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पलामू: 13 एकड़ अवैध अफीम पोस्ता खेती का विनष्टीकरण, पुलिस ने चलाया सघन अभियान

पलामू पुलिस ने नष्ट की 13 एकड़ अवैध अफीम खेती | Jharkhand News | Bhaiyajii News

पलामू पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बिहार सीमा पर पकड़ी गई अवैध खेती, ट्रैक्टर से किया गया सफाया

पलामू, 15 जनवरी 2026 – झारखंड के पलामू जिले में अवैध नशीली फसलों के खिलाफ पुलिस प्रशासन की सख्ती जारी है। पुलिस अधीक्षक के सीधे निर्देशों पर बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पलामू पुलिस ने नौडीहा बाजार और छत्तरपुर थाना क्षेत्रों में कुल 13 एकड़ में फैली अवैध अफीम पोस्ता की खेती को पूरी तरह नष्ट कर दिया। यह अभियान दो अलग-अलग स्थानों पर चलाया गया, जिसमें बिहार राज्य की सीमा से लगे जंगली इलाकों में की जा रही इस अवैध खेती को जड़ से उखाड़ फेंका गया।

कहां हुई कार्रवाई? पहली कार्रवाई नौडीहा बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिहार राज्य से सटे दुर्गम जंगली इलाके में की गई, जहां लगभग 10 एकड़ भूमि पर अफीम पोस्ता की अवैध खेती की जा रही थी। दूसरी कार्रवाई छत्तरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम चिपो के जंगली क्षेत्र में हुई, जहां करीब 3 एकड़ में यह अवैध फसल उगाई गई थी। दोनों ही स्थान सुदूर वन क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां आम तौर पर पुलिस की निगरानी कम रहती है और तस्कर इसी का फायदा उठाकर अवैध खेती करते हैं।

क्या था अभियान का तरीका? अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी छत्तरपुर के नेतृत्व में चलाए गए इस विशेष अभियान में पुलिस टीम ने ट्रैक्टर और डंडों की मदद से पूरी फसल को जमीन से उखाड़कर पूर्णतः नष्ट कर दिया। जंगली और दुर्गम इलाकों में होने के कारण इस अभियान में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन पुलिस टीम ने दृढ़ संकल्प के साथ पूरे क्षेत्र को साफ किया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि एक भी पौधा शेष न रहे जो भविष्य में नशीले पदार्थों के उत्पादन में इस्तेमाल हो सके।

किसके नेतृत्व में चला अभियान? इस संयुक्त अभियान में छत्तरपुर अंचल के पुलिस निरीक्षक, नौडीहा बाजार थाना, छत्तरपुर थाना, कुहकुहकला थाना के अधिकारी और कर्मी शामिल रहे। इसके साथ ही छत्तरपुर पूर्वी वन प्रक्षेत्र के वन विभाग के पदाधिकारियों ने भी इस अभियान में सहयोग दिया। पुलिस अधीक्षक महोदया के सीधे निर्देशन में यह कार्रवाई की गई, जो जिले में नशे की खेती और तस्करी के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनाए हुए हैं।

क्यों की जा रही थी यह अवैध खेती? अफीम पोस्ता से हेरोइन और अन्य खतरनाक नशीले पदार्थ तैयार किए जाते हैं, जो युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने के साथ-साथ समाज के लिए एक बड़ा खतरा बनते हैं। तस्कर इन दुर्गम जंगली इलाकों का चयन इसलिए करते हैं क्योंकि यहां पहुंच मुश्किल होती है और पुलिस की नियमित गश्त भी कम होती है। बिहार-झारखंड की सीमा पर स्थित ये इलाके भौगोलिक रूप से संवेदनशील हैं, जहां अवैध गतिविधियों को अंजाम देना आसान हो जाता है।

कब से चल रहा है यह अभियान? पलामू पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों की खेती और तस्करी के विरुद्ध यह अभियान लगातार जारी है। पिछले कुछ महीनों में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में इसी तरह की कई कार्रवाइयां की जा चुकी हैं। पुलिस प्रशासन ने स्थानीय मुखबिरों के नेटवर्क को मजबूत किया है और ड्रोन कैमरों की मदद से भी दुर्गम इलाकों में अवैध खेती की निगरानी की जा रही है। यह अभियान न केवल फसल विनाश तक सीमित है, बल्कि इसमें संलिप्त तस्करों और किसानों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

