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कापासारा में 8 दिनों से बिजली गुल, ट्रांसफार्मर खराब होने पर ग्रामीणों ने पेट्रोल-डीजल पंप बंद कर शुरू किया धरना | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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कापासारा बिजली संकट : झारखंड के धनबाद जिले के निरसा प्रखंड अंतर्गत ईसीएल मुगमा क्षेत्र के कापासारा गांव और आसपास के इलाकों में पिछले आठ दिनों से जारी बिजली संकट ने लोगों की परेशानी को चरम पर पहुंचा दिया है। लगातार आठ दिनों से बिजली आपूर्ति ठप रहने से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए कापासारा ओसीपी स्थित पेट्रोल और डीजल पंप का संचालन बंद करा दिया तथा धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली बहाल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

500 केवीए ट्रांसफार्मर जलने से शुरू हुई समस्या

जानकारी के अनुसार कापासारा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के लिए लगाया गया 500 केवीए का ट्रांसफार्मर करीब आठ दिन पहले जल गया था। ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था चरमरा गई। कापासारा सहित आसपास के कई गांव अंधेरे में डूब गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग और ईसीएल प्रबंधन को इसकी सूचना दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण हजारों लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों का आक्रोश बढ़ता गया और आखिरकार उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

पेट्रोल और डीजल पंप बंद कर जताया विरोध

सोमवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण कापासारा ओसीपी पहुंचे और वहां स्थित पेट्रोल एवं डीजल पंप को बंद करा दिया। इसके बाद लोगों ने धरना शुरू कर दिया और बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भी भाग लिया।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया जाता या बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। लोगों ने प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी भी की।

भीषण गर्मी में बढ़ी लोगों की परेशानी

इन दिनों झारखंड के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में आठ दिनों तक बिजली नहीं रहने से लोगों का जीवन बेहद कठिन हो गया है। घरों में पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरण बंद पड़े हैं। रात के समय लोगों को अंधेरे और गर्मी दोनों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे अधिक खराब है। लगातार गर्मी और बिजली की कमी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं। कई लोग रातभर जागकर समय बिताने को मजबूर हैं।

पेयजल संकट ने बढ़ाई मुश्किलें

बिजली संकट का असर केवल रोशनी और घरेलू उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। क्षेत्र के अधिकांश घरों में मोटर के जरिए पानी की आपूर्ति होती है। बिजली नहीं रहने के कारण मोटर संचालित नहीं हो पा रहे हैं, जिससे पानी की भारी किल्लत हो गई है।

महिलाओं को घर के कामकाज के लिए दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द बिजली बहाल नहीं हुई तो जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।

विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ा असर

बिजली आपूर्ति ठप होने का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई छात्रों ने बताया कि वे रात में पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण चार्ज नहीं होने के कारण ऑनलाइन अध्ययन भी प्रभावित हो रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की परीक्षाएं और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से जले हुए 500 केवीए ट्रांसफार्मर को तत्काल बदलना, बिजली आपूर्ति बहाल करना और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्थायी व्यवस्था करना शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आधुनिक जीवन की सबसे जरूरी आवश्यकता है। इसके बिना सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इसलिए इस समस्या का तत्काल समाधान होना चाहिए।

प्रशासन और प्रबंधन से कार्रवाई की उम्मीद

प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अधिकारी सक्रिय हो जाएं तो समस्या का समाधान जल्द संभव है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनके आंदोलन के बाद संबंधित विभाग और ईसीएल प्रबंधन गंभीरता दिखाएंगे।

हालांकि समाचार लिखे जाने तक ट्रांसफार्मर बदलने या बिजली आपूर्ति बहाल करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी।

आंदोलन तेज होने की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और बड़ा रूप देंगे। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में सड़क जाम, घेराव और अन्य लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।

कापासारा में बिजली संकट अब केवल तकनीकी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह जनसुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है। क्षेत्र के हजारों लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और संबंधित विभाग उनकी समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी करते हैं।

निष्कर्ष

धनबाद के कापासारा क्षेत्र में आठ दिनों से जारी बिजली संकट ने लोगों के धैर्य की परीक्षा ले ली है। ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद बिजली बहाल नहीं होने से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पेट्रोल-डीजल पंप बंद कर धरना शुरू कर दिया। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और व्यापक हो सकता है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे तत्काल कदम उठाकर बिजली आपूर्ति बहाल करें और लोगों को राहत पहुंचाएं।

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