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झारखंड विधानसभा बजट सत्र: विधायकों ने सड़क निर्माण और JPSC आयु सीमा बढ़ाने की मांग उठाई | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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रांचीझारखंड विधानसभा बजट सत्र: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में राज्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान विभिन्न विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को मजबूती से उठाया। इस दौरान सबसे ज्यादा जोर सड़क निर्माण, जर्जर सड़कों की मरम्मत, और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में आयु सीमा बढ़ाने की मांग पर देखने को मिला। विधायकों ने सरकार से इन मुद्दों पर शीघ्र और ठोस निर्णय लेने की अपील की।

सड़क निर्माण का मुद्दा छाया रहा

बजट सत्र में सड़क निर्माण का विषय प्रमुखता से उठा। कई विधायकों ने कहा कि राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सड़कें बदहाल स्थिति में हैं, जिससे आम जनता को रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। खराब सड़कों के कारण न सिर्फ यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है।

खरसावां से विधायक ने अपने क्षेत्र की सड़कों की खराब हालत का जिक्र करते हुए कहा कि वर्षों से सड़क मरम्मत का काम लंबित है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से जल्द सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की।

वहीं मांडू विधानसभा क्षेत्र के विधायक ने कुजू से गिद्दी तक की सड़क का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह सड़क औद्योगिक और खनन क्षेत्र से जुड़ी होने के बावजूद काफी जर्जर हो चुकी है। भारी वाहनों के कारण सड़क की हालत और खराब हो गई है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

अधूरे पुल और बढ़ती दुर्घटनाएं

सत्र के दौरान कुछ विधायकों ने अधूरे पुल और फोरलेन सड़क परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया। चांडिल क्षेत्र में फोरलेन सड़क के पुल निर्माण कार्य को लेकर चिंता जताई गई। विधायक ने कहा कि पुल का काम लंबे समय से अधूरा है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और कई जानें जा चुकी हैं।

विधायक ने सरकार से मांग की कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए और जल्द से जल्द पुल निर्माण का कार्य पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में देरी सीधे तौर पर आम जनता की जान से खिलवाड़ है।

JPSC आयु सीमा बढ़ाने की मांग

बजट सत्र के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा मुद्दा JPSC परीक्षा की आयु सीमा का रहा। कई विधायकों ने कहा कि लंबे समय से JPSC की परीक्षाएं नियमित नहीं हो पाने के कारण हजारों युवा आयु सीमा पार कर चुके हैं या करने वाले हैं। ऐसे में आयु सीमा में छूट देना बेहद जरूरी है।

विधायकों ने तर्क दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी सरकार की जिम्मेदारी है, इसका खामियाजा युवाओं को नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने मांग की कि JPSC परीक्षा के लिए आयु सीमा की कट-ऑफ तिथि को आगे बढ़ाया जाए ताकि अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को मौका मिल सके।

कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि आयु सीमा में छूट न मिलने पर राज्य के पढ़े-लिखे युवाओं में निराशा बढ़ेगी और बेरोजगारी की समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द निर्णय लेने की अपील की।

छात्रों के भविष्य से जुड़ा सवाल

JPSC आयु सीमा का मुद्दा सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य भर के युवाओं और छात्रों से जुड़ा हुआ है। हाल के दिनों में इस मांग को लेकर छात्र संगठनों ने प्रदर्शन भी किए हैं। विधायकों ने सदन में कहा कि सरकार को छात्रों की आवाज सुननी चाहिए और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए नीतिगत फैसला लेना चाहिए।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में JPSC की परीक्षाएं नियमित रूप से आयोजित की जाएं, ताकि इस तरह की समस्या दोबारा न उत्पन्न हो।

शिक्षा, बिजली और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे भी उठे

बजट सत्र के दौरान शिक्षा, बिजली और स्वास्थ्य से जुड़े कई अन्य मुद्दे भी सामने आए। कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्रों में कॉलेजों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई शुरू कराने की मांग की, ताकि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों या राज्यों में न जाना पड़े।

वहीं बिजली की समस्या को लेकर भी सवाल उठाए गए। ग्रामीण इलाकों में ट्रांसफॉर्मर खराब रहने और लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की शिकायतें सदन में रखी गईं। विधायकों ने कहा कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई गई। उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए जल्द नियुक्ति की मांग की गई।

सरकार का पक्ष

इन सभी मांगों पर संबंधित मंत्रियों ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बजट में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं और योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

JPSC आयु सीमा के सवाल पर सरकार की ओर से कहा गया कि इस विषय पर विचार किया जा रहा है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।

निष्कर्ष

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में उठे मुद्दे साफ तौर पर दर्शाते हैं कि विधायक अपने क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं को लेकर गंभीर हैं। सड़क निर्माण, अधूरी परियोजनाएं और JPSC आयु सीमा जैसे मुद्दे सीधे तौर पर आम जनता और युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इन मांगों पर कितनी तेजी से ठोस कदम उठाती है और जनता की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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