कांटाटोली नाला हादसा। राजधानी रांची में मंगलवार को एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत मौलाना आज़ाद कॉलोनी में घर के बाहर खेल रहे दो मासूम बच्चे अचानक अनियंत्रित होकर गहरे नाले में गिर गए। बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव बेहद तेज था, जिससे दोनों बच्चे कुछ ही क्षणों में बहने लगे।
जैसे ही बच्चों की मां की नजर डूबते हुए बच्चों पर पड़ी, उन्होंने बिना एक पल गंवाए उफनते नाले में छलांग लगा दी। मां की बहादुरी और ममता ने एक बच्चे की जान बचा ली, लेकिन दूसरा बच्चा तेज बहाव में बह गया और लापता हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
खेलते-खेलते हुआ दर्दनाक हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलवार दोपहर अचानक हुई तेज बारिश ने हालात बिगाड़ दिए। कांटाटोली नाला पहले से ही उफान पर था और पानी सड़क के काफी करीब बह रहा था। मौलाना आज़ाद कॉलोनी में दो छोटे बच्चे रोज की तरह घर के बाहर खेल रहे थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ा और दोनों बच्चे फिसलकर सीधे गहरे नाले में गिर गए।
नाले में गिरते ही तेज धार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। आसपास मौजूद लोग शोर मचाते हुए मदद के लिए दौड़े, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि कोई तुरंत नाले में उतरने की हिम्मत नहीं कर सका।
मां की ममता बनी ढाल
बच्चों की चीख-पुकार सुनते ही उनकी मां मौके पर पहुंचीं। अपने बच्चों को डूबता देख उन्होंने एक पल भी नहीं सोचा और सीधे उफनते नाले में छलांग लगा दी। तेज बहाव, कीचड़ और गंदे पानी के बीच उन्होंने किसी तरह एक बच्चे को पकड़ लिया और बाहर निकाल लाई।
मां की इस हिम्मत और सूझबूझ से एक मासूम की जान बच गई। हालांकि, दूसरा बच्चा मां की पकड़ से दूर बह गया और देखते ही देखते नाले के तेज प्रवाह में आंखों से ओझल हो गया। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग भावुक हो उठे और कई महिलाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े।
पूरी घटना एक नजर में
इस हादसे में घर के बाहर खेल रहे दो मासूम बच्चे और उनकी मां सीधे तौर पर प्रभावित हुए। मंगलवार को बारिश के दौरान सदर थाना क्षेत्र की मौलाना आज़ाद कॉलोनी में यह दर्दनाक घटना घटी। तेज बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया था और सुरक्षा इंतजामों की कमी साफ नजर आ रही थी। खेलते समय पैर फिसलने से दोनों बच्चे गहरे नाले में गिर गए। मां ने जान जोखिम में डालकर एक बच्चे को बचा लिया, जबकि दूसरा बच्चा बह गया और अब तक लापता है।
प्रशासन और पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही झारखंड पुलिस, नगर निगम और आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची। नाले के डाउनस्ट्रीम इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। गोताखोरों को नाले में उतारा गया और पुल-पुलिया, मोड़ों तथा जलजमाव वाले स्थानों पर बच्चे की तलाश की जा रही है।
देर शाम तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा, लेकिन लापता बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल सका। अधिकारियों ने बताया कि जब तक बच्चे का पता नहीं चल जाता, तलाश अभियान जारी रहेगा।
इलाके में आक्रोश और डर का माहौल
घटना के बाद मौलाना आज़ाद कॉलोनी और कांटाटोली इलाके में लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह नाला हर साल मानसून में जानलेवा बन जाता है। नाले के किनारे न तो पर्याप्त सुरक्षा रेलिंग है और न ही चेतावनी बोर्ड लगे हुए हैं।
लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बारिश के समय नाले का पानी सड़क तक आ जाता है, जिससे फिसलने और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कांटाटोली नाला पहले भी कई हादसों का गवाह बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में बारिश के दौरान लोग नाले में गिर चुके हैं, जिनमें से कुछ मामलों में जान तक चली गई है। इसके बावजूद नाले की नियमित सफाई, घेराबंदी और सुरक्षा उपायों को लेकर कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई।
प्रशासन का आश्वासन
प्रशासनिक अधिकारियों ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता लापता बच्चे को ढूंढने की है। इसके बाद नाले के किनारे सुरक्षा रेलिंग लगाने, टूटे ढक्कनों की मरम्मत करने और चेतावनी संकेत बोर्ड लगाने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
साथ ही, अभिभावकों से अपील की गई है कि बारिश के दौरान बच्चों को जलभराव और नालों के पास खेलने से रोकें।
मां की बहादुरी को सलाम
इस दर्दनाक हादसे के बीच मां की बहादुरी और ममता हर किसी के लिए मिसाल बन गई है। अपनी जान की परवाह किए बिना नाले में कूदकर उन्होंने एक बच्चे को नई जिंदगी दी। पूरा इलाका मां के साहस को सलाम कर रहा है और दूसरे बच्चे की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहा है।
निष्कर्ष
मौलाना आज़ाद कॉलोनी की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी लापरवाही और अव्यवस्था का नतीजा है। अगर समय रहते नालों की सुरक्षा और रखरखाव पर ध्यान दिया जाता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टल सकता था। अब जरूरत है कि प्रशासन इस घटना से सबक ले और ठोस कदम उठाए, ताकि भविष्य में किसी और मां को इस तरह अपनी जान दांव पर न लगानी पड़े।
खबर लिखे जाने तक लापता बच्चे की तलाश जारी थी।




