चतरा अष्टधातु मूर्ति : झारखंड के चतरा जिले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिले में अवैध रूप से बेची जाने वाली दुर्लभ और प्राचीन अष्टधातु मूर्तियों के मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने करीब 50 लाख रुपये मूल्य की मूर्तियां बरामद की हैं। इस कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बरामद की गई मूर्तियां काफी पुरानी और ऐतिहासिक महत्व की बताई जा रही हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन मूर्तियों की तस्करी की तैयारी चल रही थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर ये मूर्तियां कहां से लाई गईं और इन्हें किन लोगों तक पहुंचाने की योजना थी।
गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
बताया जा रहा है कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग प्राचीन मूर्तियों की खरीद-बिक्री के लिए इलाके में सक्रिय हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष टीम बनाकर छापेमारी अभियान शुरू किया।
जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर एक व्यक्ति को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से कई अष्टधातु की मूर्तियां बरामद हुईं। पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है और इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
बरामद मूर्तियों की कीमत लाखों में
पुलिस के अनुसार बरामद मूर्तियों की अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है। इनमें कई देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं, जिन्हें अष्टधातु से तैयार किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अष्टधातु की प्राचीन मूर्तियां धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ऐसी मूर्तियों की कीमत काफी ज्यादा होती है।
पुलिस अब पुरातत्व विभाग और विशेषज्ञों की मदद से मूर्तियों की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने की तैयारी कर रही है।
क्या होती है अष्टधातु?
अष्टधातु आठ धातुओं के मिश्रण से तैयार की जाने वाली विशेष धातु होती है। धार्मिक मान्यताओं में इसका विशेष महत्व माना जाता है। प्राचीन काल में मंदिरों और धार्मिक स्थलों में देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने के लिए अष्टधातु का उपयोग किया जाता था।
ऐसी मूर्तियों को दुर्लभ माना जाता है और कई बार इनकी तस्करी कर इन्हें देश-विदेश में ऊंची कीमत पर बेचा जाता है। यही वजह है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों को गंभीरता से लेती हैं।
तस्करी के एंगल से जांच
पुलिस को शक है कि यह मामला केवल चोरी या अवैध खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा तस्करी गिरोह भी हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या आरोपी किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
सूत्रों के अनुसार पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।
पुरानी मूर्तियों की बढ़ रही तस्करी
देशभर में पिछले कुछ वर्षों में प्राचीन मूर्तियों और पुरातात्विक वस्तुओं की तस्करी के मामले लगातार बढ़े हैं। कई बार मंदिरों से मूर्तियां चोरी कर उन्हें विदेशों में बेचने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाली मूर्तियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग रहती है। यही कारण है कि तस्कर ऐसे सामान को निशाना बनाते हैं।झारखंड, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में भी कई पुराने मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां से प्राचीन मूर्तियों की चोरी के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
पुलिस की सतर्कता से टली बड़ी तस्करी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई नहीं करती, तो संभव है कि ये दुर्लभ मूर्तियां राज्य से बाहर भेज दी जातीं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी तस्करी का खुलासा हो गया।अधिकारियों का कहना है कि जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
आरोपी से हो रही पूछताछ
गिरफ्तार आरोपी से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के पास ये मूर्तियां कहां से आईं और क्या उसने पहले भी ऐसी गतिविधियों में हिस्सा लिया था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी मंदिर या धार्मिक स्थल से मूर्तियों की चोरी तो नहीं हुई थी।
पुरातत्व विभाग की भूमिका अहम
मामले में अब पुरातत्व विभाग की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञ मूर्तियों की जांच कर यह पता लगाएंगे कि वे कितनी पुरानी हैं और उनका ऐतिहासिक महत्व क्या है।यदि मूर्तियां पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण पाई जाती हैं, तो मामले की गंभीरता और बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में केंद्र और राज्य स्तर की एजेंसियां भी जांच में शामिल हो सकती हैं।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। अधिकारियों का कहना है कि सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।स्थानीय प्रशासन का मानना है कि लोगों की सतर्कता से ही ऐसी तस्करी और चोरी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।
धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला
अष्टधातु की मूर्तियां केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से भी जुड़ी होती हैं। इसलिए ऐसे मामलों को लेकर लोगों में काफी संवेदनशीलता रहती है।स्थानीय नागरिकों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से खिलवाड़ करने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
निष्कर्ष
चतरा में 50 लाख रुपये की अष्टधातु मूर्तियों की बरामदगी ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि प्राचीन और धार्मिक धरोहरों की तस्करी का खतरा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि पुलिस की सतर्कता से इस मामले का खुलासा हो गया, लेकिन जांच अभी बाकी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं और क्या यह मामला किसी बड़े तस्करी गिरोह से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।







