रामनवमी पर डीजे प्रतिबंध से नाराज़ हजारीबाग विधायक, सदन के बाहर धरने पर बैठे | Jharkhand News | Bhaiyajii News

Ram Navami DJ ban Hazaribagh | Jharkhand News | Bhaiyajii News

Ram Navami DJ ban Hazaribagh : झारखंड में रामनवमी पर्व को लेकर प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बीच राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। हजारीबाग में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को लेकर हजारीबाग के विधायक ने कड़ी नाराज़गी जताई है। इस फैसले के विरोध में विधायक सदन के बाहर धरने पर बैठ गए और राज्य सरकार पर धार्मिक परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

विधायक का कहना है कि हजारीबाग की रामनवमी पूरे राज्य में अपनी भव्यता और परंपरा के लिए जानी जाती है। ऐसे में जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर रोक लगाना लोगों की धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करे और रामनवमी के जुलूस में डीजे बजाने की अनुमति दी जाए।

सदन के बाहर विरोध प्रदर्शन

रामनवमी जुलूस में डीजे बजाने पर रोक के खिलाफ विधायक ने विधानसभा परिसर के बाहर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रशासन ने बिना जनता की राय लिए ऐसा फैसला लिया है, जिससे लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है।

धरने के दौरान विधायक ने कहा कि अगर प्रशासन इस फैसले को वापस नहीं लेता है, तब भी हजारीबाग में रामनवमी के अवसर पर डीजे बजाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल संगीत का मामला नहीं है बल्कि एक सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासन ने क्यों लगाया प्रतिबंध

प्रशासन की ओर से कहा गया है कि रामनवमी के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने त्योहार के दौरान किसी भी तरह की अशांति को रोकने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे या तेज आवाज वाले संगीत पर रोक लगाने का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और किसी संभावित विवाद को रोकना है। इसके अलावा प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी भड़काऊ पोस्ट को तुरंत रोका जा सके।

प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह से सुरक्षा के मद्देनज़र लिया गया है और सभी धर्मों के त्योहारों के दौरान शांति बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

हजारीबाग में रामनवमी की परंपरा

झारखंड के हजारीबाग जिले में रामनवमी का त्योहार बेहद उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाता है। यहां की रामनवमी जुलूस की परंपरा कई दशकों पुरानी है और इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

रामनवमी से पहले कई सप्ताह तक शहर में धार्मिक कार्यक्रम और झांकियां निकाली जाती हैं। हर मंगलवार को मंगला जुलूस भी निकाला जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। रामनवमी के दिन यह आयोजन अपने चरम पर होता है और पूरे शहर में धार्मिक उत्सव का माहौल देखने को मिलता है।

ऐसे में डीजे पर प्रतिबंध को लेकर कई लोग नाराज़ हैं और इसे परंपरा के खिलाफ बताया जा रहा है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विधायक ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि धार्मिक आयोजनों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार को सभी धर्मों के त्योहारों के प्रति समान दृष्टिकोण रखना चाहिए।

विधायक ने यह भी मांग की कि हजारीबाग की प्रसिद्ध इंटरनेशनल श्री चैती रामनवमी को राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस आयोजन को राजकीय महोत्सव का दर्जा देती है, तो इससे न केवल धार्मिक भावना को सम्मान मिलेगा बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

रामनवमी के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जुलूस के मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है।

इसके अलावा ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के माध्यम से भीड़ पर नजर रखने की योजना बनाई गई है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार मनाएं।

जनता की मिश्रित प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले को लेकर जनता के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग प्रशासन के फैसले का समर्थन कर रहे हैं और इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बता रहे हैं। वहीं कई लोग इसे धार्मिक परंपरा में दखल मानते हुए विरोध जता रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रामनवमी के जुलूस में डीजे और पारंपरिक संगीत वर्षों से चलता आ रहा है और यह आयोजन की पहचान बन चुका है। ऐसे में अचानक प्रतिबंध लगाने से लोगों में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।

समाधान की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन और आयोजकों के बीच संवाद बेहद जरूरी होता है। यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से कोई समाधान निकालते हैं तो विवाद को आसानी से टाला जा सकता है।

रामनवमी जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे, वहीं आयोजकों की जिम्मेदारी होती है कि वे नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम का आयोजन करें।

निष्कर्ष

हजारीबाग में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर प्रतिबंध को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। विधायक के धरने और प्रशासन के फैसले के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं। यदि दोनों पक्ष सकारात्मक पहल करते हैं तो रामनवमी का त्योहार शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया जा सकता है।

रामनवमी जैसे बड़े धार्मिक पर्व का उद्देश्य समाज में श्रद्धा, एकता और सद्भाव को बढ़ावा देना है। ऐसे में सभी पक्षों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिससे त्योहार की गरिमा भी बनी रहे और कानून व्यवस्था भी कायम रहे।

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