अनुसंधान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
श्रीमती निष्ठा तिवारी ने कहा कि नए कानूनों के तहत मामलों के अनुसंधान के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए, ताकि अनावश्यक देरी के कारण न्याय प्रभावित न हो।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी जिलों में दर्ज होने वाले मामलों में कानून के प्रावधानों के अनुरूप चार्जशीट और अनुसंधान रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि अभियोजन प्रक्रिया मजबूत हो।
ई-साक्ष्य ऐप के उपयोग पर विशेष जोर
बैठक का एक प्रमुख एजेंडा था ई-साक्ष्य ऐप (e-Sakshya App) का सही, सकारात्मक और प्रभावी उपयोग।
श्रीमती निष्ठा तिवारी ने जिलों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर बताया कि—
- कई जिलों में तकनीकी जानकारी की कमी
- प्रशिक्षण का अभाव
- नेटवर्क और हार्डवेयर से जुड़ी समस्याएं
के कारण ई-साक्ष्य ऐप का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने निर्देश दिया कि ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संकलन किया जाए, ताकि न्यायालय में साक्ष्य की विश्वसनीयता बनी रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल साक्ष्य आज के दौर में किसी भी केस की रीढ़ बन चुके हैं, विशेषकर साइबर अपराध और संगठित अपराधों में।
फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश
नवीन आपराधिक कानूनों की आत्मा के अनुरूप अनुसंधान को वैज्ञानिक बनाने के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद लेने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में निर्देश दिया गया कि—
- गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए
- पोस्टमार्टम, डीएनए, फिंगरप्रिंट, डिजिटल फॉरेंसिक जैसे साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जाए
- फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी न हो, इसके लिए समन्वय मजबूत किया जाए
श्रीमती तदाशा मिश्र ने कहा कि झारखंड पुलिस फॉरेंसिक-आधारित पुलिसिंग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए प्रशिक्षण व संसाधनों को लगातार बढ़ाया जा रहा है।
साइबर क्राइम और काउंटर टेररिज्म पर गहन समीक्षा
बैठक के दौरान साइबर अपराध, काउंटर टेररिज्म, ड्रग कंट्रोल, डिजास्टर मैनेजमेंट, पुलिस आधुनिकीकरण और विदेशियों की वैधता (Foreigners Validity) से जुड़े मामलों पर भी व्यापक चर्चा की गई।
साइबर अपराध को लेकर बताया गया कि—
- ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश, सोशल मीडिया अपराध बढ़ रहे हैं
- डिजिटल साक्ष्य का संरक्षण और विश्लेषण बेहद जरूरी है
- साइबर सेल और थानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है
काउंटर टेररिज्म के संदर्भ में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने, खुफिया जानकारी के त्वरित आदान-प्रदान और संवेदनशील मामलों में केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय पर बल दिया गया।
पुलिस कार्यप्रणाली की भी हुई समीक्षा
बैठक के दौरान उपरोक्त सभी विषयों से संबंधित पुलिस की कार्यक्षमता और कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई।
इसमें यह देखा गया कि—
- नए कानूनों के अनुरूप प्रशिक्षण कहां आवश्यक है
- किन जिलों में तकनीकी संसाधनों की कमी है
- अनुसंधान की गुणवत्ता कैसे बेहतर की जा सकती है
श्रीमती तदाशा मिश्र ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मैदानी स्तर पर पुलिसकर्मियों को नए कानूनों की पूरी जानकारी हो, ताकि कानून लागू करने में किसी तरह की त्रुटि न हो।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र और राज्य स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- डॉ. शाहिल अरोड़ा, उप-प्रधानाचार्य, सीडीटीआई, चंडीगढ़
- संयुक्त निदेशक, एसआईबी, रांची
- डायरेक्टर, डायरेक्टोरेट ऑफ प्रोसिक्युशन
- डायरेक्टर, हेल्थ सर्विस, झारखंड
- श्री प्रभात कुमार, पुलिस महानिरीक्षक, विशेष शाखा
- श्री असीम विक्रांत मिंज, पुलिस महानिरीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग
- श्रीमती ए. विजयालक्ष्मी, पुलिस महानिरीक्षक, प्रशिक्षण
- डॉ. माईकलराज एस., पुलिस महानिरीक्षक, अभियान
- श्री सुदर्शन प्रसाद मंडल, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय
- श्री पटेल मयूर कनैयालाल, पुलिस महानिरीक्षक, प्रोविजन
- श्री अजय लिंडा, पुलिस महानिरीक्षक, अपराध अनुसंधान
- श्री कार्तिक एस., पुलिस उप-महानिरीक्षक, झारखंड सशस्त्र पुलिस
इसके अलावा श्री हिमांशु मोहन, एडिशनल सेक्रेटरी, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, स्टेट कोऑर्डिनेटर NICIC-JS, डिप्टी डायरेक्टर (डायरेक्टोरेट ऑफ प्रोसिक्युशन) तथा अन्य वरीय पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
भविष्य की रणनीति और निष्कर्ष
बैठक के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि—
- नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण, तकनीक और समन्वय तीनों पर समान रूप से ध्यान देना होगा
- ई-साक्ष्य ऐप और फॉरेंसिक जांच को अनुसंधान की मुख्यधारा में लाना आवश्यक है
- साइबर अपराध और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रोएक्टिव पुलिसिंग को बढ़ावा देना होगा
श्रीमती निष्ठा तिवारी ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार, झारखंड पुलिस को तकनीकी, प्रशिक्षण और नीतिगत स्तर पर हर संभव सहयोग देती रहेगी। वहीं, डीजीपी श्रीमती तदाशा मिश्र ने कहा कि झारखंड पुलिस नए कानूनों की भावना के अनुरूप न्याय-केंद्रित और आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।
डिस्क्लेमर
यह समाचार पुलिस मुख्यालय, झारखंड द्वारा मीडिया सेल के माध्यम से जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। भविष्य में दिशा-निर्देशों में आवश्यकतानुसार परिवर्तन संभव है।
— मीडिया सेल, पुलिस मुख्यालय, झारखंड, रांची




