नामकुम थाना हत्या मामला : झारखंड की राजधानी रांची से एक बेहद सनसनीखेज और दुखद मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। 12 वर्षीय मासूम बच्चे की हत्या के आरोपी ने पुलिस हिरासत में ही आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न केवल हत्या के मामले को और गंभीर बना दिया है बल्कि पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत प्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।यह घटना रांची के नामकुम थाना क्षेत्र की है, जहां पुलिस ने बच्चे की हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर थाने की हवालात में रखा था। बताया जा रहा है कि आरोपी ने रात के समय कथित रूप से हवालात में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और तुरंत उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।
आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार मृत आरोपी की पहचान जगय मुंडा (45 वर्ष) के रूप में हुई है, जो खूंटी जिले के सायको इलाके का रहने वाला था। उसे 12 वर्षीय बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था।जानकारी के मुताबिक पुलिस ने उसे 4 मार्च को गिरफ्तार किया था और उसे नामकुम थाना की हवालात में रखा गया था। अगले दिन उसे अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी बीच देर रात उसने हवालात में आत्महत्या कर ली।बताया जा रहा है कि आरोपी ने ठंड से बचने के लिए दी गई चादर या कंबल का इस्तेमाल कर फांसी लगा ली। सुबह जब पुलिसकर्मियों ने उसे देखा तो वह मृत अवस्था में पाया गया। इसके बाद तुरंत अधिकारियों को सूचना दी गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
अवैध संबंध बना हत्या की वजह
इस पूरे मामले के पीछे एक जटिल निजी विवाद सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी जगय मुंडा का एक महिला के साथ कथित अवैध संबंध था। यह संबंध लगभग छह वर्षों से चल रहा था।बताया जाता है कि जब आरोपी की पत्नी को इस संबंध की जानकारी मिली तो उस महिला ने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी। इसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।पुलिस के मुताबिक 1 मार्च को आरोपी और महिला के बीच BIT मेसरा रेलवे ट्रैक के पास तीखी बहस हुई थी। इसी दौरान आरोपी ने महिला को धमकी दी थी कि यदि उसने उससे मिलना बंद किया तो वह उसके बेटे को नुकसान पहुंचा देगा।
बच्चे का अपहरण और हत्या
पुलिस जांच में सामने आया कि 2 मार्च को आरोपी ने महिला के 12 वर्षीय बेटे को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले लिया। इसके बाद वह बच्चे को भुइयांडीह जंगल की ओर ले गया।वहां आरोपी ने कथित तौर पर बच्चे की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने शव को छिपाने की कोशिश भी की।जब बच्चा घर नहीं लौटा तो उसकी मां ने 3 मार्च को नामकुम थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उसने आरोपी पर बेटे के अपहरण का आरोप लगाया।पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और उसकी निशानदेही पर बच्चे का शव बरामद किया गया।
पुलिस हिरासत में आत्महत्या
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नामकुम थाना की हवालात में रखा गया था। बताया जाता है कि रात के समय जब पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी में व्यस्त थे, उसी दौरान आरोपी ने आत्महत्या कर ली।सुबह जब पुलिस ने हवालात की जांच की तो आरोपी फंदे से लटका हुआ पाया गया। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।शव को तुरंत रिम्स (RIMS) अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम कराया गया। पूरी प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की निगरानी में कराई जा रही है और इसकी वीडियोग्राफी भी की जा रही है ताकि मामले में किसी तरह का संदेह न रहे।
पुलिस विभाग पर उठे सवाल
पुलिस हिरासत में आरोपी की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस हिरासत में रहते हुए आरोपी को आत्महत्या करने का मौका कैसे मिला।इस घटना के बाद रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने कड़ा कदम उठाते हुए पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जबकि दो अन्य के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति भी गठित की गई है, जो यह पता लगाएगी कि कहीं पुलिस की लापरवाही तो इस घटना के पीछे जिम्मेदार नहीं है।
इलाके में चर्चा और आक्रोश
इस घटना के बाद इलाके में काफी चर्चा और आक्रोश देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां मासूम बच्चे की हत्या से लोगों में गुस्सा है, वहीं आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत ने मामले को और उलझा दिया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को हिरासत में बंद आरोपियों की सुरक्षा के लिए अधिक सतर्क रहना चाहिए। वहीं कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि अगर आरोपी जिंदा रहता तो पूरे मामले की सच्चाई अदालत में सामने आ सकती थी।
आगे की जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी ने आत्महत्या कैसे की और उस समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों की क्या भूमिका थी।अधिकारियों के अनुसार यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
रांची में सामने आई यह घटना कई स्तरों पर चिंताजनक है। एक तरफ जहां निजी विवाद की वजह से एक मासूम बच्चे की जान चली गई, वहीं आरोपी की पुलिस हिरासत में आत्महत्या ने कानून व्यवस्था और पुलिस सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि व्यक्तिगत दुश्मनी और भावनात्मक उन्माद किस तरह भयावह अपराध का रूप ले सकते हैं। अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।



