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धनबाद में मनरेगा कर्मियों का प्रदर्शन: रणधीर वर्मा चौक पर धरना, 11 मार्च तक सांकेतिक हड़ताल | Jharkhand News | Bhaiyajii News

रणधीर वर्मा चौक पर धरना | Jharkhand Newx | Bhaiyajii News

रणधीर वर्मा चौक पर धरना : झारखंड के धनबाद जिले में मनरेगा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। शहर के प्रमुख स्थान रणधीर वर्मा चौक पर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मी एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना दिया। यह प्रदर्शन राज्य-व्यापी आंदोलन का हिस्सा है, जिसके तहत 9 मार्च से 11 मार्च तक तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का आह्वान किया गया है।

इस आंदोलन में मनरेगा से जुड़े कर्मचारी, तकनीकी सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर और अन्य संविदा कर्मी शामिल हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

रणधीर वर्मा चौक बना प्रदर्शन का केंद्र

धनबाद का रणधीर वर्मा चौक शहर का प्रमुख प्रशासनिक और सामाजिक केंद्र माना जाता है। इसी स्थान पर मनरेगा कर्मियों ने धरना देकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।प्रदर्शन के दौरान कर्मियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। कई वक्ताओं ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।रणधीर वर्मा चौक का नाम शहीद आईपीएस अधिकारी Randhir Prasad Verma के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1991 में बैंक डकैती रोकते समय वीरता से लड़ते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल

मनरेगा कर्मियों के संगठन ने घोषणा की है कि यह हड़ताल 9 मार्च से 11 मार्च तक चलेगी। इस दौरान राज्य भर में मनरेगा से जुड़े कर्मचारी अपने कार्यों का बहिष्कार कर रहे हैं और विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर रहे हैं।संघ के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार ने इस अवधि के दौरान उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो 12 मार्च से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ धनबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड के हजारों मनरेगा कर्मी इसमें शामिल हो रहे हैं।

लंबित मानदेय बना मुख्य मुद्दा

प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का कहना है कि पिछले कई महीनों से उनका मानदेय लंबित है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।उनका आरोप है कि वे वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजनाओं को सफल बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा।कर्मियों के अनुसार कई कर्मचारियों को छह महीने से अधिक समय से मानदेय नहीं मिला है। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और कई लोग कर्ज लेने को मजबूर हो गए हैं।

स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग

मनरेगा कर्मियों की सबसे बड़ी मांगों में से एक उनकी नौकरी का स्थायीकरण है। उनका कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से संविदा के आधार पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया।इसके अलावा उन्होंने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई मांगें भी उठाई हैं। इनमें स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवजे की व्यवस्था शामिल है।कर्मियों का कहना है कि वे ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर लागू करते हैं, लेकिन उनके लिए कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।

ग्रेड पे और वेतन विसंगति का मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान कई वक्ताओं ने वेतन विसंगति का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि एक ही विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में काफी अंतर है।उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को ग्रेड पे और अन्य लाभ मिल रहे हैं, जबकि फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मियों को इन सुविधाओं से वंचित रखा गया है।कर्मियों ने मांग की कि सभी मनरेगा कर्मियों के लिए समान वेतन और ग्रेड पे की व्यवस्था लागू की जाए।

पांच सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन

मनरेगा कर्मियों ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें शामिल हैं:

  1. लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान
  2. संविदा कर्मियों का स्थायीकरण
  3. ग्रेड पे और वेतन विसंगति को दूर करना
  4. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की व्यवस्था
  5. कार्य परिस्थितियों में सुधार

कर्मियों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

पूरे झारखंड में आंदोलन का असर

यह आंदोलन सिर्फ धनबाद तक सीमित नहीं है। झारखंड के कई जिलों में मनरेगा कर्मियों ने प्रदर्शन और धरना कार्यक्रम आयोजित किए हैं।संघ के नेताओं के अनुसार इस आंदोलन में लगभग 5000 से अधिक मनरेगा कर्मी शामिल हो रहे हैं। यदि सरकार ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।कर्मियों का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण रोजगार और विकास की एक महत्वपूर्ण योजना है, लेकिन इस योजना को लागू करने वाले कर्मचारियों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

प्रशासन की नजर आंदोलन पर

धनबाद प्रशासन की नजर इस पूरे आंदोलन पर बनी हुई है। रणधीर वर्मा चौक पर धरना के दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रहे।प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यदि कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देता है तो उसे संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाएगा।

निष्कर्ष

धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर मनरेगा कर्मियों का यह प्रदर्शन राज्य भर में चल रहे बड़े आंदोलन का हिस्सा है। तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल के माध्यम से कर्मचारी सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।यदि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है। ऐसे में मनरेगा योजनाओं के कार्यों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।मनरेगा कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और इस बार समाधान मिलने तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं।

Manish Singh Chandel

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Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

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