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रांची में पानी की ऐसी बर्बादी बारिश होती है जमकर, फिर भी हर गर्मी में क्यों सूख जाते हैं नल? | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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Ranchi Water Crisis : झारखंड की राजधानी Ranchi इन दिनों गंभीर जल संकट का सामना कर रही है। हर साल मानसून के दौरान भारी बारिश होने के बावजूद शहर में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और बड़े सार्वजनिक भवनों में अब भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसका परिणाम यह है कि करोड़ों लीटर वर्षा जल सीधे नालों और सीवरेज सिस्टम के जरिए बहकर बर्बाद हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी भवनों में प्रभावी वर्षा जल संचयन व्यवस्था लागू कर दी जाए तो रांची के भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है। लेकिन वर्षों से नियम होने के बावजूद इसका पालन गंभीरता से नहीं किया जा रहा है।

बारिश खूब, लेकिन पानी की कमी क्यों?

रांची और पूरे झारखंड में औसतन अच्छी बारिश होती है। इसके बावजूद गर्मी शुरू होते ही शहर के कई इलाकों में पानी का संकट गहरा जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है बारिश के पानी को संरक्षित न कर पाना।

जल विशेषज्ञों के अनुसार झारखंड का भूगोल ऐसा है कि यहां का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और चट्टानी है। ऐसे में वर्षा का अधिकांश पानी तेजी से बहकर निकल जाता है। यदि उसे रोकने और जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था न हो तो भूजल पुनर्भरण नहीं हो पाता। यही स्थिति आज रांची में दिखाई दे रही है।

सरकारी भवनों में नहीं है पर्याप्त व्यवस्था

हालिया रिपोर्टों में सामने आया है कि कई सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम या तो मौजूद नहीं है या फिर निष्क्रिय स्थिति में है। परिणामस्वरूप हर साल लाखों-करोड़ों लीटर बारिश का पानी व्यर्थ बह जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी भवन उदाहरण पेश करें तो निजी भवन मालिक भी वर्षा जल संचयन को गंभीरता से अपनाएंगे। लेकिन जब बड़े सरकारी परिसरों में ही नियमों का पालन नहीं होगा तो आम लोगों में जागरूकता कैसे बढ़ेगी।

जल संकट से जूझ रहा है रांची

इस वर्ष गर्मी बढ़ते ही रांची के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत देखी गई। नगर निगम को कई वार्डों में पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों की मदद लेनी पड़ी। कई क्षेत्रों में लोग नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण परेशान रहे।

रांची नगर निगम ने पहले ही स्वीकार किया है कि शहर के कई वार्ड हर साल गर्मियों में जल संकट का सामना करते हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

भूजल स्तर लगातार गिर रहा

जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि रांची में तेजी से बढ़ती आबादी, लगातार हो रही बोरिंग और वर्षा जल संरक्षण की कमी के कारण भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।

कई इलाकों में पुराने हैंडपंप और बोरवेल सूखने लगे हैं। लोगों को अधिक गहराई तक बोरिंग करनी पड़ रही है, जिससे भूजल पर दबाव और बढ़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।

2017 में बना था नियम, लेकिन पालन कमजोर

झारखंड में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए 2017 में रेन वाटर हार्वेस्टिंग रेगुलेशन लागू किया गया था। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना और भूजल स्तर को बेहतर बनाना था।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कानून बनने के बावजूद उसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया। कई भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम आज भी नहीं लगाया गया है, जबकि कुछ जगहों पर लगाए गए सिस्टम रखरखाव के अभाव में बंद पड़े हैं।

जल संकट का असर आम लोगों पर

पानी की कमी का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।

शहर के कुछ इलाकों में लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें नियमित रूप से पानी नहीं मिल रहा। कई जगहों पर टैंकर ही एकमात्र सहारा बन गए हैं।

अस्पतालों तक पहुंचा संकट

जल संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। हाल ही में रांची के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में भी पानी की समस्या सामने आई। मरीजों और उनके परिजनों को पीने के पानी तक के लिए परेशानी झेलनी पड़ी। इससे साफ है कि जल संकट अब बुनियादी सेवाओं को भी प्रभावित करने लगा है।

क्या है रेन वाटर हार्वेस्टिंग?

रेन वाटर हार्वेस्टिंग यानी वर्षा जल संचयन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बारिश के पानी को संग्रहित कर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है या भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी भवन की छत से गिरने वाले पानी को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाए तो बड़ी मात्रा में भूजल पुनर्भरण किया जा सकता है। इससे गर्मियों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है और बोरवेल पर दबाव कम होता है।

सरकार और नगर निगम की पहल

रांची नगर निगम ने हाल के महीनों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए अभियान तेज किया है। निगम ने पात्र भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर जोर दिया है और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए हैं।

इसके अलावा राज्य स्तर पर भी जल सुरक्षा को लेकर नई योजनाओं पर चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की जरूरत बताई है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

जल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में रांची को और गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और भूजल दोहन की वजह से स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।

उनका सुझाव है कि सभी सरकारी भवनों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और बड़े आवासीय परिसरों में अनिवार्य रूप से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए और उसकी नियमित निगरानी भी हो।

निष्कर्ष

रांची में बढ़ता जल संकट केवल प्राकृतिक समस्या नहीं बल्कि प्रबंधन और संरक्षण की कमी का भी परिणाम है। एक ओर हर साल भारी बारिश होती है, दूसरी ओर करोड़ों लीटर पानी बिना उपयोग के बह जाता है। सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का अभाव इस संकट को और बढ़ा रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में राजधानी के लिए पानी सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान बनाना होगा, तभी रांची को स्थायी जल सुरक्षा मिल सकेगी।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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