World Menstrual Hygiene Day Ranchi : रांची महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रांची जिला प्रशासन द्वारा विश्व मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष का थीम “चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो” रखा गया, जिसका मुख्य उद्देश्य मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक वर्जनाओं और भ्रांतियों को दूर करना तथा किशोरियों में जागरूकता बढ़ाना था।
समाहरणालय ब्लॉक-बी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने की। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त श्री संजय भगत, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती सुरभि सिंह, कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की छात्राएं, शिक्षिकाएं, महिला पर्यवेक्षिकाएं, सीडीपीओ एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि मासिक धर्म महिलाओं और किशोरियों के जीवन का एक प्राकृतिक और सामान्य हिस्सा है। इसके बावजूद समाज में आज भी इसके संबंध में कई भ्रांतियां और गलत धारणाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि इन मिथकों और सामाजिक वर्जनाओं को समाप्त करना केवल प्रशासन या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने किशोरियों को आत्मविश्वास के साथ इस विषय पर खुलकर बात करने और स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया।
उपायुक्त ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए महिलाओं और किशोरियों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है। जब लड़कियां स्वस्थ होंगी तभी वे शिक्षा, खेल, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगी।
पहली बार मासिक धर्म में प्रवेश करने वाली किशोरियों को मिला विशेष प्रोत्साहन
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक थी पहली बार मासिक धर्म का अनुभव करने वाली किशोरियों को विशेष रूप से सम्मानित और प्रोत्साहित करना।
उपायुक्त ने ऐसी किशोरियों को हाइजिन किट और पोषण किट प्रदान की। इन किटों में मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित आवश्यक सामग्री के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक पोषण संबंधी सामग्री भी शामिल थी।
इस पहल का उद्देश्य किशोरियों को यह संदेश देना था कि मासिक धर्म कोई शर्म या डर का विषय नहीं बल्कि शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे सही जानकारी और स्वच्छता के साथ अपनाना चाहिए।
जिले के कस्तुरबा विद्यालयों को मिली 16 सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन द्वारा किशोरियों की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जिले के सभी कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के लिए कुल 16 सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें उपलब्ध कराईं।
इन मशीनों की सहायता से छात्राओं को विद्यालय परिसर में ही आसानी से सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध हो सकेंगे। इससे न केवल उनकी सुविधा बढ़ेगी बल्कि मासिक धर्म के दौरान विद्यालय से अनुपस्थित रहने की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की कई छात्राएं केवल स्वच्छता संबंधी संसाधनों की कमी के कारण स्कूल नहीं जा पाती हैं। ऐसे में यह पहल शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
कस्तुरबा विद्यालय कांके को मिली डिस्पोजर मशीन
कार्यक्रम के दौरान कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, कांके को सैनिटरी नैपकिन डिस्पोजर मशीन भी प्रदान की गई।
यह मशीन उपयोग किए गए सैनिटरी नैपकिन के सुरक्षित और स्वच्छ निपटान में मदद करेगी। इससे विद्यालय परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके उचित निपटान की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
छात्राओं को दिलाई गई महावारी स्वच्छता की शपथ
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी छात्राओं और बालिकाओं को उपायुक्त द्वारा महावारी स्वच्छता शपथ भी दिलाई गई।
शपथ के माध्यम से छात्राओं को नियमित रूप से स्वच्छता बनाए रखने, सही स्वास्थ्य आदतें अपनाने और मासिक धर्म से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने का संकल्प दिलाया गया।
इस दौरान सभी छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन पैड भी वितरित किए गए ताकि वे सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से मासिक धर्म प्रबंधन कर सकें।
स्लोगन लेखन प्रतियोगिता ने बढ़ाई जागरूकता
कार्यक्रम को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि छात्राओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी किया गया।
मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं के बीच स्लोगन लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई।
छात्राओं ने मासिक धर्म स्वच्छता, महिलाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कई प्रभावशाली स्लोगन प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
इस पहल से छात्राओं में रचनात्मकता और जागरूकता दोनों को बढ़ावा मिला।
क्यों महत्वपूर्ण है मासिक धर्म स्वच्छता?
विशेषज्ञों के अनुसार मासिक धर्म स्वच्छता केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं बल्कि शिक्षा, सम्मान और महिला सशक्तिकरण से भी जुड़ा हुआ है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ की रिपोर्टों के अनुसार स्वच्छता संबंधी संसाधनों की कमी के कारण लाखों किशोरियां नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पातीं।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लड़कियां मासिक धर्म को लेकर खुलकर बात करने से हिचकिचाती हैं। इसके कारण संक्रमण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किशोरियों को सही जानकारी, संसाधन और आत्मविश्वास प्रदान किया जा सकता है।
महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
रांची जिला प्रशासन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक दिवस विशेष का आयोजन नहीं बल्कि महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले की प्रत्येक किशोरी को मासिक धर्म से संबंधित सही जानकारी, सुरक्षित संसाधन और स्वच्छता संबंधी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
निष्कर्ष
विश्व मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन दिवस के अवसर पर रांची जिला प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि मासिक धर्म को लेकर समाज में फैली चुप्पी और झिझक को तोड़ना बेहद जरूरी है। “चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो” थीम के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में किशोरियों को जागरूक करने, स्वच्छता संसाधन उपलब्ध कराने और उन्हें आत्मविश्वास से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का सराहनीय प्रयास किया गया। आने वाले समय में ऐसी पहलें महिलाओं और बालिकाओं के स्वास्थ्य तथा सशक्तिकरण को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।







