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“कानून का शासन या नगर निगम की मनमानी?” — रांची के 50 हजार पथ-विक्रेताओं ने मेयर प्रत्याशियों के सामने रखी सार्वजनिक चुनौती | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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Ranchi News रांची शहर के लगभग 50,000 पथ-विक्रेताओं ने नगर निगम और आगामी नगर निकाय चुनावों के बीच एक तीखा, लेकिन लोकतांत्रिक सवाल खड़ा कर दिया है—क्या शहर में कानून का शासन चलेगा या प्रशासनिक मनमानी? यह सवाल केवल फुटपाथ या ठेले-खोमचे तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की आजीविका से सीधे जुड़ा हुआ है। यह बात ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस से संबद्ध झारखंड पथविक्रेता महासंघ और इंडियन हॉकर्स अलायंस द्वारा जारी एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है ।

स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट लागू न करने का आरोप

प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि पिछले दस वर्षों से नगर निगम ने स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014 को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया। न तो समुचित सर्वे कराया गया, न Certificate of Vending (CoV) जारी हुए, न ही वेंडिंग ज़ोन घोषित किए गए। इसके अलावा, कानून के अनुरूप लोकतांत्रिक टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) का गठन भी नहीं किया गया।

विक्रेता संगठनों का कहना है कि 2016 में कराए गए सर्वे को आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे हजारों पात्र विक्रेता पहचान और अधिकार से वंचित रह गए। अब उसी प्रशासनिक विफलता का हवाला देकर पथ-विक्रेताओं को “अतिक्रमणकारी” बताकर बेदखल किया जा रहा है—जो कि संस्थागत अन्याय का उदाहरण है।

“कानून लागू करना निगम का कर्तव्य था”

प्रेस विज्ञप्ति में यह सवाल सीधे तौर पर उठाया गया है कि जब कानून लागू करना नगर निगम का दायित्व था, तो उसकी विफलता का दंड गरीब पथ-विक्रेताओं को क्यों भुगतना पड़े?
विक्रेताओं का कहना है कि वर्षों तक नियमों को ताक पर रखने के बाद अचानक बेदखली अभियान चलाना लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।

उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी का आरोप

संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि माननीय झारखंड उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अवैध बेदखली जारी है। प्रेस विज्ञप्ति में उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सोनल तिवारी के हवाले से कहा गया कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 नगर निकायों पर बाध्यकारी कानून है और बिना वैध सर्वे, विधिसम्मत TVC और CoV के किसी भी प्रकार की बेदखली असंवैधानिक है। ऐसे मामलों में नगर निगम को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं ।

केवल फुटपाथ नहीं, परिवारों का भविष्य दांव पर

प्रेस विज्ञप्ति में जोर देकर कहा गया है कि यह मुद्दा केवल फुटपाथ या ठेलों का नहीं है। हर बेदखली के साथ एक परिवार की आर्थिक रीढ़ टूटती है।

  • बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है
  • महिलाओं की आजीविका छिनती है
  • परिवारों को कर्ज और भुखमरी का सामना करना पड़ता है

संगठनों का कहना है कि नगर निगम की विफलता का बोझ गरीबों पर नहीं डाला जा सकता

श्रमिक नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

अशोक यादव, महासचिव, AITUC झारखंड ने कहा कि कानून लागू न करना और फिर गरीबों पर कार्रवाई करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने नई सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की ।

महेंद्र पाठक, वरिष्ठ श्रमिक नेता ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट संसद का कानून है और यदि इसे लागू नहीं किया गया तो व्यापक जनसंघर्ष होगा।

विकाश वर्मा, नेता, IHA झारखंड ने कहा कि अधूरे सर्वे और गैर-लोकतांत्रिक TVC के आधार पर की गई कोई भी कार्रवाई वैध नहीं मानी जा सकती।

“कानून के साथ हैं, मनमानी के साथ नहीं”

IHA झारखंड के वरिष्ठ नेताओं मनोज महतो, चंदन वर्मा और मोहम्मद इसाक ने संयुक्त बयान में कहा कि पथ-विक्रेता कानून के साथ हैं। वे शुल्क देने, व्यवस्था का हिस्सा बनने और नियमों का पालन करने को तैयार हैं, लेकिन अपमान, जबरन और गैर-कानूनी बेदखली स्वीकार नहीं करेंगे ।

मेयर प्रत्याशियों से सीधे सवाल

लोकतंत्र के इस दौर में, शहर के मतदाता होने के नाते पथ-विक्रेताओं ने सभी मेयर प्रत्याशियों से सार्वजनिक और लिखित घोषणा की मांग की है। उन्होंने सवाल रखा है कि सत्ता में आने पर क्या प्रत्याशी यह सुनिश्चित करेंगे कि—

  1. स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 पूर्ण रूप से लागू होगा?
  2. नया, पारदर्शी सर्वे कराया जाएगा?
  3. लोकतांत्रिक तरीके से TVC का गठन होगा?
  4. सभी पात्र विक्रेताओं को CoV जारी किया जाएगा?
  5. अवैध बेदखली और उत्पीड़न तुरंत रोका जाएगा?
  6. उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन होगा?

विक्रेताओं ने स्पष्ट कहा—“हमें आश्वासन नहीं, प्रतिबद्धता चाहिए; हमें दिलासा नहीं, वचन चाहिए।”

चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं

प्रेस विज्ञप्ति में यह रेखांकित किया गया कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि रांची में कानून का शासन होगा या प्रशासनिक मनमानी
50,000 से अधिक पथ-विक्रेता और उनके परिवार लोकतांत्रिक तरीके से जवाब मांग रहे हैं। उनका संदेश साफ है—“हम वोट भी देंगे और जवाबदेही भी मांगेंगे।”

निष्कर्ष

रांची के पथ-विक्रेताओं की यह आवाज़ शहर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत देती है। स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का पालन, न्यायालयों के निर्देशों का सम्मान और मानवीय दृष्टिकोण—ये सभी किसी भी भावी नगर प्रशासन की विश्वसनीयता की कसौटी बन चुके हैं। अब यह देखना होगा कि मेयर पद के दावेदार इस चुनौती का जवाब स्पष्ट नीति और ठोस प्रतिबद्धता के साथ देते हैं या नहीं।

Manish Singh Chandel

About Author

Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

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