रांची। झारखंड में स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत आवंटित राशि का अब तक लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा खर्च नहीं हो पाया है। इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तर पर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि जनवरी माह के अंत तक शत-प्रतिशत (100%) राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, राज्य मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई जिलों में NHM की योजनाएं अपेक्षित गति से नहीं चल रही हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं के लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी के कारण राशि खर्च नहीं हो सकी।
बैठक में जताई गई नाराजगी
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जिलों से आई रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान असंतोष व्यक्त किया। बैठक में साफ कहा गया कि वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद यदि 50 प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं हो पाई है, तो यह प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि यदि तय समयसीमा के भीतर राशि का उपयोग नहीं हुआ, तो संबंधित जिलों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
किन योजनाओं में खर्च की रफ्तार धीमी
जानकारी के अनुसार, NHM के अंतर्गत चल रही कई प्रमुख योजनाओं में खर्च की रफ्तार धीमी पाई गई है। इनमें
- संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने वाली योजनाएं
- मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर कम करने से जुड़ी परियोजनाएं
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) के सुदृढ़ीकरण कार्य
- एंबुलेंस सेवा, दवा आपूर्ति और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम
शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यदि समय पर राशि का उपयोग नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।
जनवरी के अंत तक 100% खर्च का लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जन और कार्यक्रम पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जनवरी के अंत तक NHM की पूरी राशि खर्च की जाए। इसके लिए लंबित टेंडर प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने, निर्माण कार्यों में तेजी लाने और स्वीकृत योजनाओं को तत्काल धरातल पर उतारने के आदेश दिए गए हैं।
साथ ही यह भी कहा गया है कि खर्च की दैनिक और साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। जो जिले लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएंगे, उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
आम जनता पर पड़ता है असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि NHM जैसी महत्वपूर्ण योजना में फंड का समय पर उपयोग न होना सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोग पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। यदि बजट का सही उपयोग समय पर हो, तो स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बेहतर हो सकती हैं और मरीजों को राहत मिल सकती है।
प्रशासनिक स्तर पर सख्ती
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने, इसके लिए पहले से कार्ययोजना तैयार की जाए। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही योजनाओं की रूपरेखा तय कर काम शुरू करने पर जोर दिया गया है। साथ ही जिलों को तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग देने की भी बात कही गई, ताकि प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण काम न रुके।
निष्कर्ष
NHM के तहत आवंटित राशि का आधा हिस्सा अब तक खर्च न होना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। हालांकि, जनवरी के अंत तक 100 फीसदी राशि खर्च करने के निर्देश से यह उम्मीद की जा रही है कि योजनाओं में तेजी आएगी और इसका लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तय समयसीमा में जिले इन निर्देशों का कितना पालन कर पाते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं में कितना सुधार नजर आता है।




