सिमडेगा पुलिस ने चार एकड़ में अवैध अफीम की फसल नष्ट की, नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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Simdega News: नशे के अवैध कारोबार और अफीम (opium) की खेती पर पुलिस की मुहिम के तहत आज कोलेबिरा थाना क्षेत्र के जितिया टोली (शाहपुर पंचायत) में करीब चार एकड़ ज़मीन पर फैली अवैध अफीम की फसल को सिमडेगा पुलिस ने नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई सरकार की नशा मुक्ति और अवैध खेती के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति का हिस्सा है और इससे इलाके में हड़कंप मच गया है।

ग्रामीणों की सूचना पर शुरू हुआ छापामारी अभियान

स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सतर्कता दिखाते हुए पुलिस को जानकारी दी गई कि शाहपुर पंचायत में कहीं अफीम की अवैध खेती चल रही है। ग्रामीणों ने कहा कि फसल को रोकने और छुपाने के लिए खेतों के चारों ओर कंटीले तारों से सुरक्षित घेरा बनाया गया था ताकि बाहर से नजर न पड़े। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत क्रैकडाउन ऑपरेशन के लिए मौके पर पहुंची और वहां से अवैध पोस्ते की खेती को खोजा।

पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से सत्यापन के बाद यह पाया कि लगभग तीन से चार एकड़ ज़मीन पर अवैध अफीम की खेती की गई थी। कार्रवाई के दौरान पूरी फसल को अस्थाई तौर पर नष्ट कर दिया गया, जिससे आगे इसका इस्तेमाल नशे के उत्पादन या बिक्री में न हो सके।

पुलिस की सख्ती और कार्रवाई का उद्देश्य

यह कार्रवाई अवैध खेती और नशे के कारोबार के खिलाफ सरकार के कड़ी कानून व्यवस्था दृष्टिकोण का प्रतीक है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अवैध खेती, व्यापार या नशे संबंधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नशे के विरुद्ध पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सजग हैं और नशा मुक्ति के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।

पुलिस टीम में एसडीपीओ बैजू उरांव, थाना प्रभारी हर्ष कुमार शाह, अंचल अधिकारी अनुप कच्छप, बीटीएम पुष्पांजलि कुजूर सहित अन्य प्रशासनिक कर्मचारी मौजूद रहे और उन्होंने संयुक्त रूप से इस अभियान को संचालन में रखा।

सिमडेगा में अफीम की खेती — क्यों समस्या है गंभीर?

अफीम की खेती और पोस्ते (poppy) का अवैध उत्पादन भारतीय कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका उत्पादन, संग्रह और प्रसंस्करण न केवल नशे की आपकी तक्नालॉजी को बढ़ाता है, बल्कि यह अपराधियों और नशा तस्करों के लिए बड़ा स्रोत बन जाता है। झारखंड जैसे राज्य में जहां सामूहिक रूप से खेती की जाती है, वहीं अफीम का अवैध उत्पादन अंतर-राज्यीय गिरोहों के लिए भी स्थायी सोर्स बनता है।

राज्य में अफीम की फसल का उत्पादन खाने योग्य फसलों के मुकाबले अधिक मुनाफे वाला माना जाता है, जिससे स्थानीय किसान और गिरोह कभी-कभी इसका सहारा लेते हैं। इस वजह से सुरक्षा बल न सिर्फ पुलिस स्तर पर, बल्कि जंगल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता से निगरानी रखते हैं।

अवैध खेती पर पूर्व की घटनाएँ

पहले भी झारखंड के अन्य जिलों में अफीम की खेती को लेकर पुलिस ने कई बड़े अभियान चलाए हैं। उदाहरण के तौर पर, हज़ारीबाग जिले में जंगल के इलाके में लगभग पाँच एकड़ अवैध अफीम की फसल को नष्ट किया गया था और एक दर्जन से अधिक डिलीवरी पाइपों को जब्त किया गया था।

इस तरह की कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि अफीम की अवैध खेती पूर्णतः समाप्त नहीं हुई है, लेकिन पुलिस लगातार क्षेत्रीय निगरानी बढ़ाकर इसे रोकने का प्रयास कर रही है। इसी प्रकार, पुलिस अवैध पोस्ता की खेती को लेकर इलाके में निरंतर छापेमारी और निगरानी जारी रखती है।

नशे के खिलाफ सरकारी नीति और पुलिस अनुकूलता

उल्लेखनीय है कि भारत में अफीम और पोस्ता जैसे पौधों के अवैध उत्पादन के खिलाफ नशा नियंत्रण कानून (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) लागू है। यह कानून न केवल खेती को अपराध घोषित करता है बल्कि इसके उत्पादन और बिक्री को गंभीर जुर्माना और सजा से जोड़ता है।

पुलिस इस कानून के तहत लोगों को समझाने, गुप्त जानकारी एकत्र करने और प्रतिबंधित खेती के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने में लगी रहती है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से लोगों को विकल्पी खेती और रोजगार विकल्प के बारे में जागरूक भी करते हैं ताकि वे अवैध खेती की ओर आकर्षित न हों।

पुलिस और प्रशासन की अगली रणनीति

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि अफीम की खेती से जुड़े मामलों पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी और किसी भी तरह की गैरकानूनी खेती पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पुलिस स्थानीय ग्रामीणों के साथ साझेदारी में काम कर रही है ताकि किसी भी सूचना को तुरंत पकड़ा जा सके।

पुलिस विभाग ने बताया है कि वे स्थानीय स्तर पर गुप्त सुचनाओं के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेंगे ताकि किसी भी अवैध खेती को उत्पादन से पहले पकड़ा जा सके, जिससे अपराध की जड़ तक पहुंचा जा सके। स्थानीय निवासियों को भी इस दिशा में पुलिस से सहयोग करने का आह्वान किया गया है।

समुदाय का समर्थन और सुरक्षित समाज की दिशा

ग्रामीणों द्वारा पुलिस को सूचना देना यह दर्शाता है कि समुदाय भी नशे और अवैध खेती के खिलाफ सजग है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना की है और कहा कि वे आगे भी ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों से अपने गांव को सुरक्षित रखेंगे।

स्थानीय पंचायतों और समुदाय के नेताओं ने भी इस अभियान की समर्थन में कहा है कि अवैध खेती और नशा समाज के लिए विनाशकारी है, और ऐसे मामलों को कड़ी निगरानी और कानूनी कार्रवाई के अंतर्गत लाने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

सिमडेगा पुलिस की आज की चार एकड़ में अवैध अफीम की फसल को नष्ट करने की कार्रवाई न केवल नशे के खिलाफ सख्त दृष्टिकोण को दर्शाती है बल्कि यह पुलिस-समुदाय साझेदारी का भी उदाहरण है। सरकारी नीतियों और कानूनों के तहत ऐसे अभियानों से अवैध खेती और नशा तस्करी पर लगाम लगाने में मदद मिलती है।

पुलिस की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि कोई भी व्यक्ति यदि अवैध खेती में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ शासकीय और कानूनी कार्रवाई अंजाम तक पहुंचाई जाएगी। इससे क्षेत्र में नशा मुक्त और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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