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रांची में साइबर ठगों का आतंक : एक क्लिक में खाली हो रहे बैंक खाते, लाखों रुपये गायब | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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Ranchi Cyber Crime News : झारखंड की राजधानी रांची में साइबर अपराध तेजी से बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी और फेक कॉल के जरिए लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। हाल के महीनों में रांची में साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिससे आम लोगों में डर और चिंता का माहौल बन गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर अपराधी अब पहले से ज्यादा शातिर और तकनीकी रूप से मजबूत हो चुके हैं। वे मोबाइल कॉल, व्हाट्सएप, सोशल मीडिया, फर्जी ऐप और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। कई मामलों में लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी गंवा चुके हैं।

रांची में लगातार बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले

रांची में हाल के दिनों में साइबर अपराध के कई बड़े मामले सामने आए हैं। कहीं लिंक क्लिक करते ही बैंक खाते खाली हो गए तो कहीं ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की गई।विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधियों की सक्रियता भी तेजी से बढ़ी है। अब ठग सिर्फ OTP तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे डिजिटल अरेस्ट, AI आधारित फर्जी वीडियो कॉल और नकली सरकारी पहचान का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?

साइबर अपराध की दुनिया में “डिजिटल अरेस्ट” सबसे खतरनाक ट्रेंड बनकर उभरा है। इस स्कैम में ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, बैंक अधिकारी या सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं।वे लोगों को डराते हैं कि उनके खिलाफ केस दर्ज है या उनका बैंक खाता अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद डर के माहौल में लोगों से पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अपराधों में सबसे ज्यादा बुजुर्ग और डिजिटल जानकारी कम रखने वाले लोग निशाना बनते हैं।

निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी

रांची समेत पूरे देश में ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों को “जल्दी अमीर बनने” का लालच देते हैं।कई मामलों में लोगों को नकली ऐप डाउनलोड करवाया जाता है, जहां शुरुआत में फर्जी मुनाफा दिखाया जाता है। बाद में बड़ी रकम निवेश करवाकर ठग फरार हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में साइबर ठगी से होने वाले नुकसान में सबसे बड़ा हिस्सा निवेश स्कैम का है।

झारखंड में बदल रहा साइबर अपराध का चेहरा

एक समय जामताड़ा साइबर अपराध का बड़ा केंद्र माना जाता था, लेकिन अब यह नेटवर्क झारखंड के कई जिलों तक फैल चुका है। रांची, देवघर, गिरिडीह, कोडरमा, धनबाद और हजारीबाग में भी साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है। CID की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में हजारों “म्यूल अकाउंट” सक्रिय पाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है।

लोग कैसे बन रहे शिकार?

फर्जी लिंक और APK फाइल

साइबर ठग अक्सर मैसेज या व्हाट्सएप के जरिए लिंक भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता है, उसका फोन हैक हो सकता है या बैंकिंग जानकारी चोरी हो सकती है।

KYC अपडेट के नाम पर ठगी

फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को कॉल किया जाता है और KYC अपडेट करने के नाम पर OTP और बैंक डिटेल ले ली जाती है।

फर्जी नौकरी और निवेश ऑफर

युवाओं को ऑनलाइन नौकरी और निवेश के नाम पर फंसाया जा रहा है। कई लोग जल्दी कमाई के लालच में अपनी बचत गंवा देते हैं।

लाखों रुपये गंवा रहे लोग

देशभर में साइबर अपराध से लोगों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में भारत में साइबर अपराध के मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान और इंटरनेट उपयोग बढ़ने के साथ साइबर ठगी का खतरा भी लगातार बढ़ेगा यदि लोग सतर्क नहीं हुए।

पुलिस और CID की कार्रवाई

झारखंड पुलिस और CID लगातार साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान चला रही है। राज्य में कई साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है और हजारों संदिग्ध बैंक खातों की जांच की जा रही है।पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या निवेश ऑफर पर भरोसा न करें।

साइबर ठगी से कैसे बचें?

विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है:

  • किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
  • OTP, PIN और बैंक डिटेल किसी से साझा न करें
  • फर्जी निवेश ऑफर से सावधान रहें
  • वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या अधिकारी बताने वालों पर तुरंत भरोसा न करें
  • किसी भी साइबर अपराध की तुरंत शिकायत 1930 हेल्पलाइन पर करें

युवाओं और बुजुर्गों पर ज्यादा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार युवा जल्दी पैसे कमाने के लालच में और बुजुर्ग डर की वजह से साइबर अपराधियों का शिकार बन रहे हैं।इसलिए डिजिटल जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

साइबर अपराध अब सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन चुका है। अपराधी देश के अलग-अलग राज्यों और कई बार विदेशों से भी नेटवर्क चला रहे हैं। ऐसे में पुलिस, बैंक, साइबर एजेंसियों और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।

निष्कर्ष

रांची में बढ़ते साइबर अपराध ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऑनलाइन ठगी के नए-नए तरीके सामने आने से लोग लाखों रुपये गंवा रहे हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि लोग समय रहते सावधान नहीं हुए तो साइबर अपराध आने वाले समय में और बड़ा खतरा बन सकता है।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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