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धनबाद में आकाशीय बिजली का कहर: ताड़ के पेड़ में लगी आग, बाल-बाल बचे ग्रामीण | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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धनबाद आकाशीय बिजली : धनबाद जिले में सोमवार को मौसम के बदले मिजाज ने लोगों को डरा दिया। तेज बारिश और गरज-चमक के बीच आकाशीय बिजली गिरने से एक ताड़ के पेड़ में आग लग गई। इस अप्रत्याशित घटना के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। वहीं आग की लपटें और धुआं उठता देख लोगों में दहशत फैल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना उस समय हुई जब क्षेत्र में तेज बारिश के साथ बिजली कड़क रही थी। अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। जब लोगों ने बाहर निकलकर देखा तो एक ऊंचे ताड़ के पेड़ से धुआं और आग की लपटें निकल रही थीं। ग्रामीणों ने बताया कि आकाशीय बिजली सीधे पेड़ पर गिरी थी, जिसके कारण पेड़ का ऊपरी हिस्सा जलने लगा।

बिजली गिरने के बाद मचा हड़कंप

घटना के बाद आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। कई लोग पहले तो समझ नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या है, लेकिन जब उन्होंने पेड़ में आग देखी तो सभी हैरान रह गए। कुछ लोगों ने अपने मोबाइल फोन से घटना का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार बिजली गिरने की घटनाएं देखी हैं, लेकिन किसी पेड़ में इस तरह आग लगते पहली बार देखा। घटना के दौरान कुछ देर के लिए लोगों में भय का माहौल बन गया था। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मानसून के दौरान बढ़ जाता है खतरा

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के मौसम में झारखंड के विभिन्न जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, देवघर और दुमका जैसे जिलों में हर वर्ष कई लोग इसकी चपेट में आते हैं। खुले मैदान, ऊंचे पेड़ और खेतों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि ताड़, खजूर और नारियल जैसे ऊंचे पेड़ अक्सर बिजली को आकर्षित करते हैं। ऐसे पेड़ों की ऊंचाई अधिक होने के कारण आकाशीय बिजली सबसे पहले इन्हीं पर गिरती है। यही कारण है कि इस घटना में भी ताड़ का पेड़ बिजली का निशाना बना।

क्यों लग जाती है पेड़ों में आग?

वैज्ञानिकों के अनुसार आकाशीय बिजली का तापमान लगभग 30,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो सूर्य की सतह से भी कई गुना अधिक होता है। जब यह किसी पेड़ पर गिरती है तो पेड़ के अंदर मौजूद नमी अचानक भाप में बदल जाती है। इससे पेड़ की छाल फट सकती है और अत्यधिक गर्मी के कारण आग लग जाती है।

ताड़ के पेड़ों में रेशेदार संरचना होने के कारण आग तेजी से फैलने की संभावना रहती है। हालांकि बारिश होने के कारण आग ज्यादा देर तक नहीं फैल सकी और कुछ समय बाद स्वतः नियंत्रित हो गई।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की मांग

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मौसम संबंधी चेतावनियों को अधिक प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मौसम विभाग चेतावनी जारी करता है, लेकिन इसकी जानकारी समय पर गांवों तक नहीं पहुंच पाती।

लोगों ने गांवों में जागरूकता अभियान चलाने और आकाशीय बिजली से बचाव के उपायों की जानकारी देने की भी मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते लोगों को सतर्क किया जाए तो कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

मौसम विभाग ने जारी की सलाह

मौसम विभाग ने बारिश और गरज-चमक के दौरान लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, खेत, नदी, तालाब और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा है कि बिजली कड़कने के दौरान यदि किसी व्यक्ति को सुरक्षित भवन नहीं मिलता है तो उसे दोनों पैरों को जोड़कर झुककर बैठना चाहिए। इस दौरान जमीन पर पूरी तरह लेटना खतरनाक हो सकता है।

आकाशीय बिजली से बचने के उपाय

क्या करें?

  • मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखें।
  • गरज-चमक के दौरान घर के अंदर रहें।
  • बिजली कड़कने पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग कम करें।
  • सुरक्षित भवन या वाहन में शरण लें।

क्या न करें?

  • पेड़ के नीचे खड़े न हों।
  • खुले मैदान में मोबाइल फोन का उपयोग न करें।
  • तालाब, नदी या जलाशयों के पास न जाएं।
  • धातु की वस्तुओं और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें।

झारखंड में बढ़ रही हैं बिजली गिरने की घटनाएं

झारखंड में हर साल आकाशीय बिजली से कई लोगों की जान चली जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और दैनिक कार्यों के दौरान लोग अक्सर खुले स्थानों में रहते हैं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। सरकार और मौसम विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी भी व्यापक स्तर पर जागरूकता की आवश्यकता है।

धनबाद में ताड़ के पेड़ में आग लगने की यह घटना भले ही किसी बड़े हादसे में नहीं बदली, लेकिन इसने लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने का संदेश जरूर दिया है।

निष्कर्ष

धनबाद में आकाशीय बिजली गिरने से ताड़ के पेड़ में लगी आग की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लेना कितना जरूरी है। समय पर सतर्कता और सही जानकारी से ऐसी घटनाओं में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मानसून के इस मौसम में लोगों को विशेष सावधानी बरतने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है।

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