पेपर लीक : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने देश में बढ़ते पेपर लीक मामलों, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को कांग्रेस भवन, रांची में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता कमजोर हुई है, जिसका खामियाजा लाखों छात्रों और युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।
संवाददाता सम्मेलन को प्रदेश मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी, प्रदेश मीडिया संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ. एम. तौसीफ और प्रवक्ता सोनाल शांति ने संबोधित किया। नेताओं ने कहा कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों ने युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है।
10 वर्षों में सामने आए 89 पेपर लीक मामले
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देशभर में करीब 89 पेपर लीक के मामले सामने आए। इन घटनाओं के कारण 48 परीक्षाओं को दोबारा आयोजित करना पड़ा। इससे लाखों छात्रों को आर्थिक, मानसिक और शैक्षणिक नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान 15 राज्यों में 41 पेपर लीक की घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं से लगभग 1.4 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए, जो सीमित सरकारी पदों के लिए तैयारी कर रहे थे। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने में विफल रही है।
कानून बनने के बावजूद नहीं थम रही घटनाएं
प्रेस वार्ता में कहा गया कि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू होने के बाद भी पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। इस कानून में दोषियों के लिए 3 से 10 वर्ष तक की सजा और 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। यदि उसके क्रियान्वयन में गंभीरता नहीं होगी तो परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है।
नीट, यूपी पुलिस और यूजीसी नेट जैसी परीक्षाएं बनीं उदाहरण
कांग्रेस ने हाल के वर्षों में हुई प्रमुख परीक्षा अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। नेताओं ने कहा कि नीट यूजी परीक्षा से जुड़े विवादों ने पूरे देश में चिंता पैदा की। लाखों छात्र प्रभावित हुए और मामला जांच एजेंसियों तथा न्यायालय तक पहुंचा।
इसी तरह यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे करीब 48 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। सीटेट और यूजीसी नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए, जिससे लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी।
कांग्रेस का कहना है कि बार-बार परीक्षाएं रद्द होने और दोबारा आयोजित होने से युवाओं का समय, पैसा और मेहनत बर्बाद होती है।
रिक्त पदों को भरने में सुस्ती का आरोप
प्रेस वार्ता में बेरोजगारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि मार्च 2023 तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9 लाख से अधिक पद खाली थे। वहीं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भी हजारों रिक्तियां मौजूद थीं। कांग्रेस का आरोप है कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकार रिक्त पदों को भरने में भी अपेक्षित गति नहीं दिखा रही है।
रेलवे भर्ती के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने रेलवे भर्ती के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि नौकरी चाहने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन भर्ती की रफ्तार उस अनुपात में नहीं बढ़ी है। उन्होंने कहा कि करोड़ों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं।
उनका कहना है कि बेरोजगारी केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है।
शिक्षित युवाओं में बढ़ रही बेरोजगारी
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि उच्च शिक्षित युवाओं के बीच बेरोजगारी की समस्या अधिक गंभीर रूप ले चुकी है। स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के बावजूद बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश की युवा आबादी को कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा तो देश की विकास क्षमता प्रभावित होगी।
छात्रों की आत्महत्या पर जताई चिंता
कांग्रेस ने छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, रोजगार की अनिश्चितता और लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
उन्होंने कहा कि देश के कई प्रमुख कोचिंग हब में छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। यह स्थिति बताती है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़ी चुनौतियां केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि सामाजिक संकट का रूप ले चुकी हैं।
शिक्षा बजट बढ़ाने और सुधारों की मांग
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार से शिक्षा बजट में बढ़ोतरी, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर प्रभावी रोक और रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश के युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए सरकार को ठोस नीतिगत फैसले लेने होंगे ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।







