RIMS न्यूरोसर्जरी 70 नए बेड : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में 70 नए बेड तैयार किए गए हैं, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से बेड की कमी के कारण मरीजों को फर्श पर रहकर इलाज कराने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नए बेड शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में मरीज न्यूरोसर्जरी उपचार के लिए RIMS पहुंचते हैं। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण विभाग पर दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में अतिरिक्त 70 बेड की व्यवस्था को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्यों पड़ी नए बेड की जरूरत?
RIMS का न्यूरोसर्जरी विभाग झारखंड में गंभीर मस्तिष्क और रीढ़ संबंधी बीमारियों के इलाज का प्रमुख केंद्र है। यहां ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन हेमरेज, स्पाइनल इंजरी, सिर में गंभीर चोट, न्यूरोलॉजिकल संक्रमण और अन्य जटिल बीमारियों का इलाज किया जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। कई बार स्थिति ऐसी बन जाती थी कि वार्ड की क्षमता पूरी होने के बाद भी मरीजों को भर्ती करना पड़ता था। इसके कारण परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था और कुछ मरीजों को अस्थायी व्यवस्था में फर्श पर भी रखा जाता था।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार नए बेड शुरू होने से मरीजों को सम्मानजनक और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
मरीजों को क्या होगा फायदा?
70 नए बेड की शुरुआत से सबसे बड़ा लाभ गंभीर मरीजों को मिलेगा। अब मरीजों को भर्ती होने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। न्यूरोसर्जरी विभाग में ऑपरेशन के बाद रिकवरी कर रहे मरीजों के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है। बेड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मरीजों की हालत और गंभीर हो सकती है। नए बेड की व्यवस्था से उपचार प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और मरीजों को बेहतर देखभाल मिल सकेगी।
इमरजेंसी सेवाओं पर पड़ेगा सकारात्मक असर
RIMS में हर दिन बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं, सिर की चोट, ब्रेन स्ट्रोक और अन्य गंभीर मामलों के मरीज पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में तत्काल भर्ती और उपचार आवश्यक होता है।
नए बेड उपलब्ध होने से इमरजेंसी विभाग पर दबाव कम होगा और मरीजों को जल्दी भर्ती किया जा सकेगा। इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी बेहतर तरीके से मरीजों की निगरानी और उपचार करने में सहायता मिलेगी।
झारखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह विस्तार?
झारखंड में अत्याधुनिक न्यूरोसर्जरी सुविधाएं सीमित हैं। अधिकांश गंभीर मरीजों को रांची स्थित RIMS पर ही निर्भर रहना पड़ता है। कई बार मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च काफी अधिक होता है।
RIMS में अतिरिक्त बेड की उपलब्धता से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलेगी। उन्हें सरकारी अस्पताल में ही बेहतर और सुलभ इलाज मिल सकेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में समानता और पहुंच दोनों को मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में कदम
राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पिछले कुछ वर्षों से RIMS के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। अस्पताल में नई चिकित्सा सुविधाओं, अत्याधुनिक उपकरणों, ICU विस्तार और अतिरिक्त भवन निर्माण की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बेड बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ानी होगी। इससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
परिजनों ने जताई खुशी
नए बेड की जानकारी मिलने के बाद मरीजों और उनके परिजनों ने खुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि लंबे समय से न्यूरोसर्जरी विभाग में भीड़ और बेड की कमी बड़ी समस्या बनी हुई थी। अब अतिरिक्त बेड मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी और अस्पताल में उपचार की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
भविष्य में और विस्तार की योजना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार RIMS में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में और भी विस्तार योजनाओं पर काम किया जा रहा है। नए OPD और IPD भवनों के निर्माण, अतिरिक्त बेड क्षमता और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था को लेकर भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
इन प्रयासों का उद्देश्य RIMS को पूर्वी भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल करना है ताकि झारखंड के लोगों को राज्य के भीतर ही उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
निष्कर्ष
RIMS के न्यूरोसर्जरी विभाग में 70 नए बेड की व्यवस्था मरीजों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इससे फर्श पर इलाज जैसी समस्याओं का समाधान होगा, गंभीर मरीजों को समय पर भर्ती मिल सकेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। झारखंड की चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आने वाले समय में इससे हजारों मरीजों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।







