रांची नगर निगम में डिप्टी मेयर की दौड़ तेज, दर्जनभर पार्षद मैदान में | Jharkhand News | Bhaiyajii News

Ranchi Deputy Mayor Election 2026 | Jharkhand News | Bhaiyajii News

झारखंड की राजधानी रांची में नगर निगम की राजनीति इन दिनों चरम पर है। मेयर पद का चुनाव संपन्न होने के बाद अब डिप्टी मेयर की कुर्सी को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। नगर निगम के भीतर पार्षदों के बीच जोड़-तोड़, रणनीति और समर्थन जुटाने की कवायद खुलकर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि दर्जनभर से अधिक पार्षद इस पद की दौड़ में सक्रिय हैं और सभी अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हैं।

27 वोट का गणित बनेगा निर्णायक

रांची नगर निगम में कुल 53 पार्षद हैं। डिप्टी मेयर चुने जाने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 27 पार्षदों का समर्थन हासिल करना अनिवार्य है। यही कारण है कि यह चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि पार्षदों के मतदान से तय होगा। ऐसे में व्यक्तिगत संबंध, राजनीतिक निष्ठा, क्षेत्रीय समीकरण और दलगत रणनीति सभी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

नगर निगम की सत्ता संरचना में डिप्टी मेयर का पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मेयर की अनुपस्थिति में वही कार्यभार संभालता है और कई प्रशासनिक व वित्तीय निर्णयों में उसकी भूमिका प्रभावशाली रहती है। इसलिए इस पद को केवल औपचारिक नहीं, बल्कि प्रभावशाली जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।

भाजपा, कांग्रेस और झामुमो की सक्रियता

मेयर चुनाव के बाद अब प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर डिप्टी मेयर पद पर टिकी है। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा—तीनों दल अपने-अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट करने में लगे हैं।

भाजपा समर्थित पार्षदों की संख्या अच्छी मानी जा रही है, जिससे पार्टी का दावा मजबूत बताया जा रहा है। पार्टी के अंदर कई नामों पर चर्चा चल रही है। कुछ पार्षद ऐसे हैं जो लगातार दूसरी या तीसरी बार जीत दर्ज कर चुके हैं और संगठन में उनकी पकड़ मजबूत है। पार्टी नेतृत्व सभी पहलुओं पर विचार कर सहमति से एक नाम तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

दूसरी ओर कांग्रेस भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रही है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि यदि विपक्षी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनता है तो वे भी मजबूत दावेदारी पेश कर सकते हैं। कांग्रेस की ओर से अनुभवी महिला पार्षद का नाम चर्चा में है, जिन्होंने लगातार जीत हासिल कर अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा भी पीछे नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, संगठन स्तर पर विचार-विमर्श जारी है और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी तय किया जाएगा। झामुमो का प्रयास रहेगा कि ऐसा चेहरा सामने लाया जाए जो विभिन्न वर्गों का समर्थन हासिल कर सके।

निर्दलीय पार्षद बन सकते हैं ‘किंगमेकर’

इस चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। नगर निगम में कुछ पार्षद ऐसे हैं जो किसी बड़े दल से सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं। ऐसे में यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो यही निर्दलीय पार्षद जीत-हार का फैसला कर सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिप्टी मेयर का चुनाव पूरी तरह रणनीति और प्रबंधन का खेल होगा। अंतिम समय तक समीकरण बदल सकते हैं और क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

महिला प्रतिनिधित्व पर भी नजर

नगर निगम में इस बार महिला पार्षदों की संख्या उल्लेखनीय है। ऐसे में यह चर्चा भी तेज है कि क्या डिप्टी मेयर पद पर महिला को मौका दिया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो यह राजधानी की राजनीति में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।

कई महिला पार्षद सक्रिय रूप से समर्थन जुटा रही हैं और अपने अनुभव व जनसमर्थन का हवाला दे रही हैं। पार्टी नेतृत्व भी इस पहलू पर गंभीरता से विचार कर रहा है, क्योंकि महिला नेतृत्व को बढ़ावा देना राजनीतिक दृष्टि से भी सकारात्मक संदेश देता है।

विकास बनाम राजनीति

डिप्टी मेयर पद की दौड़ के बीच शहर की जनता की उम्मीदें भी जुड़ी हुई हैं। रांची तेजी से विस्तार कर रहा शहर है। ट्रैफिक जाम, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, सड़क निर्माण और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी समस्याएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।

जनता चाहती है कि जो भी डिप्टी मेयर बने, वह केवल राजनीतिक समीकरणों तक सीमित न रहे, बल्कि विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाए। नगर निगम की बैठकों में पारदर्शिता, समय पर बजट स्वीकृति और योजनाओं की मॉनिटरिंग जैसे मुद्दों पर भी नया नेतृत्व गंभीरता दिखाए—ऐसी अपेक्षा की जा रही है।

अंदरखाने बैठकों का दौर

सूत्रों के अनुसार, विभिन्न दलों के पार्षदों के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है। कुछ बैठकें औपचारिक रूप से हो रही हैं, तो कुछ अनौपचारिक स्तर पर। समर्थन के लिए व्यक्तिगत संपर्क और समझाइश का दौर भी चल रहा है।

कहा जा रहा है कि अंतिम नामांकन से ठीक पहले तक कई पार्षद अपना रुख स्पष्ट नहीं करेंगे। इससे चुनाव के दिन तक रोमांच बना रहने की संभावना है।

कब होगा चुनाव?

डिप्टी मेयर के चुनाव की तिथि को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। माना जा रहा है कि निगम की पहली सामान्य बैठक में ही चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। चुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।

निष्कर्ष

रांची नगर निगम में डिप्टी मेयर की दौड़ ने राजधानी की राजनीति को नई दिशा दे दी है। दर्जनभर से अधिक पार्षद इस पद के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं और 27 वोट का जादुई आंकड़ा पार करना ही असली चुनौती है। राजनीतिक दलों के बीच रणनीति, निर्दलीयों की भूमिका और महिला प्रतिनिधित्व जैसे पहलू इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि अंततः किसके पक्ष में पार्षदों का बहुमत जाता है और कौन राजधानी का नया डिप्टी मेयर बनता है। इतना तय है कि आने वाले दिनों में रांची नगर निगम की राजनीति और भी गर्म रहने वाली है।

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