रांची: झारखंड में JPSC–JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच बातचीत का दौर आगे बढ़ा है। सरकार ने छात्रों के प्रतिनिधियों से औपचारिक बातचीत की, लेकिन प्रमुख मांगों पर अभी ठोस सहमति नहीं बन सकी है। सरकार ने छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की बात कही है, जबकि आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक कोई स्पष्ट और ठोस फैसला नहीं आता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
JPSC–JSSC विवाद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार की बातचीत के बाद छात्रों का अगला कदम क्या होगा? आंदोलनकारी संगठन पहले ही 10 अगस्त तक प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय की मांग कर चुके हैं। ऐसा नहीं होने पर विधानसभा घेराव की चेतावनी दी गई है।
सरकार और छात्रों के बीच क्या हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को झारखंड सरकार की चार सदस्यीय मंत्री स्तरीय टीम ने JPSC–JSSC Reforms Manch के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की। सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार, चामरा लिंडा, दीपिका पांडेय सिंह और संजय प्रसाद यादव बैठक में शामिल हुए।
बैठक के बाद सरकार की ओर से इसे सकारात्मक बताया गया। मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के बाद मुख्यमंत्री को पूरी जानकारी दी जाएगी।
हालांकि छात्रों की तरफ से कहा गया कि बातचीत का माहौल सकारात्मक था, लेकिन अभी तक किसी मांग पर ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन सामने नहीं आया है। इसी वजह से आंदोलन खत्म करने के बजाय छात्रों ने आगे की रणनीति पर चर्चा करने का फैसला किया है।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
आंदोलनकारी अभ्यर्थी JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग भी प्रमुख है।
छात्र संगठनों ने जांच के लिए CBI या राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों की समिति जैसे विकल्पों की मांग रखी है। इसके साथ ही JPSC और JSSC की पिछली परीक्षाओं की भी जांच की मांग की जा रही है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द किया जाए।
- कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच हो।
- CBI या स्वतंत्र न्यायिक समिति से जांच कराई जाए।
- JPSC और JSSC की पिछली परीक्षाओं की समीक्षा की जाए।
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
- परीक्षाओं और नियुक्तियों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
- अभ्यर्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
क्यों नहीं खत्म हुआ आंदोलन?
सरकार के साथ बातचीत होने के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं होने की सबसे बड़ी वजह ठोस निर्णय का अभाव बताई जा रही है।
छात्र प्रतिनिधि कुणाल प्रताप सिंह ने बैठक के बाद कहा कि बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं बताया गया है। प्रतिनिधिमंडल आगे की रणनीति पर आपस में चर्चा करेगा।
यही वजह है कि छात्रों का आंदोलन अभी भी जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को आंदोलन का 14वां दिन था और छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर थे।
10 अगस्त को हो सकता है बड़ा फैसला
आंदोलनकारी मंच ने सरकार के सामने 10 अगस्त तक प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय लेने की समयसीमा रखी है। मंच ने कहा है कि यदि तब तक मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो पहले से घोषित कार्यक्रम के तहत लोकतांत्रिक तरीके से विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
इस घोषणा के बाद 10 अगस्त की तारीख आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। अब सरकार की अगली बैठक और निर्णय पर छात्रों की रणनीति काफी हद तक निर्भर करेगी।
सरकार ने राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी दिया संकेत
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि बातचीत छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ ही की जाएगी। मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार छात्रों से बातचीत करेगी और राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत नहीं करेगी।
उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने और छात्रों को राजनीतिक दलों द्वारा इस्तेमाल नहीं होने देने की अपील भी की।
आंदोलन को मिल रहा समर्थन
JPSC–JSSC विवाद अब केवल परीक्षा अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा है। विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की झारखंड इकाई के प्रतिनिधियों ने भी आंदोलन स्थल पहुंचकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया और जांच CBI को सौंपने की मांग की।
इसके अलावा अलग-अलग छात्र संगठनों की ओर से भी प्रदर्शन और मार्च किए जा रहे हैं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के प्रारंभिक परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए। छात्रों ने परिणामों में कथित विसंगतियों का आरोप लगाया और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
आंदोलनकारी छात्रों ने OMR शीट में कथित बदलाव और कुछ अभ्यर्थियों को कटऑफ पूरा नहीं करने के बावजूद सफल घोषित किए जाने जैसे आरोप लगाए हैं। ये फिलहाल आरोप हैं और जांच के अंतिम निष्कर्ष का विषय हैं।
इसी विवाद के बाद रांची में छात्रों ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह और प्रदर्शन शुरू किया।
अब छात्रों का अगला कदम क्या होगा?
अब छात्रों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। यदि सरकार मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेती है, तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। लेकिन यदि 10 अगस्त तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो छात्र अपने घोषित विधानसभा घेराव कार्यक्रम की ओर आगे बढ़ सकते हैं।
आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि बैठक के बाद वे आपस में चर्चा कर अगली रणनीति सार्वजनिक करेंगे।
निष्कर्ष
JPSC–JSSC भर्ती विवाद में सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होना जरूर एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने छात्रों की मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है, जबकि छात्र ठोस निर्णय की मांग पर कायम हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल है—क्या 10 अगस्त से पहले सरकार कोई बड़ा फैसला लेकर छात्रों को संतुष्ट कर पाएगी, या रांची में विधानसभा घेराव से आंदोलन और तेज होगा? आने वाले दिनों में सरकार की अगली पहल और छात्र संगठनों की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।







