DSPMU News : रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय यानी DSPMU एक बार फिर छात्र आंदोलन और प्रशासनिक विवादों को लेकर सुर्खियों में आ गया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी हालिया परीक्षा परिणाम में करीब 1300 छात्रों को ‘ईयर बैक’ दिए जाने के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्र और छात्र संगठनों के कार्यकर्ता विश्वविद्यालय परिसर में उतर आए और प्रशासनिक भवन में तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय की अव्यवस्थित परीक्षा प्रणाली और नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के गलत क्रियान्वयन के कारण उनका भविष्य संकट में पड़ गया है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि बिना उचित शैक्षणिक व्यवस्था और स्पष्ट दिशा-निर्देश के नई शिक्षा नीति लागू कर दी गई, जिसका खामियाजा अब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
DSPMU में हाल ही में जारी परीक्षा परिणाम में बड़ी संख्या में छात्रों को ‘ईयर बैक’ घोषित कर दिया गया। छात्रों के मुताबिक करीब 1300 विद्यार्थी इससे प्रभावित हुए हैं। इनमें कई ऐसे छात्र भी शामिल हैं जो पहले सेमेस्टर या बैक पेपर के परिणाम का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें अचानक फेल घोषित कर दिया गया।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण कई विषयों का रिजल्ट समय पर जारी नहीं हुआ। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि वे वर्तमान में पांचवें सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उनका पहले सेमेस्टर का परिणाम अब तक लंबित है। ऐसे में अचानक ‘ईयर बैक’ दिए जाने से उनका पूरा शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है।
छात्रों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन नई शिक्षा नीति को सही तरीके से लागू करने में पूरी तरह विफल रहा है। उनका आरोप है कि शिक्षकों और विभागों को भी पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली की स्पष्ट जानकारी नहीं है।
छात्रों ने बताया कि कई बार परीक्षा से कुछ दिन पहले ही MDC और Minor विषयों की जानकारी दी जाती है। ऐसे में विद्यार्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। छात्रों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट योजना के प्रयोगात्मक तरीके से शिक्षा प्रणाली लागू की जा रही है।
कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि बैक पेपर परीक्षा में उन्हें उन विषयों की भी परीक्षा देनी पड़ी, जिनमें वे पहले ही पास हो चुके थे। इसके बावजूद रिजल्ट में उन्हें उन्हीं विषयों में फेल घोषित कर दिया गया। इस गड़बड़ी ने छात्रों की चिंता और बढ़ा दी है।
प्रशासनिक भवन में तालाबंदी
छात्रों का गुस्सा उस समय और बढ़ गया जब उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र प्रशासनिक भवन पहुंच गए और तालाबंदी कर दी। विश्वविद्यालय परिसर में घंटों तक हंगामा चलता रहा।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन से संपर्क कर रहे थे, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन दिया गया। लगातार अनदेखी के कारण छात्रों ने आंदोलन का रास्ता चुना।
आंदोलन में कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
NEP 2020 को लेकर बढ़ा विवाद
छात्रों ने कहा कि नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 को बिना तैयारी और संसाधनों के लागू किया गया है। इससे छात्रों के सामने कई तकनीकी और शैक्षणिक समस्याएं पैदा हो गई हैं।
छात्रों के अनुसार—
- पाठ्यक्रम समय पर स्पष्ट नहीं किया जाता
- परीक्षा प्रणाली बार-बार बदलती रहती है
- विभागों में समन्वय की कमी है
- रिजल्ट जारी करने में भारी देरी हो रही है
- बैक पेपर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन खुद नई व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नहीं है, जबकि इसका सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
DSPMU में पहले भी हो चुके हैं आंदोलन
यह पहली बार नहीं है जब DSPMU छात्र आंदोलनों को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी फीस वृद्धि, क्लस्टरिंग सिस्टम, छात्र सुविधाओं और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं।
कुछ महीने पहले भी छात्र संगठनों ने फीस वृद्धि और सुविधाओं की कमी को लेकर विश्वविद्यालय में आंदोलन किया था। उस दौरान कई दिनों तक शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। छात्र संगठनों का आरोप है कि प्रशासन समस्याओं को समय पर हल करने के बजाय सिर्फ आश्वासन देता है।
छात्रों का भविष्य संकट में
‘ईयर बैक’ मिलने से सबसे ज्यादा चिंता उन छात्रों को है जिनकी पढ़ाई और करियर प्रभावित हो सकता है। कई छात्रों ने कहा कि यदि समय पर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उनका एक पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।
कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं और आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक आए इस रिजल्ट ने उन्हें मानसिक तनाव में डाल दिया है। students का कहना है कि वे अपनी गलती नहीं, बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्था की सजा भुगत रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार प्रशासन पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है और छात्रों की शिकायतों को जांचने की बात कही जा रही है।
छात्रों ने कुलपति और परीक्षा नियंत्रक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक ‘ईयर बैक’ वापस नहीं लिया जाता और रिजल्ट की दोबारा जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
DSPMU में हुए इस विवाद ने एक बार फिर उच्च शिक्षा व्यवस्था और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई प्रणाली को लागू करने से पहले शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों को पूरी जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली और रिजल्ट प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी तो छात्रों का भरोसा कमजोर होगा। इसके अलावा समय पर रिजल्ट जारी करना और तकनीकी गड़बड़ियों को रोकना भी विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अभिभावकों में भी चिंता
इस पूरे मामले को लेकर अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की है।
अभिभावकों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में लगातार बढ़ती अव्यवस्था छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को अधिक जिम्मेदार और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।
आंदोलन और तेज होने की चेतावनी
छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि वे जल्द समाधान चाहते हैं।
फिलहाल DSPMU का यह विवाद पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्र अब विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। वहीं शिक्षा जगत से जुड़े लोग इस घटना को उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी मान रहे हैं।







