रांची हाईकोर्ट अधिवक्ता फायरिंग केस : रांची के रातू थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में झारखंड हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता पर हुई फायरिंग की घटना का पुलिस ने सफलतापूर्वक उद्भेदन कर लिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय, रांची द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना के पीछे पुराना जमीन विवाद था और अधिवक्ता की हत्या के लिए सुपारी दी गई थी।
इस खुलासे के बाद रांची पुलिस ने एक बार फिर यह साबित किया है कि गंभीर अपराधों के मामलों में तकनीकी जांच और सटीक सूचना के आधार पर अपराधियों तक पहुंचा जा सकता है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
क्या था पूरा मामला?
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 1 अक्टूबर 2024 को झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता बदन प्रसाद ने रातू थाना में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि जब वे हाईकोर्ट से मोटरसाइकिल पर अपने घर लौट रहे थे, उसी दौरान दो मोटरसाइकिल सवार अपराधियों ने उनका पीछा करते हुए उन पर गोली चला दी।
गोली लगने से अधिवक्ता घायल हो गए थे। इस घटना के बाद रातू थाना कांड संख्या 326/24 के तहत मामला दर्ज किया गया था। घटना ने उस समय पूरे रांची में सनसनी फैला दी थी और अधिवक्ताओं के बीच भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
एसएसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इसकी समीक्षा की। इसके बाद ग्रामीण पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया।
इस टीम में पुलिस उपाधीक्षक, थाना प्रभारी और अन्य पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया।
लगातार जांच और छापेमारी के बाद पुलिस ने इस मामले में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
- अनुज कुमार महतो, पिता स्वर्गीय अमरेश महतो, निवासी सुदना, थाना शहर, जिला पलामू।
- गुलशन कुमार उर्फ गुलशन कुमार विश्वकर्मा, निवासी पौंची, थाना सतबरवा, जिला पलामू।
दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने अपने अपराध में संलिप्तता स्वीकार कर ली।
जमीन विवाद में दी गई थी सुपारी
पुलिस जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि अधिवक्ता बदन प्रसाद और अनुज कुमार महतो के परिवार के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था।
पूछताछ में आरोपी गुलशन कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि अनुज कुमार महतो ने उसे पैसे देकर अधिवक्ता की हत्या करने की सुपारी दी थी। इसी योजना के तहत दोनों ने मिलकर फायरिंग की घटना को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार यह कोई आकस्मिक हमला नहीं था, बल्कि पूरी तरह से पूर्व नियोजित अपराध था। आरोपियों ने अधिवक्ता की गतिविधियों पर नजर रखी और अवसर मिलने पर उन पर गोली चला दी।
घटना में इस्तेमाल हथियार और बाइक पहले ही हो चुके थे जब्त
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फायरिंग में इस्तेमाल की गई पिस्तौल और मोटरसाइकिल पहले ही एक अन्य मामले में पुलिस द्वारा जब्त की जा चुकी थी।
जानकारी के अनुसार, घटना के करीब दो महीने बाद चेनपुर थाना कांड संख्या 246/24 में कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा गिरोह के सदस्यों के साथ उक्त हथियार और बाइक बरामद की गई थी।
इस तथ्य ने पुलिस जांच को नई दिशा दी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आखिरकार आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।
आरोपी का आपराधिक इतिहास भी आया सामने
गिरफ्तार आरोपी गुलशन कुमार विश्वकर्मा का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं।
दर्ज प्रमुख मामले
- चेनपुर थाना कांड संख्या 246/24, दिनांक 01.12.2024, आर्म्स एक्ट से संबंधित मामला।
- पांकी थाना कांड संख्या 134/24, दिनांक 24.10.2024, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 310(2) के तहत दर्ज मामला।
पुलिस का मानना है कि आरोपी का आपराधिक नेटवर्क अन्य मामलों से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
छापेमारी टीम में शामिल रहे ये अधिकारी
मामले के सफल उद्भेदन में कई पुलिस अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। छापेमारी दल में शामिल प्रमुख अधिकारियों में—
- पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) द्वितीय रांची, अजय आर्यन
- थाना प्रभारी रातू
- रातू थाना के पुलिस पदाधिकारी
- सशस्त्र बल के जवान
इन अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया।
कानून व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सफलता
रांची पुलिस की यह कार्रवाई कानून व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं था, बल्कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा मामला था।
इस मामले का खुलासा होने से न केवल अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाया गया है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि गंभीर अपराध करने वालों को पुलिस देर-सवेर पकड़ ही लेती है।
निष्कर्ष
रांची हाईकोर्ट अधिवक्ता फायरिंग केस के खुलासे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जमीन विवाद और व्यक्तिगत रंजिशें किस तरह गंभीर अपराध का रूप ले सकती हैं। पुलिस की तकनीकी जांच, लगातार निगरानी और समन्वित कार्रवाई के चलते दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।
इस मामले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक और सटीक जांच के माध्यम से पुलिस जटिल अपराधों को सुलझाने में सफल हो रही है।







