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रिम्स में एक्शन मोड में दिखे निदेशक, किचन से मेडिसिन विभाग तक किया औचक निरीक्षण, मरीजों की सुविधाओं पर दिया विशेष जोर | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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रिम्स निदेशक औचक निरीक्षण : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। अस्पताल के निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) प्रो. डॉ. डी.के. सिन्हा ने मंगलवार को अस्पताल के विभिन्न विभागों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सेंट्रल किचनमेडिसिन विभाग, वार्डों की व्यवस्था, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं तथा साफ-सफाई की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. हिरेन्द्र बिरुआ समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। निदेशक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मरीजों के इलाज, भोजन और स्वच्छता के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सेंट्रल किचन में भोजन की गुणवत्ता की हुई जांच

निरीक्षण की शुरुआत रिम्स के सेंट्रल किचन से हुई। यहां निदेशक ने मरीजों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और वितरण व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने खाद्य सामग्री के भंडारण, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया और रसोईघर की साफ-सफाई का भी निरीक्षण किया।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि मरीजों को समय पर भोजन मिल रहा है या नहीं तथा भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए क्या-क्या मानक अपनाए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर सफाई व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता महसूस हुई, जिस पर उन्होंने तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए पौष्टिक और स्वच्छ भोजन इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मेडिसिन विभाग में मरीजों की सुविधाओं की समीक्षा

सेंट्रल किचन के बाद निदेशक मेडिसिन विभाग पहुंचे। यहां उन्होंने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने वार्डों में भर्ती मरीजों की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं और इलाज की प्रक्रिया की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान विभागाध्यक्ष अवकाश पर थे। ऐसे में निदेशक ने मौजूद चिकित्सकों से विभाग की कार्यप्रणाली, मरीजों की संख्या और इलाज के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने कहा कि मेडिसिन विभाग किसी भी अस्पताल का सबसे महत्वपूर्ण विभाग होता है, क्योंकि अधिकांश मरीजों का प्राथमिक इलाज यहीं से शुरू होता है। इसलिए इस विभाग की कार्यप्रणाली बेहतर होना बेहद जरूरी है।

उपस्थिति रजिस्टर और रिकॉर्ड की भी हुई जांच

निरीक्षण के दौरान प्रो. डॉ. डी.के. सिन्हा ने कर्मचारियों की उपस्थिति रजिस्टर, विभागीय रिकॉर्ड और प्रशासनिक दस्तावेजों की भी जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट किए जाएं और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में अनुशासन और जवाबदेही दोनों समान रूप से आवश्यक हैं। यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना पहली प्राथमिकता

निरीक्षण के दौरान निदेशक ने स्पष्ट कहा कि रिम्स झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक मरीज को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने डॉक्टरों और कर्मचारियों से मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मरीज केवल इलाज ही नहीं बल्कि सम्मानजनक व्यवहार की भी अपेक्षा रखते हैं। इसलिए सभी कर्मचारियों को मरीजों के साथ सकारात्मक व्यवहार करना चाहिए।

साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण पर विशेष जोर

रिम्स निदेशक ने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में संक्रमण रोकने के लिए स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण है। वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, किचन और अन्य विभागों में नियमित सफाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान, सैनिटाइजेशन और सफाई व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। इससे मरीजों और अस्पताल कर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

निरीक्षण के बाद निदेशक ने डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। बैठक में मरीजों की बढ़ती संख्या, संसाधनों की उपलब्धता, उपकरणों की स्थिति, दवाओं की आपूर्ति और भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा की गई।

उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन लगातार मरीजों की सुविधा बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। जिन विभागों में संसाधनों की कमी है, वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

रिम्स प्रशासन का लक्ष्य—बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवा

रिम्स प्रशासन का उद्देश्य केवल कमियों को ढूंढना नहीं बल्कि अस्पताल की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। नियमित निरीक्षण से कर्मचारियों में जवाबदेही बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में इस प्रकार के औचक निरीक्षण से चिकित्सा व्यवस्था में सुधार होता है और मरीजों का भरोसा भी मजबूत होता है।

निष्कर्ष

रांची स्थित रिम्स में निदेशक प्रो. डॉ. डी.के. सिन्हा का यह औचक निरीक्षण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सेंट्रल किचन से लेकर मेडिसिन विभाग तक किए गए निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों से यह स्पष्ट है कि अस्पताल प्रशासन अब गुणवत्ता, पारदर्शिता और मरीजों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है तो आने वाले दिनों में रिम्स की स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

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