Homeरांची न्यूज़108 एंबुलेंस नहीं मिलने से मौत मामले में जांच रिपोर्ट, नेटवर्क समस्या...

108 एंबुलेंस नहीं मिलने से मौत मामले में जांच रिपोर्ट, नेटवर्क समस्या को बताया गया जिम्मेदार | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

- Advertisement -spot_img

जामताड़ा 108 एंबुलेंस मौत मामला : झारखंड के जामताड़ा जिले में 108 एंबुलेंस सेवा समय पर नहीं मिलने के कारण एक मरीज की मौत के मामले ने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींचा है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई जांच की रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसमें एंबुलेंस सेवा की विफलता के पीछे नेटवर्क समस्या को प्रमुख कारण बताया गया है। हालांकि इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जामताड़ा जिले के गोपालपुर पंचायत अंतर्गत शहरबेड़ा गांव निवासी मोनू टुडू की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। परिजनों का आरोप था कि उन्होंने कई बार 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद परिवार को मजबूरी में मरीज को ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से अस्पताल ले जाना पड़ा। अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आक्रोश फैल गया था।

घटना मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल जांच के आदेश दिए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) झारखंड के अधिकारियों ने विस्तृत जांच कर रिपोर्ट तैयार की।

जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, घटना वाले दिन स्वास्थ्य सहिया मीना मुर्मू ने शाम लगभग 7:42 बजे 108 एंबुलेंस सेवा के टोल-फ्री नंबर पर कॉल किया था। कॉल सेंटर के रिकॉर्ड में यह कॉल दर्ज भी हुई थी, लेकिन यह एक “साइलेंट कॉल” के रूप में रिकॉर्ड हुई। यानी कॉल कनेक्ट तो हुई, लेकिन उसमें कोई आवाज सुनाई नहीं दी।

रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या होने के कारण कॉल करने वाली सहिया की आवाज कॉल सेंटर तक नहीं पहुंच पाई। कुछ सेकंड बाद कॉल स्वतः कट गई। चूंकि कॉल पूरी तरह से कनेक्ट नहीं हो सकी, इसलिए सिस्टम मरीज का स्थान और जिला पहचान नहीं कर पाया। परिणामस्वरूप एंबुलेंस डिस्पैच की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।

नेटवर्क समस्या ने बढ़ाई मुश्किल

जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि तकनीकी रूप से कॉल सेंटर को मरीज की स्थिति या स्थान की जानकारी ही नहीं मिल सकी। ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर मोबाइल नेटवर्क अक्सर आपातकालीन सेवाओं के संचालन में बाधा बनता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल और मोबाइल नेटवर्क पर आधारित सेवाओं के लिए ग्रामीण इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

जामताड़ा की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की चुनौतियों को भी उजागर करती है। जब आपातकालीन स्थिति में कॉल सेंटर तक आवाज ही नहीं पहुंच पाए, तो मरीज को समय पर सहायता मिलना मुश्किल हो जाता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने भी लिया संज्ञान

घटना की जानकारी मिलने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि जांच रिपोर्ट में प्राथमिक तौर पर नेटवर्क समस्या को कारण माना गया है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तकनीकी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा। साथ ही कॉल सेंटर और एंबुलेंस डिस्पैच सिस्टम की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।

जामताड़ा में एंबुलेंस सेवा की स्थिति

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जामताड़ा जिले में कुल 14 एंबुलेंस आवंटित हैं। इनमें से 13 एंबुलेंस वर्तमान में सक्रिय रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि एक एंबुलेंस पुरानी सेवा प्रदाता कंपनी से हैंडओवर प्रक्रिया में है।

विभाग के अनुसार 1 जून से 13 जून के बीच जिले में प्रतिदिन औसतन 13 आपातकालीन मामलों में एंबुलेंस भेजी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में औसत रिस्पॉन्स टाइम 22 मिनट 46 सेकंड और शहरी क्षेत्रों में 20 मिनट 22 सेकंड दर्ज किया गया।

इन आंकड़ों के बावजूद हालिया घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक पहुंच और उनकी गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन होना चाहिए।

पूरे राज्य में 108 सेवा की भूमिका

झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा एक महत्वपूर्ण आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा है, जो 24 घंटे मरीजों को नजदीकी सरकारी अस्पताल तक पहुंचाने का काम करती है। राज्य भर में प्रतिदिन हजारों कॉल इस सेवा पर प्राप्त होती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संबंधित अवधि में राज्य में रोजाना औसतन 10 हजार से अधिक कॉल प्राप्त हुईं और सैकड़ों मामलों में एंबुलेंस भेजी गई।

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एंबुलेंस की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। नेटवर्क कनेक्टिविटी, जीपीएस ट्रैकिंग, कॉल बैक सिस्टम और वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

तकनीकी सुधार की तैयारी

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 108 एंबुलेंस कॉल सेंटर की तकनीकी क्षमता और रिस्पॉन्स सिस्टम को और बेहतर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने मीडिया और आम लोगों से भी अपील की है कि एंबुलेंस से जुड़ी शिकायतों में कॉल का समय और मोबाइल नंबर साझा करें ताकि जांच में आसानी हो सके।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार माध्यम विकसित किए जाएं। इसके अलावा पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य आपातकालीन सहायता तंत्र को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

जामताड़ा में मरीज की मौत का यह मामला केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों का गंभीर संकेत है। जांच रिपोर्ट में नेटवर्क समस्या को कारण बताया गया है, लेकिन यह घटना बताती है कि आपातकालीन सेवाओं की सफलता केवल एंबुलेंस की उपलब्धता पर नहीं बल्कि संपूर्ण संचार व्यवस्था की मजबूती पर निर्भर करती है। आने वाले समय में यदि तकनीकी सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो ऐसी दुखद घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

हमारे सोशल मीडिया से जुड़ें
18,600FansLike
2,607FollowersFollow
1,236FollowersFollow
1,347SubscribersSubscribe
और पढ़ें
कैटेगरीज़
जुड़ी खबरें
ब्रेकिंग न्यूज़
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here