Sunday, 15 March 2026
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होलिका दहन 2026: शुभ मुहूर्त, तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व | Jharkhand News | Bhaiyajii News

होलिका दहन | Jharkhand News | Bhaiyajii News

रांची/डेस्क: रंगों के पर्व होली से पहले मनाया जाने वाला होलिका दहन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में होलिका दहन की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता है, क्योंकि इस बार फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास चंद्र ग्रहण का भी प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि होलिका दहन कब और किस समय करना शुभ रहेगा।

होलिका दहन 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की रात्रि में किया जाता है।
वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी।

अधिकांश पंचांगों के अनुसार:

  • होलिका दहन – 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
  • रंगों वाली होली – 4 मार्च 2026 (बुधवार)

हालांकि कुछ विद्वानों का मत है कि तिथि प्रारंभ होने के आधार पर 2 मार्च की शाम भी मान्य हो सकती है, लेकिन प्रदोष काल और पूर्णिमा के संयोग को देखते हुए 3 मार्च की शाम को ही होलिका दहन करना अधिक शुभ माना जा रहा है।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष गणना के अनुसार 2026 में होलिका दहन का शुभ समय शाम लगभग 6:20 बजे से रात 8:50 बजे तक माना जा रहा है।

होलिका दहन हमेशा प्रदोष काल में किया जाता है, जब सूर्यास्त के बाद का समय शुभ फलदायी माना जाता है।

ध्यान रहे कि भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता। इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग या पंडित से मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।

होलिका दहन का धार्मिक महत्व

होलिका दहन का संबंध प्राचीन पौराणिक कथा से जुड़ा है। कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप नामक असुर राजा स्वयं को भगवान मानता था और चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था।

हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई।

इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य और भक्ति की ही होती है।

होलिका दहन की पूजा विधि

होलिका दहन की पूजा सरल लेकिन श्रद्धा से की जाती है।

1. पूजा की तैयारी

  • लकड़ी और उपलों का ढेर तैयार करें
  • गेहूं की बालियां
  • नारियल
  • रोली, अक्षत, हल्दी
  • कच्चा सूत

2. पूजन प्रक्रिया

  • पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • होलिका के चारों ओर जल छिड़कें
  • रोली और अक्षत चढ़ाएं
  • कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा करें
  • भगवान विष्णु और प्रह्लाद का स्मरण करें

3. अग्नि प्रज्वलन

शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि प्रज्ज्वलित करें।
लोग गेहूं की बालियां और नारियल अग्नि में अर्पित करते हैं। इसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

4. राख का महत्व

होलिका की राख को शुभ माना जाता है। कई लोग इसे घर लाकर तिलक लगाते हैं और घर के कोनों में छिड़कते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

चंद्र ग्रहण का प्रभाव

2026 में पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण का भी प्रभाव रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय शुभ कार्य नहीं किए जाते।

इसलिए यदि ग्रहण का समय रात्रि में पड़ता है, तो होलिका दहन ग्रहण समाप्त होने के बाद ही करना उचित माना जाता है।

ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद रखे जाते हैं और सूतक काल में पूजा-पाठ से परहेज किया जाता है।

रंगों वाली होली कब है?

होलिका दहन के अगले दिन 4 मार्च 2026 को रंगों वाली होली मनाई जाएगी।

इस दिन लोग:

  • गुलाल और अबीर से होली खेलते हैं
  • एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं
  • गिले-शिकवे भूलकर प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं

होली का त्योहार सामाजिक एकता और सौहार्द का प्रतीक है।

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी

होलिका दहन करते समय पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।

  • हरे पेड़ों को काटकर लकड़ी का उपयोग न करें
  • प्लास्टिक या रासायनिक पदार्थ न जलाएं
  • प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें

इससे त्योहार की पवित्रता और प्रकृति दोनों सुरक्षित रहेंगी।

निष्कर्ष

होलिका दहन 2026 धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। फाल्गुन पूर्णिमा के शुभ अवसर पर किया गया यह अनुष्ठान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संदेश देता है।

सही मुहूर्त में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा सुख-समृद्धि लाती है।

आप सभी को होलिका दहन और होली की अग्रिम शुभकामनाएं।

Disclaimer

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारियों पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों में तिथि एवं मुहूर्त में अंतर संभव है। सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

Manish Singh Chandel

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