आगे क्या होगा? पुलिस अधीक्षक पलामू ने स्पष्ट किया है कि अवैध मादक पदार्थों से जुड़ी किसी भी गतिविधि के खिलाफ विभाग की शून्य सहनशीलता की नीति है। भविष्य में भी इस तरह की अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी विधिसम्मत कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस विभाग ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को अपने क्षेत्र में अवैध खेती या नशे की तस्करी की जानकारी हो तो वह तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दें। सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।

पलामू में अफीम पोस्ता खेती: एक बढ़ती चुनौती

पलामू जिला, जो झारखंड के सबसे पिछड़े जिलों में से एक है, पिछले कुछ वर्षों में अवैध अफीम पोस्ता की खेती के लिए एक हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। जिले का अधिकांश हिस्सा घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों से घिरा है, जो इसे तस्करों के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है। बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे होने के कारण यहां अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

स्थानीय किसान, जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, अक्सर तस्करों के बहकावे में आकर अपनी जमीन पर अफीम पोस्ता की खेती करने लगते हैं। तस्कर उन्हें सामान्य फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा देने का लालच देते हैं। लेकिन यह मुनाफा उनके जीवन को बर्बाद करने के साथ-साथ पूरे समाज के लिए खतरनाक साबित होता है।

पुलिस की रणनीति और चुनौतियां

पलामू पुलिस ने अवैध खेती के खिलाफ एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। पहले चरण में खुफिया तंत्र को मजबूत किया गया है, जिसमें स्थानीय मुखबिरों और सूचना देने वालों का एक नेटवर्क तैयार किया गया है। दूसरे चरण में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन कैमरों की मदद से दुर्गम जंगली इलाकों की निगरानी की जाती है और संदिग्ध खेती की पहचान की जाती है।

तीसरे चरण में त्वरित कार्रवाई टीमों का गठन किया गया है, जो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर अवैध फसलों को नष्ट कर देती हैं। चौथे चरण में कानूनी कार्रवाई की जाती है, जिसमें संलिप्त किसानों, जमींदारों और तस्करों के खिलाफ NDPS Act के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं।

लेकिन इस अभियान में कई चुनौतियां भी हैं। पलामू का भौगोलिक क्षेत्र बेहद विस्तृत और दुर्गम है। घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी-नालों से भरे इलाकों में पहुंचना आसान नहीं होता। कई बार मौसम की प्रतिकूलता भी अभियान में बाधा डालती है। इसके अलावा, तस्करों का नेटवर्क बेहद संगठित है और वे लगातार अपनी रणनीति बदलते रहते हैं।

समाज पर प्रभाव और जागरूकता की जरूरत

अफीम पोस्ता की खेती और नशीले पदार्थों की तस्करी केवल एक कानूनी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक संकट है। इससे तैयार होने वाले हेरोइन और अन्य ड्रग्स युवाओं को नशे की लत का शिकार बना रहे हैं। पलामू जैसे पिछड़े जिलों में, जहां शिक्षा और रोजगार के अवसर सीमित हैं, युवा आसानी से नशे के जाल में फंस जाते हैं।

इस समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई काफी नहीं है। समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी। स्कूलों और कॉलेजों में नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत है। स्थानीय किसानों को वैकल्पिक फसलों और आजीविका के साधन उपलब्ध कराने होंगे, ताकि वे तस्करों के बहकावे में न आएं।

निष्कर्ष

पलामू पुलिस की आज की कार्रवाई नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में एक महत्वपूर्ण कदम है। 13 एकड़ अवैध अफीम पोस्ता की खेती का विनाश यह संदेश देता है कि प्रशासन इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और किसी भी कीमत पर इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन यह लड़ाई लंबी है और इसमें सफलता तभी मिलेगी जब पुलिस, प्रशासन, समाज और आम नागरिक सभी मिलकर काम करें। पलामू को नशामुक्त बनाने का सपना तभी साकार हो सकता है जब हम सब मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।

यह समाचार को यथासंभव सटीक रखने का प्रयास किया गया है। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी या चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए पलामू पुलिस विभाग से संपर्क करें।

Manish Singh Chandel

About Author

Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

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