देवघर में बनेगी ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट? रक्षा मंत्रालय ने सांसद निशिकांत दुबे के प्रस्ताव पर शुरू की प्रक्रिया | Jharkhand News | Bhaiyajii News

देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल | Jharkhand News | Bhaiyajii News

देवघर/रांची। झारखंड के देवघर जिले के लिए बड़ी खबर सामने आई है। देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय ने सकारात्मक पहल शुरू कर दी है। गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर मंत्रालय ने विचार प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है, जिससे झारखंड के औद्योगिक और सामरिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है, तो देवघर न केवल धार्मिक नगरी के रूप में बल्कि देश के महत्वपूर्ण रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में भी पहचाना जाएगा।

सांसद की पहल से बढ़ी उम्मीदें

गोड्डा से सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। उनका तर्क था कि झारखंड की भौगोलिक स्थिति, उपलब्ध भूमि और तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर इस तरह की अत्याधुनिक रक्षा परियोजना के लिए उपयुक्त है।

सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर प्रारंभिक स्तर पर सकारात्मक रुख दिखाया है और संबंधित एजेंसियों से तकनीकी व प्रशासनिक रिपोर्ट मांगी गई है।

तिलौना क्षेत्र में जमीन चिन्हित

जानकारी के मुताबिक देवघर के मोहनपुर प्रखंड स्थित तिलौना क्षेत्र में लगभग 300 एकड़ सरकारी भूमि चिन्हित की गई है। यह भूमि औद्योगिक परियोजना के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।

इस इलाके में एयरपोर्ट, सड़क संपर्क और रेलवे सुविधा उपलब्ध होने से लॉजिस्टिक दृष्टिकोण से भी यह क्षेत्र अनुकूल माना जा रहा है।

ब्रह्मोस क्यों है खास?

ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है। यह भारत और रूस की संयुक्त परियोजना है और भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना की रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा है।

इस मिसाइल की विशेषताएं—

  • अत्यधिक सटीक निशाना साधने की क्षमता
  • लंबी दूरी तक मारक क्षमता
  • सुपरसोनिक गति
  • बहु-आयामी लॉन्च प्लेटफॉर्म

भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा उत्पादन को देश के भीतर बढ़ावा दे रही है। ऐसे में ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल का उत्पादन झारखंड में होना राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकता है।

झारखंड को क्या होगा लाभ?

यदि देवघर में ब्रह्मोस यूनिट स्थापित होती है, तो इसके कई बड़े लाभ होंगे—

1.रोजगार के अवसर

हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इंजीनियर, तकनीशियन, सुरक्षा कर्मी और सहायक उद्योगों में काम करने वालों को रोजगार मिलेगा।

2.औद्योगिक विकास

मिसाइल निर्माण के साथ-साथ सहायक उद्योग जैसे मशीन टूल्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और गुणवत्ता परीक्षण इकाइयों का विकास होगा।

3.निवेश में वृद्धि

देश-विदेश की रक्षा कंपनियों और सप्लायर कंपनियों का निवेश झारखंड की ओर आकर्षित हो सकता है।

4.इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत

सड़क, बिजली, जल आपूर्ति और संचार व्यवस्था में सुधार होगा।

सामरिक दृष्टि से अहम कदम

ब्रह्मोस मिसाइल भारत की रक्षा प्रणाली की रीढ़ मानी जाती है। इसका उत्पादन बढ़ने से न केवल देश की सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी, बल्कि निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे।

भारत पहले ही कुछ देशों के साथ ब्रह्मोस निर्यात को लेकर समझौते कर चुका है। ऐसे में नई उत्पादन इकाई से आपूर्ति क्षमता बढ़ेगी और भारत वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत स्थिति हासिल करेगा।

केंद्र और राज्य के बीच समन्वय

इस परियोजना को साकार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय आवश्यक होगा। भूमि हस्तांतरण, पर्यावरणीय स्वीकृति, सुरक्षा मानक और तकनीकी मूल्यांकन जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो अगले 1-2 वर्षों में निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।

राजनीतिक और जन प्रतिक्रिया

इस प्रस्ताव को लेकर स्थानीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोगों का मानना है कि यह परियोजना देवघर और आसपास के जिलों की तस्वीर बदल सकती है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे झारखंड को राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन मानचित्र पर स्थान मिल सकता है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार रक्षा उत्पादन को स्वदेशी बनाने पर जोर दे रही है। लखनऊ, हैदराबाद और अन्य शहरों में रक्षा कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।

देवघर में ब्रह्मोस यूनिट की स्थापना इस दिशा में पूर्वी भारत का सबसे बड़ा कदम साबित हो सकता है।

निष्कर्ष

देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण यूनिट स्थापित करने की संभावनाएं झारखंड के लिए नए युग की शुरुआत कर सकती हैं। यह परियोजना राज्य को औद्योगिक, आर्थिक और सामरिक रूप से सशक्त बनाने की क्षमता रखती है।

अब सबकी नजर रक्षा मंत्रालय की अंतिम मंजूरी और आगे की प्रक्रिया पर टिकी है। यदि यह योजना हकीकत बनती है, तो देवघर देश के रक्षा उत्पादन नक्शे पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।

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