Jharkhand Rajya Sabha Election 2026 : झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब एक नया राजनीतिक ट्विस्ट सामने आया है। चर्चा है कि यदि कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट मिलती है तो उम्मीदवार कांग्रेस का होगा, लेकिन उसके नाम पर अंतिम सहमति और चयन मुख्यमंत्री Hemant Soren की पसंद के आधार पर हो सकता है।
इस खबर के सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल उम्मीदवार चयन का मामला नहीं बल्कि गठबंधन की आंतरिक रणनीति और शक्ति संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।
राज्यसभा की दो सीटों पर क्यों है इतनी चर्चा?
झारखंड में इस बार राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। एक सीट पूर्व भाजपा सांसद Deepak Prakash का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है, जबकि दूसरी सीट JMM संस्थापक Shibu Soren के निधन के बाद रिक्त हुई थी।
विधानसभा में महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल होने के कारण दोनों सीटों पर उसकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। लेकिन असली चुनौती सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर सामने आ रही है।
कांग्रेस क्यों मांग रही है एक सीट?
कांग्रेस का कहना है कि पिछले कई राज्यसभा चुनावों में राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सीटें JMM को मिलती रही हैं, लेकिन इस बार गठबंधन के पास दो सीटें जीतने लायक संख्या बल मौजूद है।
इसी आधार पर कांग्रेस ने एक सीट पर अपना दावा पेश किया है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि गठबंधन में दूसरी सबसे बड़ी ताकत होने के नाते राज्यसभा में उसका प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व ने इस विषय पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कई दौर की बातचीत भी की है।
हेमंत सोरेन की भूमिका क्यों हुई महत्वपूर्ण?
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कांग्रेस उम्मीदवार के चयन में भी हेमंत सोरेन की राय महत्वपूर्ण हो सकती है।
बताया जा रहा है कि गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार ऐसा चुना जा सकता है जिस पर JMM और कांग्रेस दोनों सहमत हों।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो यह गठबंधन राजनीति का एक दिलचस्प उदाहरण होगा जहां सीट कांग्रेस की होगी लेकिन चेहरे के चयन में JMM की बड़ी भूमिका रहेगी।
कांग्रेस के भीतर बढ़ी दावेदारों की हलचल
राज्यसभा चुनाव की चर्चा तेज होते ही कांग्रेस के भीतर संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता भी बढ़ गई है।
राजनीतिक चर्चाओं में जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं उनमें:
- राजेश ठाकुर
- प्रदीप बलमुचू
- शहजादा अनवर
- धीरज साहू
- सुबोधकांत सहाय
जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं। हालांकि पार्टी ने अभी तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
खास बात यह है कि कुछ नेताओं ने खुद को चुनावी दौड़ से अलग भी बताया है, जिसके बाद नए चेहरों की तलाश और तेज हो गई है।
स्थानीय चेहरे पर हो सकता है फोकस
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस बार किसी बाहरी चेहरे के बजाय झारखंड के स्थानीय नेता को उम्मीदवार बनाने के पक्ष में दिखाई दे रही है।
कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने भी संकेत दिए हैं कि उम्मीदवार ऐसा हो सकता है जिसकी जमीनी पकड़ मजबूत हो और जो राज्य की राजनीति को बेहतर तरीके से समझता हो।
यदि ऐसा होता है तो यह कांग्रेस की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।
JMM में भी कई नाम चर्चा में
जहां कांग्रेस अपने उम्मीदवार को लेकर विचार कर रही है, वहीं JMM में भी संभावित नामों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
विशेष रूप से शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई सीट को लेकर पार्टी के भीतर यह भावना दिखाई दे रही है कि इस सीट पर सोरेन परिवार के किसी सदस्य को मौका मिलना चाहिए।
इसी वजह से:
- अंजनी सोरेन
- कल्पना सोरेन
- सोरेन परिवार से जुड़े अन्य नाम
राजनीतिक चर्चाओं में लगातार सामने आ रहे हैं।
हेमंत सोरेन ने मांगा समय
हालिया बैठकों के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीट शेयरिंग और उम्मीदवार चयन पर चर्चा की।
खबरों के अनुसार मुख्यमंत्री ने अंतिम निर्णय लेने के लिए कुछ समय मांगा है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि अभी गठबंधन के भीतर बातचीत जारी है और अंतिम फैसला होना बाकी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।
क्या गठबंधन में बढ़ रही है खींचतान?
हालांकि कांग्रेस और JMM दोनों सार्वजनिक रूप से गठबंधन की मजबूती की बात कर रहे हैं, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
कांग्रेस एक सीट पर अपने अधिकार की बात कर रही है, जबकि JMM के कुछ नेता दोनों सीटों पर पार्टी उम्मीदवार उतारने की वकालत कर रहे हैं।
इसी वजह से राज्यसभा चुनाव केवल संसदीय सीटों का मामला नहीं रह गया बल्कि यह गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन की परीक्षा भी बन गया है।
संख्या बल महागठबंधन के पक्ष में
विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखें तो महागठबंधन की स्थिति मजबूत दिखाई देती है।
JMM, कांग्रेस, RJD और वामदलों को मिलाकर गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने लायक समर्थन मौजूद है।
लेकिन राजनीति केवल संख्या का खेल नहीं होती। उम्मीदवार चयन, प्राथमिकता मत और गठबंधन की एकजुटता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बीजेपी की रणनीति पर भी नजर
इस बीच भाजपा भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
हाल के दिनों में JMM ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका जताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
इन घटनाओं ने चुनावी माहौल को और अधिक राजनीतिक बना दिया है।
दिल्ली से रांची तक चल रही बैठकों का दौर
राज्यसभा चुनाव को लेकर केवल रांची ही नहीं बल्कि दिल्ली स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ गई हैं।
कांग्रेस नेतृत्व लगातार झारखंड के नेताओं से संपर्क में है। वहीं JMM भी अपने संगठन और वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार मंथन कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम सहमति बनने के बाद उम्मीदवारों की घोषणा तेजी से हो सकती है।
झारखंड की राजनीति पर पड़ेगा असर
राज्यसभा चुनाव का असर केवल संसद की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि सीट शेयरिंग और उम्मीदवार चयन को लेकर सहमति आसानी से बन जाती है तो यह महागठबंधन की मजबूती का संकेत माना जाएगा। लेकिन यदि मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस और JMM के बीच सीट शेयरिंग को लेकर जारी चर्चा अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। कांग्रेस एक सीट चाहती है, लेकिन उम्मीदवार चयन में हेमंत सोरेन की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई नाम रेस में हैं और गठबंधन के भीतर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का फैसला न केवल उम्मीदवारों की तस्वीर साफ करेगा बल्कि झारखंड की राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।







