झारखंड बजट 2026 : झारखंड विधानसभा में पेश किए गए राज्य सरकार के नए बजट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुदेश महतो, जो राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू पार्टी के प्रमुख हैं, ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दिशाहीन, गरीब विरोधी और मध्यम वर्ग के साथ छल करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में 10,000 करोड़ रुपये की वृद्धि दिखाकर जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
“बजट बढ़ा, लेकिन विकास ठप”
सुदेश महतो ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े आंकड़े पेश कर अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि विगत बजट की आधी से भी कम राशि खर्च हो सकी है। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी 2026 तक राज्य सरकार पिछले बजट का मात्र 50.29 प्रतिशत ही खर्च कर पाई थी। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जब सरकार आवंटित धन का समुचित उपयोग ही नहीं कर पा रही, तो बजट बढ़ाने का औचित्य क्या है।
उन्होंने कहा कि अधूरे खर्च और कमजोर वित्तीय प्रबंधन के कारण राज्य में विकास कार्य ठप पड़े हैं। सड़कों, सिंचाई परियोजनाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा से जुड़े कई काम सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गए हैं।
छात्रों और युवाओं के साथ धोखा
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट छात्रों और युवाओं के लिए निराशाजनक है। राज्य में लाखों छात्र वर्षों से बकाया छात्रवृत्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। रोजगार सृजन को लेकर भी बजट पूरी तरह मौन है, जबकि बेरोजगारी झारखंड की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को सिर्फ नारों और आश्वासनों के सहारे बहला रही है। न तो नई नौकरियों की कोई स्पष्ट योजना सामने आई है और न ही निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कोई ठोस रोडमैप।
आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग उपेक्षित
सुदेश महतो ने कहा कि झारखंड की पहचान आदिवासी राज्य के रूप में है, लेकिन बजट में आदिवासी, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कोई ठोस और प्रभावी प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन वर्गों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की बातें तो की जाती हैं, लेकिन जमीन पर उसका असर नजर नहीं आता। न तो आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष विकास योजनाएं लाई गईं और न ही शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के लिए कोई नई पहल की गई।
केंद्र बनाम राज्य की बयानबाजी पर सवाल
सुदेश महतो ने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के बयानों में विरोधाभास की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री केंद्र सरकार से राशि नहीं मिलने का रोना रोते हैं, वहीं दूसरी ओर वित्त मंत्री सदन में कहते हैं कि राज्य के पास पर्याप्त धन है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर पैसा है, तो विकास क्यों नहीं दिख रहा?
उन्होंने इसे सरकार की नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़ा करने वाला बताया।
झारखंड आंदोलनकारी बजट से निराश: प्रवीण प्रभाकर
आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने भी बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बजट झारखंड आंदोलनकारियों की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला है। आंदोलनकारियों को आशा थी कि बजट में पेंशन वृद्धि, आरक्षण और अन्य सुविधाओं को लेकर ठोस प्रावधान किए जाएंगे, लेकिन सरकार ने उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी विस्थापन और पलायन की शिकार है। खनन, उद्योग और विकास परियोजनाओं के कारण लोग अपने घर-बार छोड़ने को मजबूर हैं, लेकिन बजट में उनके पुनर्वास और रोजगार की कोई ठोस योजना नहीं दिखती।
बेरोजगारी पर चुप्पी
प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि छात्रों और युवाओं को भी इस बजट से भारी निराशा हुई है। राज्य में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बन चुकी है, लेकिन बजट में इस पर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई। न तो नए उद्योगों की बात है और न ही स्वरोजगार को बढ़ावा देने की कोई प्रभावी योजना।
आदिवासी–दलित विरोधी बजट: डॉ. देवशरण भगत
आजसू पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने बजट को आदिवासी, दलित और पिछड़ा विरोधी करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो–कांग्रेस गठबंधन की सरकार जनता को गुमराह कर रही है।
डॉ. भगत ने कहा कि महिलाओं और किसानों के लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है। किसान आज भी सिंचाई, बीज, खाद और फसल के उचित दाम जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन बजट में इन मुद्दों का समाधान नजर नहीं आता।
खराब वित्तीय प्रबंधन का आरोप
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के खराब वित्तीय प्रबंधन के कारण विकास कार्य ठप हैं। योजनाएं घोषित तो होती हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन नहीं हो पाता। इससे जनता का भरोसा सरकार से उठता जा रहा है।
राजनीतिक बयान नहीं, जनता का सवाल
आजसू नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि जनता की आवाज है। बजट से आम आदमी, गरीब, किसान, छात्र, युवा और आंदोलनकारी सभी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर जमीनी हकीकत पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष
झारखंड सरकार द्वारा पेश किया गया यह बजट सत्ता पक्ष के लिए भले ही उपलब्धियों का दस्तावेज हो, लेकिन विपक्ष इसे दिशाहीन, गरीब विरोधी और जनभावनाओं से कटा हुआ बता रहा है। आजसू पार्टी के नेताओं की प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि आने वाले दिनों में बजट को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होगा। सवाल यह है कि क्या सरकार इन आरोपों का ठोस जवाब दे पाएगी, या यह बजट भी केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।
परवाज खान
केंद्रीय मीडिया संयोजक
डिस्क्लेमर
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