जमशेदपुर कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण से शहर में दहशत, 10 करोड़ की फिरौती की मांग, पुलिस को अब तक ठोस सफलता नहीं | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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जमशेदपुर। शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले ने पूरे जमशेदपुर को झकझोर कर रख दिया है। 13 जनवरी को हुए इस अपहरण कांड में अब तक पुलिस को कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। अपहरणकर्ताओं ने कैरव गांधी की सुरक्षित रिहाई के बदले परिवार से 10 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की है, जिससे परिवार के साथ-साथ पूरे शहर में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।

यह घटना उस समय हुई जब कैरव गांधी अपने निजी कार्य से बाहर निकले थे। उसी दौरान पहले से रेकी कर रहे अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से उनका अपहरण कर लिया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अपहरणकर्ताओं ने वारदात को इस तरह अंजाम दिया कि मौके पर कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं छूटे, जिससे पुलिस की जांच और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

अपहरण के बाद फिरौती कॉल से बढ़ी चिंता

अपहरण के कुछ समय बाद ही कैरव गांधी के परिजनों को फोन कॉल के जरिए फिरौती की मांग की गई। कॉल करने वालों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि 10 करोड़ रुपये नहीं दिए गए, तो कैरव की जान को खतरा हो सकता है। इस कॉल के बाद परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस का कहना है कि अपहरणकर्ता लगातार कॉल कर परिवार पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

फोन कॉल और मैसेज के जरिए किए जा रहे संपर्क से यह स्पष्ट हो रहा है कि अपराधी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस लोकेशन सामने नहीं आ सकी है।

पुलिस जांच: कौन, कब, कहां और कैसे?

इस मामले में पुलिस यह स्पष्ट कर चुकी है कि अपहरण एक संगठित गिरोह द्वारा किया गया है, जिसने पहले से कैरव गांधी की गतिविधियों पर नजर रखी थी। 13 जनवरी को जमशेदपुर में हुई यह घटना उस स्थान के आसपास हुई, जहां से कैरव गांधी अक्सर गुजरते थे।

पुलिस यह भी मान रही है कि अपहरणकर्ताओं को परिवार की आर्थिक स्थिति की पूरी जानकारी थी, इसी कारण इतनी बड़ी रकम की फिरौती मांगी गई। खेल-खेल में या अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि यह पूरी तरह से योजनाबद्ध अपराध प्रतीत हो रहा है।

एसआईटी का गठन, कई एंगल से जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।

सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ के जरिए पुलिस इस बात की कड़ी जोड़ने में जुटी है कि कैरव गांधी को कहां और कैसे ले जाया गया।

शहर में दहशत, कारोबारी वर्ग में चिंता

इस अपहरण कांड के बाद जमशेदपुर के कारोबारी वर्ग में भय का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि यदि एक प्रतिष्ठित कारोबारी के बेटे का इस तरह अपहरण हो सकता है, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं, यह बड़ा सवाल बन गया है। कई व्यापारियों ने अपनी निजी सुरक्षा बढ़ा दी है और पुलिस से गश्त तेज करने की मांग की है।

पुलिस और प्रशासन पर बढ़ता दबाव

जैसे-जैसे समय बीत रहा है और कैरव गांधी का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है, वैसे-वैसे पुलिस और प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। सामाजिक संगठनों और व्यापारिक संघों ने भी इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।

परिवार की अपील और उम्मीद

कैरव गांधी के परिजनों ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बेटे की सुरक्षित वापसी है। परिवार ने पुलिस पर भरोसा जताया है और उम्मीद की है कि जल्द ही कैरव गांधी को सकुशल बरामद कर लिया जाएगा।

निष्कर्ष

जमशेदपुर में देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी का अपहरण यह दिखाता है कि अपराधी किस हद तक संगठित और बेखौफ हो चुके हैं। 13 जनवरी से लापता कैरव गांधी की सुरक्षित रिहाई के बदले 10 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

अब पूरे शहर की निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं और हर कोई यही दुआ कर रहा है कि कैरव गांधी जल्द से जल्द सुरक्षित अपने घर लौटें।

खबर लिखे जाने तक पुलिस जांच जारी थी

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