Saranda IED Blast : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान मंगलवार को एक गंभीर घटना हुई, जिसमें केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की (कमान्डो बटालियन फॉर रिसॉल्यूट एक्शन) की एक वरिष्ठ कमांडेंट गंभीर रूप से घायल हो गए। विस्फोट की यह घटना इलाके में जारी नक्सल विरोधी अभियान की गंभीरता और नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की फिराक में खड़ी चुनौतियों को उजागर करती है।
घटना पश्चिमी सिंहभूम जिले के अराइकेला-जोराइकेला ब्लॉक के सारंडा जंगल क्षेत्र के पास तब घटी, जब सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम आतंकियों के सर्च ऑपरेशन में लगी थी। माओवादियों द्वारा पहले से ही जंगल के रास्तों में छिपाकर लगाए गए IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) में विस्फोट हो गया और इसमें सीआरपीएफ कोबरा बटालियन के सहायक कमांडेंट अजय मलिक गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके बाएँ पैर में चोटें आई हैं और उन्हें प्राथमिक इलाज के बाद बेहतर उपचार के लिए रांची के अस्पताल में पहुंचाया गया है।
सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि यह विस्फोट उस समय हुआ जब जवान नक्सलियों के ख़िलाफ अभियान के तहत जंगल में आगे बढ़ रहे थे। स्थानीय पुलिस अधीक्षक (SP अमित रेणु) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विस्फोट माओवादी नक्सलियों के द्वारा लगाया गया उपकरण था, जिसे सुरक्षा बलों ने अनजाने में सक्रिय कर दिया। इस घटना से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियानों के प्रति नक्सलियों की कायराना हरकतों का पता चलता है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई और परिस्थिति
घटना के बाद सीआरपीएफ तथा जिला पुलिस ने इलाके में सुरक्षा कवरेज और पूरी घेराबंदी कर दी है। नक्सल विरोधी ऑपरेशन को तेज़ी से जारी रखते हुए आस-पास के जंगलों एवं रास्तों की सर्चिंग बढ़ा दी गई है। मौके पर और अतिरिक्त बलों को तैनात कर हवाई निगरानी, ड्रोन और गश्त दल भेजे गए हैं ताकि नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय ग्रामीणों को भी आगाह करते हुए कहा है कि वे जंगल की ओर बिना जरूरत प्रवेश न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें। ऐसे विस्फोटों में कई बार आम नागरिक भी प्रभावित होते हैं, इससे निपटने के लिए सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं।
सीआरपीएफ CoBRA की भूमिका और नक्सल अभियान
CoBRA, कमान्डो बटालियन फॉर रिसॉल्यूट एक्शन, सीआरपीएफ का विशेषीकृत इकाई है, जिसे नक्सल-प्रभावित इलाकों में संचालित सर्च ऑपरेशन और सैन्य अभियानों के लिए बनाया गया है। यह बल जंगल युद्ध और गुरिल्ला-युद्ध कौशल में प्रशिक्षित है और ऐसे क्षेत्रों में सक्रिय रहता है जहां माओवादियों की गतिविधियाँ अधिक होती हैं।
पिछले कुछ समय से सारंडा और आसपास के जंगल इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान जारी हैं। सुरक्षा बलों ने इन क्षेत्रों में कई बार नक्सलियों के ठिकानों और आत्मघाती उपकरणों का भंडाफोड़ किया है और इस दौरान नक्सलियों के साथ मुठभेड़ भी हुई है। मगर सुरक्षा चुनौतियाँ और नक्सलियों की रणनीति, जिसमें IED जैसे विस्फोटकों का इस्तेमाल शामिल है, सुरक्षा बलों के सामने आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
घटना के प्रभाव और प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस तरह के या पिछले विस्फोटों के मामलों ने साबित किया है कि नक्सली सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर निशाना देने में सक्षम हैं। पिछले हफ्ते भी सारंडा जंगल में IED विस्फोट के कारण कोबरा-209 बटालियन के दो जवान घायल हो गए थे और उन्हें बेहतर इलाज के लिए हेलीकॉप्टर द्वारा रांची लाया गया था। सुरक्षा बलों की सतर्कता और संयुक्त प्रयासों के बावजूद ऐसे विस्फोटों में जवानों को चोटें आना आम प्रक्रिया बन चुकी है।
पश्चिमी सिंहभूम के प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि को देखने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या होम गार्ड्स को सूचित करें। साथ ही, नक्सल विरोधी अभियानों को सफल बनाने के लिए स्थानीय समर्थन व सूचनाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
निष्कर्ष
पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में जारी नक्सल विरोधी अभियान के दौरान IED विस्फोट में कोबरा कमांडेंट के घायल होने की घटना सुरक्षा बलों व नक्सलियों के संघर्ष की जटिलता को दर्शाती है। नक्सल विरोधी अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता, उच्च तकनीक निगरानी, सुरक्षा कवरेज और स्थानीय सहयोग की अहम भूमिका है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और पुलिस एक संयुक्त रणनीति के साथ आंदोलनरत हैं।


