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धनबाद में NGT प्रतिबंध के बावजूद दामोदर नदी से अवैध बालू खनन जारी, प्रशासन पर उठे सवाल | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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अवैध बालू खनन : झारखंड के धनबाद जिले में दामोदर नदी से अवैध बालू खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा मानसून अवधि में बालू खनन पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद नदी के विभिन्न घाटों से लगातार बालू निकाले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि खनन माफिया दिन-रात सक्रिय हैं और प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद अवैध खनन का कारोबार बेखौफ जारी है।

दामोदर नदी झारखंड की जीवनरेखा मानी जाती है। यह नदी न केवल लाखों लोगों के लिए जल का स्रोत है, बल्कि कृषि, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में नदी से अनियंत्रित और अवैध तरीके से बालू निकाले जाने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है।

क्या है NGT का नियम?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मानसून अवधि के दौरान नदियों से बालू खनन पर प्रतिबंध लगाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के मौसम में नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना आवश्यक होता है। इस दौरान खनन होने से नदी की धारा प्रभावित होती है, जलस्तर में असंतुलन आता है और नदी के किनारों पर कटाव का खतरा बढ़ जाता है।

इसके बावजूद धनबाद जिले में कई स्थानों पर ट्रैक्टर, हाइवा और अन्य भारी वाहनों के माध्यम से बालू ढुलाई किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय यह गतिविधि और अधिक तेज हो जाती है।

दामोदर नदी के घाट बने अवैध कारोबार का केंद्र

ग्रामीणों के अनुसार दामोदर नदी के कई घाटों पर सुबह से लेकर देर रात तक बालू उठाव का काम चलता है। कुछ जगहों पर मशीनों की मदद से नदी की सतह को खोदकर बड़ी मात्रा में बालू निकाला जा रहा है। इसके बाद ट्रैक्टरों और ट्रकों में भरकर विभिन्न निर्माण स्थलों तक पहुंचाया जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है और इसमें एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दिया है।

पर्यावरण पर पड़ रहा गंभीर असर

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध बालू खनन का सबसे बड़ा नुकसान नदी और उसके आसपास के पारिस्थितिक तंत्र को होता है। अत्यधिक बालू निकासी से नदी की गहराई और चौड़ाई प्रभावित होती है। इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव आता है और कई स्थानों पर जलस्तर तेजी से गिरने लगता है।

इसके अलावा नदी किनारे बसे गांवों में भूमि कटाव की समस्या भी बढ़ जाती है। खेती योग्य जमीन धीरे-धीरे नदी में समाने लगती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव देखा गया है।

सरकार को हो रहा राजस्व का नुकसान

अवैध बालू खनन से राज्य सरकार को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वैध खनन के लिए निर्धारित रॉयल्टी और अन्य शुल्क सरकार को प्राप्त होते हैं, लेकिन अवैध खनन में यह पूरा राजस्व माफिया के हाथों में चला जाता है।

खनन विशेषज्ञों के अनुसार यदि अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए तो सरकार को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। यही राशि विकास कार्यों और जनहित योजनाओं में खर्च की जा सकती है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन कोई छिपी हुई गतिविधि नहीं है। भारी वाहनों की आवाजाही, नदी घाटों पर लगातार गतिविधियां और खुलेआम बालू परिवहन यह साबित करता है कि प्रशासन को इसकी जानकारी है।

हालांकि प्रशासन समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा करता है, लेकिन जमीन पर स्थिति कुछ और ही नजर आती है। लोगों का कहना है कि छिटपुट कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। इसके लिए लगातार निगरानी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।

ग्रामीणों में बढ़ रही नाराजगी

दामोदर नदी के किनारे बसे कई गांवों के लोगों ने अवैध बालू खनन के खिलाफ आवाज उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।

कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील घाटों पर विशेष निगरानी रखी जाए और अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि केवल औपचारिक छापेमारी से समस्या का समाधान नहीं होगा।

तकनीक के इस्तेमाल की मांग

विशेषज्ञों का सुझाव है कि अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। नदी घाटों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ड्रोन से निगरानी की जाए और अवैध परिवहन करने वाले वाहनों की GPS ट्रैकिंग की व्यवस्था की जाए।

इसके अलावा स्थानीय प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। संयुक्त अभियान चलाकर इस अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

दामोदर नदी को बचाना समय की मांग

दामोदर नदी झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह नदी लाखों लोगों की जल आवश्यकताओं को पूरा करती है और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को भी सहारा देती है। यदि अवैध बालू खनन इसी तरह जारी रहा तो नदी का प्राकृतिक स्वरूप गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

पर्यावरणविदों का मानना है कि नदी संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसके लिए आगे आना होगा। स्थानीय लोगों की सहभागिता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति से ही इस समस्या का समाधान संभव है।

निष्कर्ष

धनबाद में NGT के प्रतिबंध के बावजूद दामोदर नदी से जारी अवैध बालू खनन पर्यावरण, प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर जहां नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन सख्त कदम उठाए, निगरानी व्यवस्था मजबूत करे और अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे। तभी दामोदर नदी को सुरक्षित रखा जा सकेगा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सकेगा।

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