Jayram Mahto : झारखंड विधानसभा के पंचम बजट सत्र के दौरान डुमरी के विधायक जयराम महतो ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कई अहम मुद्दों पर तीखे सवाल उठाए। गवर्नर के अभिभाषण से लेकर आगामी बजट तक पर असंतोष जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां कागजों में तो बेहतर दिखती हैं, लेकिन ज़मीन पर उनका असर नजर नहीं आता।
जयराम महतो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा और प्रचार में व्यस्त है, जबकि आम जनता, खासकर छात्र, बुजुर्ग और ग्रामीण इलाकों के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।
गवर्नर के अभिभाषण और बजट पर सवाल
विधानसभा में बोलते हुए जयराम महतो ने कहा कि गवर्नर के अभिभाषण में जिन योजनाओं और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है, उनकी वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर बजट में नए वादे तो करती है, लेकिन पुरानी योजनाओं की समीक्षा और क्रियान्वयन पर ध्यान नहीं देती।
उनके अनुसार,
“हर बार वही बातें दोहराई जाती हैं, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि पिछली घोषणाओं का क्या हुआ। जनता अब सवाल पूछ रही है।”
छात्रवृत्ति योजना पर गंभीर आरोप
जयराम महतो ने छात्रवृत्ति योजना को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आज भी झारखंड में सैकड़ों छात्र छात्रवृत्ति से वंचित हैं। खासकर वे छात्र जो गांव से शहर पढ़ने आए हैं, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि:
- आर्थिक तंगी के कारण कई छात्र पढ़ाई छोड़कर गांव लौटने को मजबूर हो गए
- कुछ छात्रों ने पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षा ऋण (लोन) लिया
- कई परिवारों ने घर की जरूरतों के लिए जमा पैसे बच्चों की पढ़ाई में खर्च कर दिए
इसके बावजूद सरकार की ओर से न तो समय पर छात्रवृत्ति मिली और न ही कोई वैकल्पिक सहायता।
जयराम महतो ने कहा कि यदि यही स्थिति रही, तो झारखंड के गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे।
मंईयां सम्मान योजना पर उठाए सवाल
विधायक जयराम महतो ने मंईयां सम्मान योजना को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने इस योजना को वोट बैंक की राजनीति करार देते हुए कहा कि सरकार का पूरा फोकस इसी योजना पर है, जबकि छात्रवृत्ति, वृद्धा पेंशन और अन्य जरूरी योजनाएं उपेक्षित हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- जो वर्ग वोट देने में सक्षम है, उसे योजनाओं का लाभ मिल रहा है
- लेकिन बुजुर्ग, छात्र और कमजोर तबके की योजनाएं हाशिये पर डाल दी गई हैं
उनका कहना था कि सरकार को योजनाओं को चुनावी नजरिए से नहीं, बल्कि सामाजिक जरूरतों के आधार पर लागू करना चाहिए।
बिजली कटौती पर सरकार को घेरा
बिजली व्यवस्था को लेकर भी जयराम महतो ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि
“झारखंड देश को बिजली देता है, फिर भी राज्य में अघोषित बिजली कटौती आम बात हो गई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल मीटर लगाए जाने के बावजूद:
- ऑनलाइन पेमेंट की व्यवस्था स्पष्ट नहीं है
- उपभोक्ताओं को सही जानकारी नहीं दी जा रही
जयराम महतो ने मांग की कि बिजली विभाग पंचायत स्तर पर बैठकें आयोजित करे और लोगों को बिलिंग, डिजिटल भुगतान और मीटर से जुड़ी सही जानकारी दे, ताकि भ्रम और परेशानी दूर हो सके।
JPSC मुद्दे पर जताई नाराज़गी
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामलों पर भी जयराम महतो ने गहरी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि बार-बार की अनियमितताओं और विवादों के कारण छात्रों को झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जो पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
उनके अनुसार:
- प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी है
- समय पर परिणाम और नियुक्तियां नहीं हो रहीं
- इससे युवाओं का भरोसा सिस्टम से उठता जा रहा है
उन्होंने सरकार से JPSC में सुधार और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
निष्कर्ष
पंचम बजट सत्र के दौरान जयराम महतो का यह बयान सरकार के लिए एक कड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। छात्रवृत्ति, बिजली, JPSC और सामाजिक योजनाओं को लेकर उठाए गए सवाल यह दिखाते हैं कि विपक्ष सरकार से सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि जवाबदेही और ठोस कार्रवाई चाहता है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों और सुझावों पर क्या रुख अपनाती है और क्या वाकई आने वाले बजट में इन मुद्दों का समाधान दिखाई देता है या नहीं।




