देवघर साइबर ठगी : झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने ऐसे दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो खुद को एयरटेल पेमेंट्स बैंक का अधिकारी बताकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करते थे। आरोपी फोन कॉल के जरिए लोगों को झांसे में लेकर उनकी बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करते थे और फिर उनके खातों से पैसे निकाल लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरण भी बरामद किए हैं, जिनकी जांच जारी है।
यह कार्रवाई देवघर पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं और इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
एयरटेल पेमेंट्स बैंक अधिकारी बनकर करते थे ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को एयरटेल पेमेंट्स बैंक का कर्मचारी या अधिकारी बताते थे। वे लोगों को फोन कर कहते थे कि उनका बैंक खाता बंद होने वाला है, केवाईसी अपडेट करनी है या खाते में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या है। कई मामलों में वे कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स और विशेष ऑफर का लालच देकर भी लोगों का विश्वास जीत लेते थे।
इसके बाद आरोपी पीड़ितों से ओटीपी, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी, यूपीआई पिन या अन्य बैंकिंग जानकारी मांगते थे। जैसे ही पीड़ित जानकारी साझा करता, उसके खाते से ऑनलाइन लेनदेन कर रकम निकाल ली जाती थी। पुलिस का कहना है कि इस तरह की सोशल इंजीनियरिंग आधारित साइबर ठगी आज सबसे अधिक देखने को मिल रही है।
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
देवघर पुलिस को आरोपियों की गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने तकनीकी जांच और निगरानी के आधार पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। बरामद डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी किन-किन राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं।
साइबर नेटवर्क का पता लगाने में जुटी पुलिस
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को उनके नेटवर्क से जुड़े कई सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं तथा अब तक कितने लोगों से ठगी की जा चुकी है।
संभावना जताई जा रही है कि यह गिरोह केवल झारखंड ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले लोगों को भी निशाना बनाता था। पुलिस डिजिटल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।
देवघर बना साइबर अपराधियों का निशाना
देवघर सहित झारखंड के कई जिले लंबे समय से साइबर अपराध के मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। हालांकि राज्य पुलिस लगातार अभियान चलाकर साइबर अपराधियों पर कार्रवाई कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई है और कई संगठित गिरोहों का भंडाफोड़ किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तरीके बदल दिए हैं। अब वे बैंक अधिकारी, बीमा कंपनी, ई-कॉमर्स कंपनी, मोबाइल सेवा प्रदाता या सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को धोखा देने का प्रयास करते हैं।
पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
देवघर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें। बैंक, आरबीआई या कोई भी अधिकृत संस्था कभी भी फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन या सीवीवी नंबर नहीं मांगती।
यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर फोन करता है और गोपनीय जानकारी मांगता है तो तुरंत कॉल काट दें तथा संबंधित बैंक के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अनजान मोबाइल एप डाउनलोड करने से बचें।
साइबर ठगी होने पर क्या करें?
यदि आपके साथ ऑनलाइन ठगी हो जाती है तो बिना समय गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। समय पर शिकायत करने से कई मामलों में बैंक खाते से निकली राशि को रोकने की संभावना बढ़ जाती है।
साथ ही संबंधित बैंक को तुरंत सूचना दें ताकि संदिग्ध लेनदेन को रोका जा सके। मोबाइल फोन, एसएमएस, बैंक मैसेज और कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें क्योंकि ये जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होते हैं।
साइबर सुरक्षा के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
- किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, यूपीआई पिन या एटीएम पिन कभी साझा न करें।
- केवल बैंक की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
- संदिग्ध लिंक और फर्जी वेबसाइट से बचें।
- मोबाइल और बैंकिंग ऐप में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें।
- समय-समय पर बैंक खाते का पासवर्ड बदलते रहें।
- अनजान नंबरों से आने वाले कॉल और संदेशों पर तुरंत भरोसा न करें।
निष्कर्ष
देवघर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। एयरटेल पेमेंट्स बैंक अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने वाले दो आरोपियों की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो गया है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि साइबर अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।







