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राज्यसभा चुनाव: इरफान अंसारी का भाजपा पर बड़ा हमला, बोले- पहले अडानी-अंबानी, अब नाथवानी को झारखंड पर थोप रहे | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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इरफान अंसारी :  झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। चुनावी समीकरणों और उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा और भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड की जनता अपने सम्मान और स्वाभिमान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार झारखंड के हितों की अनदेखी कर रही है। पहले बड़े उद्योगपतियों के प्रभाव में राजनीति की गई और अब राज्यसभा चुनाव में बाहरी उम्मीदवारों को आगे बढ़ाकर झारखंड की पहचान को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

झारखंड के सम्मान का सवाल है राज्यसभा चुनाव

इरफान अंसारी ने कहा कि राज्यसभा चुनाव केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह झारखंड की अस्मिता, पहचान और राजनीतिक सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उनका कहना था कि झारखंड में प्रतिभाशाली, शिक्षित और अनुभवी नेताओं की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद बाहरी व्यक्तियों को राज्य का प्रतिनिधित्व देने की कोशिश समझ से परे है।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा को झारखंड के भीतर ऐसा कोई नेता क्यों नहीं मिला, जिसे राज्यसभा भेजा जा सके। अंसारी के मुताबिक यह फैसला भाजपा के झारखंडी नेतृत्व पर अविश्वास को भी दर्शाता है।

भाजपा पर दोहरी राजनीति का आरोप

स्वास्थ्य मंत्री ने भाजपा पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के कई नेता पहले परिमल नाथवानी की आलोचना करते थे, लेकिन अब वही नेता उनका समर्थन कर रहे हैं। इससे भाजपा की राजनीतिक सोच और उसके सिद्धांतों पर सवाल खड़े होते हैं।

अंसारी ने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समझ रही है कि किस तरह राजनीतिक हितों के लिए विचारधारा और सिद्धांतों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में यह मुद्दा जनता के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।

भाजपा विधायकों से की अंतरात्मा की आवाज सुनने की अपील

इरफान अंसारी ने भाजपा विधायकों से भी अपील की कि वे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर झारखंड के हित में फैसला लें। उन्होंने कहा कि कई भाजपा विधायक निजी तौर पर इस मुद्दे को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विधायक जनता के प्रतिनिधि होते हैं और उनकी पहली जिम्मेदारी राज्य तथा उसके लोगों के प्रति होती है। ऐसे में उन्हें अपने विवेक और अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए।

अंसारी ने विश्वास जताया कि कई विधायक झारखंड के सम्मान और स्थानीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देंगे।

महागठबंधन उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश

राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार बनाए गए प्रणव झा के समर्थन में भी इरफान अंसारी ने खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड का प्रतिनिधित्व ऐसे व्यक्ति को मिलना चाहिए, जो राज्य की संस्कृति, भाषा, परंपराओं और सामाजिक परिस्थितियों को अच्छी तरह समझता हो।

उनके अनुसार स्थानीय मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाने के लिए राज्य से गहरा जुड़ाव होना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन का उम्मीदवार झारखंड की आकांक्षाओं का बेहतर प्रतिनिधित्व करेगा।

नाथवानी की उम्मीदवारी से बढ़ी राजनीतिक हलचल

भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी ने राज्यसभा चुनाव को रोचक बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव ने झारखंड की राजनीति में एक नया विमर्श खड़ा कर दिया है, जिसमें स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा प्रमुख बनकर उभरा है।

राजनीतिक दल अब अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव केवल सीट जीतने की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी सवाल बन चुका है।

झारखंडी अस्मिता बनाम राजनीतिक गणित

राज्यसभा चुनाव के बहाने झारखंड में एक बार फिर “झारखंडी अस्मिता” का मुद्दा चर्चा में है। सत्तारूढ़ गठबंधन इसे राज्य की पहचान और स्वाभिमान का सवाल बता रहा है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है। चुनावी नतीजे चाहे जो हों, लेकिन इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में स्थानीय प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय पहचान को फिर से केंद्र में ला दिया है।

जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना चुनाव

राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बयान अब जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन चुके हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक यह सवाल उठ रहा है कि राज्य का प्रतिनिधित्व स्थानीय नेता करें या राष्ट्रीय स्तर के प्रभावशाली चेहरे।

इरफान अंसारी के बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनावी परिणाम से पहले इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकते हैं।

निष्कर्ष

झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 अब केवल एक चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की पहचान, राजनीतिक स्वाभिमान और स्थानीय प्रतिनिधित्व की बहस का केंद्र बन चुका है। इरफान अंसारी द्वारा भाजपा और परिमल नाथवानी पर लगाए गए आरोपों ने चुनावी मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दल इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और राज्यसभा चुनाव के नतीजे झारखंड की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।

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