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गंगा-दामोदर एक्सप्रेस के AC कोच में चल रहा था बड़ा खेल! बाथरूम की छत खोलते ही निकली बीयर की पेटियां | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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धनबाद शराब तस्करी : झारखंड के धनबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां गंगा-दामोदर एक्सप्रेस ट्रेन में शराब तस्करी का बड़ा खेल पकड़ा गया। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने धनबाद स्टेशन पर कार्रवाई करते हुए ट्रेन की AC बोगी के बाथरूम की छत में छिपाकर रखी गई बीयर की तीन पेटियां बरामद की हैं। इस घटना के सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, धनबाद से पटना जा रही गंगा-दामोदर एक्सप्रेस के जरिए बिहार में शराब की खेप भेजी जा रही थी। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के कारण वहां अवैध शराब तस्करी लगातार बढ़ रही है। इसी बीच आरपीएफ को गुप्त सूचना मिली कि ट्रेन के AC कोच में बड़ी मात्रा में बीयर छिपाकर ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल ने स्टेशन पर सघन जांच अभियान चलाया।

बाथरूम की छत खोलते ही मिला शराब का जखीरा

RPF अधिकारियों ने जब संदिग्ध AC कोच की तलाशी शुरू की तो शुरुआत में कुछ भी संदिग्ध नजर नहीं आया। लेकिन बाथरूम की छत यानी रूफ की जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ। जैसे ही छत को खोला गया, उसके अंदर तीन पेटी बीयर छिपाकर रखी मिलीं। इसके बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत शराब को जब्त कर लिया।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि तस्कर अब बेहद चालाकी से शराब छिपाने के नए तरीके अपना रहे हैं। पहले सीटों के नीचे, बैगों में या पार्सल के जरिए शराब भेजी जाती थी, लेकिन अब ट्रेन के अंदर बने तकनीकी हिस्सों और छिपे स्थानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

बिहार शराबबंदी बना तस्करों के लिए बड़ा नेटवर्क

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से शराब की तस्करी लगातार बढ़ी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक गंगा-दामोदर एक्सप्रेस इस अवैध नेटवर्क का एक बड़ा माध्यम बनती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल के कुल्टी और सीतारामपुर, झारखंड के धनबाद और हजारीबाग, तथा उत्तर प्रदेश के बलिया और बनारस जैसे इलाकों से शराब बिहार भेजी जाती है। ट्रेन के जरिए यह तस्करी इसलिए आसान मानी जाती है क्योंकि लंबी दूरी की ट्रेनों में हर कोच की गहन जांच करना मुश्किल होता है।

कई राज्यों में फैला है गिरोह

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा मामला नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला संगठित नेटवर्क हो सकता है। पुलिस को शक है कि इसमें अलग-अलग राज्यों के एजेंट, सप्लायर और रिसीवर शामिल हैं। भेजने वाले और लेने वाले पहले से पूरी योजना बनाकर काम करते हैं।

रेलवे सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक तस्कर ट्रेन का रूट, चेकिंग पॉइंट और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी पहले से जुटा लेते हैं। फिर उसी हिसाब से शराब को छिपाया जाता है ताकि किसी को शक न हो।

CCTV और मोबाइल लोकेशन से जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए RPF और रेलवे पुलिस अब CCTV फुटेज खंगाल रही है। ट्रेन में यात्रा करने वाले संदिग्ध यात्रियों की सूची भी जांची जा रही है। इसके अलावा मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स के जरिए तस्करों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी बड़े सरगना की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जल्द ही कई राज्यों में छापेमारी हो सकती है। रेलवे सुरक्षा एजेंसियां बंगाल, यूपी और झारखंड की संबंधित यूनिटों के साथ मिलकर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं।

पहले भी पकड़े जा चुके हैं तस्कर

यह पहली बार नहीं है जब गंगा-दामोदर एक्सप्रेस शराब तस्करी को लेकर चर्चा में आई हो। इससे पहले भी इसी ट्रेन से शराब के साथ तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फरवरी 2026 में धनबाद-पटना गंगा-दामोदर एक्सप्रेस से तीन शराब तस्करों को गिरफ्तार किया गया था।

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह साफ है कि शराब तस्कर रेलवे नेटवर्क का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। खासकर बिहार जाने वाली ट्रेनों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब और सख्त हो गई है।

यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल

इस घटना ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह ट्रेन के AC कोच के बाथरूम की छत में शराब छिपाई गई, उससे यह साफ है कि तस्कर किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। यात्रियों का कहना है कि रेलवे को ट्रेनों में सुरक्षा जांच और बढ़ानी चाहिए ताकि ऐसे अवैध कामों पर रोक लग सके।

कुछ यात्रियों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो भविष्य में ट्रेनें अवैध कारोबार का बड़ा माध्यम बन सकती हैं।

रेलवे सुरक्षा बल हुआ अलर्ट

घटना के बाद धनबाद RPF ने विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। बिहार जाने वाली ट्रेनों में अब अतिरिक्त जांच की जा रही है। रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी।

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से भी अपील की है कि यदि ट्रेन में कोई संदिग्ध सामान या गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत रेलवे हेल्पलाइन या सुरक्षा बल को सूचना दें।

निष्कर्ष

गंगा-दामोदर एक्सप्रेस से बीयर की पेटियां बरामद होने का मामला यह दिखाता है कि शराब तस्कर अब कितने संगठित और तकनीकी तरीके से काम कर रहे हैं। ट्रेन के बाथरूम की छत में शराब छिपाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि RPF की सतर्कता से इस बार तस्करी का बड़ा प्रयास विफल हो गया, लेकिन इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और खुलासे इस पूरे नेटवर्क की बड़ी तस्वीर सामने ला सकते हैं।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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