जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित जर्जर “लक्ष्मी मेंशन” भवन को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी (JNAC) को तत्काल जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और JNAC के उप नगर आयुक्त को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब तकनीकी रिपोर्ट में लक्ष्मी मेंशन भवन को “बेहद खतरनाक” और “रहने योग्य नहीं” घोषित किया गया। इसके बावजूद भवन अब तक खाली नहीं कराया गया है और उसमें लोग रह रहे हैं। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
बिष्टुपुर स्थित लक्ष्मी मेंशन लंबे समय से विवादों में है। यह बहुमंजिला भवन काफी पुराना हो चुका है और इसकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। स्थानीय लोगों और याचिकाकर्ता का कहना है कि भवन कभी भी अचानक गिर सकता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
याचिकाकर्ता डुमकेश्वर महतो ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि भवन को तुरंत खाली कराकर ध्वस्त किया जाए। याचिका में कहा गया कि यह इमारत लोगों की जान के लिए खतरा बन चुकी है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रवैया
झारखंड हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार और JNAC को जल्द से जल्द प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद यदि भवन में लोग रह रहे हैं, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख भी जल्द तय की और अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। इससे साफ संकेत मिला कि अदालत इस मामले को लेकर कोई नरमी नहीं बरतना चाहती।
तकनीकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि तकनीकी रिपोर्ट में लक्ष्मी मेंशन को बेहद जर्जर घोषित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि भवन की संरचना कमजोर हो चुकी है और यह किसी भी समय ढह सकता है।
इसी रिपोर्ट के आधार पर JNAC के उप नगर आयुक्त ने भवन खाली कराने और उसे ध्वस्त करने का आदेश भी जारी किया था। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर जर्जर भवनों को खाली नहीं कराया गया, तो वे बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। देश के कई शहरों में ऐसे हादसे पहले भी हो चुके हैं, जहां पुरानी इमारतों के गिरने से लोगों की जान गई है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब तकनीकी रिपोर्ट और प्रशासनिक आदेश दोनों मौजूद थे, तो अब तक भवन को खाली क्यों नहीं कराया गया? स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की धीमी कार्रवाई के कारण लोगों की जान जोखिम में बनी हुई है।
हाईकोर्ट ने भी इसी मुद्दे पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि यदि भवन खतरनाक घोषित हो चुका है, तो उसमें लोगों को रहने देना गंभीर लापरवाही माना जाएगा।
भवन में रहने वाले लोगों को भी बनाया जाएगा पक्षकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि वर्तमान में लक्ष्मी मेंशन में रह रहे लोगों को भी मामले में पक्षकार बनाया जाए। कोर्ट का मानना है कि जो लोग भवन में रह रहे हैं, उनका पक्ष सुनना भी जरूरी है।
इसके लिए अदालत ने याचिकाकर्ता को दस्ती नोटिस के जरिए सभी लोगों को नोटिस देने की अनुमति दी है। इससे अब मामले में रहने वाले लोगों की भी भूमिका सामने आ सकेगी।
जमशेदपुर में अवैध और जर्जर भवनों पर बढ़ी कार्रवाई
लक्ष्मी मेंशन का मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब जमशेदपुर में अवैध और जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो चुकी है। झारखंड हाईकोर्ट पहले भी शहर के कई अवैध निर्माणों पर सख्त टिप्पणी कर चुका है।
हाईकोर्ट ने हाल के महीनों में कई अवैध भवनों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि अवैध निर्माण कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालतें अब शहरी क्षेत्रों में अनियमित निर्माण और जर्जर भवनों को लेकर ज्यादा गंभीर हो चुकी हैं। यही वजह है कि प्रशासनिक एजेंसियों पर भी जवाबदेही बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों में डर का माहौल
लक्ष्मी मेंशन के आसपास रहने वाले लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भवन की हालत देखकर हादसे की आशंका बनी रहती है। कई लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इमारत खाली नहीं कराई गई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर बरसात के मौसम में भवन की स्थिति और खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी नजर
अब सभी की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि अदालत प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांग सकती है कि अब तक भवन को खाली क्यों नहीं कराया गया।
यदि प्रशासन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, तो अदालत सख्त आदेश जारी कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला जमशेदपुर में जर्जर और अवैध भवनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की शुरुआत साबित हो सकता है।
शहर में बढ़ती चिंता
जमशेदपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में पुराने और जर्जर भवनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई भवन ऐसे हैं जिनकी स्थिति बेहद खराब है, लेकिन उनमें अब भी लोग रह रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निकायों को समय-समय पर भवनों की जांच करानी चाहिए और खतरनाक घोषित इमारतों को तुरंत खाली कराया जाना चाहिए। इससे भविष्य में होने वाले हादसों को रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
जमशेदपुर का लक्ष्मी मेंशन अब केवल एक जर्जर भवन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और लोगों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। हाईकोर्ट के सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि अब जर्जर और खतरनाक भवनों को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भवन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अदालत के निर्देशों का पालन करना है।







