प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान : गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर झारखंड में 9 जून को राज्य के सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं की व्यापक स्वास्थ्य जांच की जाएगी तथा उन्हें सुरक्षित प्रसव और मातृ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।
मातृ स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान कम से कम एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा गुणवत्तापूर्ण जांच और परामर्श उपलब्ध कराना है। पिछले एक दशक में इस अभियान ने देशभर में लाखों महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
झारखंड जैसे राज्यों में, जहां ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच एक बड़ी चुनौती रही है, वहां इस अभियान ने गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच और उपचार उपलब्ध कराने में सकारात्मक योगदान दिया है।
9 जून को होंगे विशेष स्वास्थ्य शिविर
अभियान के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्वास्थ्य विभाग ने 9 जून को विशेष शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन शिविरों में स्त्री रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहेंगे।
गर्भवती महिलाओं का रक्तचाप, हीमोग्लोबिन स्तर, वजन, रक्त शर्करा और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य मानकों की जांच की जाएगी। इसके साथ ही उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर उन्हें आगे के उपचार और निगरानी के लिए चिन्हित किया जाएगा।
स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि समय पर जोखिम की पहचान होने से जटिलताओं को रोका जा सकता है और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकता है।
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था पर विशेष फोकस
विशेष शिविरों का प्रमुख उद्देश्य हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान करना भी है। जिन महिलाओं को उच्च रक्तचाप, एनीमिया, मधुमेह, अत्यधिक कम वजन या अन्य चिकित्सीय समस्याएं होती हैं, उन्हें विशेष निगरानी और उपचार की आवश्यकता होती है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ऐसी गर्भवती महिलाओं को जल्द चिन्हित कर उचित चिकित्सा सहायता प्रदान करने से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। शिविरों के दौरान ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
मुफ्त जांच और परामर्श की सुविधा
कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं को विभिन्न स्वास्थ्य जांचों के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों से निशुल्क परामर्श भी मिलेगा। उन्हें गर्भावस्था के दौरान पोषण, स्वच्छता, नियमित जांच और सुरक्षित प्रसव के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त आयरन, फोलिक एसिड और अन्य आवश्यक दवाओं के सेवन के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मी महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लाभों के बारे में समझाएंगे ताकि प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर
झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों में अभी भी गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर महिलाओं को शिविर में आने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं को इन विशेष शिविरों से जोड़ना है ताकि कोई भी महिला आवश्यक स्वास्थ्य जांच और परामर्श से वंचित न रह जाए।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने में मददगार
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित प्रसव पूर्व जांच (एंटीनटल चेकअप) मातृ और शिशु स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय पर जांच से गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं की पहचान की जा सकती है और आवश्यक उपचार शुरू किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने पिछले 10 वर्षों में इसी दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। इसके माध्यम से लाखों महिलाओं को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं मिली हैं, जिससे सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिला है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां पूरी
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने विशेष शिविरों को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और चिकित्सा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में जांच उपकरणों, दवाओं और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
सुरक्षित मातृत्व की दिशा में नया संकल्प
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे होना देश की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। झारखंड में आयोजित होने वाले विशेष स्वास्थ्य शिविर इस उपलब्धि को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गर्भवती महिलाएं नियमित जांच कराएं, संतुलित आहार लें और चिकित्सकीय सलाह का पालन करें तो अधिकांश जटिलताओं से बचा जा सकता है। ऐसे में 9 जून को आयोजित विशेष शिविर सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने पिछले 10 वर्षों में गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का मजबूत आधार तैयार किया है। झारखंड में 9 जून को आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल महिलाओं को मुफ्त जांच और परामर्श प्रदान करेंगे बल्कि सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करेंगे। उम्मीद है कि यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को और बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगी।







