Ranchi Police : झारखंड पुलिस ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक बड़े और संगठित अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश करते राँची। झारखंड की राजधानी राँची में पुलिस ने मानवता को झकझोर देने वाले एक बड़े और संगठित अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का खुलासा किया है। इस बड़ी कार्रवाई में 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 12 अपहृत बच्चों को सकुशल मुक्त कराकर उनके परिजनों तक पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह गिरोह बच्चों को अगवा कर उनसे भीख मंगवाने, देह व्यापार, मानव तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों में जबरन शामिल करता था।
यह कार्रवाई राज्य के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर की गई, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, डीजीपी तदाशा मिश्रा और सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका अहम रही। पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व राँची एसएसपी राकेश रंजन ने किया, जिनके निर्देशन में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने महीनों की सतत निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के बाद इस नेटवर्क को ध्वस्त किया।
एक अपहरण केस से पूरे गिरोह तक पहुँची पुलिस
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच की शुरुआत राँची जिले में दर्ज एक बच्चे के अपहरण की शिकायत से हुई थी। शुरुआती जांच में अपहरणकर्ताओं के तार रामगढ़ जिले से जुड़े मिले। इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन, संदिग्ध लेन-देन और जमीनी खुफिया तंत्र की मदद से पूरे नेटवर्क की कड़ियाँ जोड़नी शुरू कीं।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह स्पष्ट होता गया कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि पूरी तरह संगठित अंतरराज्यीय रैकेट है, जो लंबे समय से बच्चों की तस्करी कर रहा था। गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में फैले हुए थे और हर सदस्य की भूमिका पहले से तय थी।
कई जिलों और राज्यों में फैला था नेटवर्क
पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक सक्रिय था। बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाकर बेचने, भीख मंगवाने या अवैध धंधों में झोंकने का काम किया जाता था।
SIT ने एक साथ कई जगहों पर छापेमारी कर:
- राँची (सिल्ली)
- रामगढ़ (कोठार)
- लातेहार (बरियातू)
जैसे इलाकों से बच्चों को बरामद किया। सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखकर उनका मेडिकल परीक्षण, काउंसलिंग और पहचान सत्यापन कराया जा रहा है।
अन्य राज्यों में बेचे गए बच्चों की तलाश जारी
पुलिस की पूछताछ में यह भी पुष्टि हुई है कि कुछ बच्चों को अन्य राज्यों में बेच दिया गया था। इन मामलों में संबंधित राज्यों की पुलिस से संपर्क कर इंटर-स्टेट जॉइंट ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही शेष बच्चों को भी सकुशल बरामद कर लिया जाएगा।
एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि बच्चों की बरामदगी के साथ-साथ गिरोह की फंडिंग, डिजिटल लेन-देन और सहयोगियों की भी जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
कैसे काम करता था बच्चा चोर गिरोह?
जांच में गिरोह की कार्यशैली चौंकाने वाली सामने आई है:
- टारगेट चयन – गरीब, मजदूर वर्ग या अकेले रहने वाले बच्चों को निशाना बनाया जाता था।
- लालच या धमकी – बच्चों को नौकरी, घूमने या बेहतर जीवन का झांसा दिया जाता था, या फिर जबरन अपहरण।
- परिवहन व्यवस्था – बस, ट्रेन और निजी वाहनों के जरिए बच्चों को दूसरे जिलों और राज्यों में भेजा जाता था।
- शोषण – बच्चों से भीख मंगवाना, अवैध मजदूरी, देह व्यापार या तस्करी।
- हैंडलर नेटवर्क – हर राज्य में स्थानीय एजेंट और सुरक्षित ठिकाने।
कड़ी धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी, जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट, और मानव तस्करी से जुड़ी सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया है। साथ ही, आरोपियों की अवैध संपत्ति, बैंक खाते और डिजिटल डिवाइस जब्त कर जांच की जा रही है।
प्रशासन का सख्त संदेश: बच्चों के अपराध पर जीरो टॉलरेंस
राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने साफ कहा है कि बच्चों के खिलाफ अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, भीड़भाड़ वाले इलाकों और सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जाएगा।
आम लोगों से पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि:
- किसी भी बच्चे के साथ संदिग्ध गतिविधि दिखे
- जबरन भीख मंगवाते बच्चों को देखें
- या अपहरण की आशंका हो
तो तुरंत स्थानीय थाना, 112, या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें। आपकी एक सूचना किसी मासूम की जिंदगी बचा सकती है।
निष्कर्ष
राँची पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ कानून की बड़ी जीत है, बल्कि समाज के लिए एक सख्त संदेश भी है कि बच्चों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ जब प्रशासन, पुलिस और आम जनता एकजुट होती है, तभी ऐसे अमानवीय नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सकता है।।


