रांची: झारखंड में ग्रामीण परिवारों तक नल से पानी पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे Jal Jeevan Mission (JJM) की जमीनी स्थिति पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में योजना के तहत पाइपलाइन और घरेलू नल कनेक्शन की कवरेज, नियमित पानी की आपूर्ति, जल गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था में कई कमियां सामने आई हैं। ऑडिट के दौरान किए गए लाभार्थी सर्वे में करीब 36 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनके कनेक्शन से या तो पानी नहीं मिल रहा था या पानी की आपूर्ति सीमित थी। रिपोर्ट के आधार पर सामने आई खबरों में इसे करीब 40 प्रतिशत लाभार्थियों की असंतुष्टि के रूप में बताया गया है।
CAG ऑडिट में क्या सामने आया?
CAG की Performance Audit on Implementation of Jal Jeevan Mission रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन की अवधि को 2019-20 से मार्च 2024 तक देखा गया। ऑडिट का उद्देश्य यह जांचना था कि ग्रामीण परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार Functional Household Tap Connections यानी FHTC उपलब्ध कराए जा रहे हैं या नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 तक राज्य में ग्रामीण घरों को 100 प्रतिशत FHTC कवरेज देने के लक्ष्य के मुकाबले कवरेज 52.46 प्रतिशत तक ही पहुंच सकी थी। ऑडिट के लिए चुने गए तीन जिलों में कवरेज 38.70 प्रतिशत से 70.34 प्रतिशत के बीच रही।
इसका मतलब यह है कि केवल नल कनेक्शन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। Jal Jeevan Mission के तहत कनेक्शन को तभी पूरी तरह कार्यात्मक माना जाता है, जब घर में नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता का पानी पहुंचता हो।
करीब 36 प्रतिशत लाभार्थियों ने बताई परेशानी
CAG ने लाभार्थियों से भी जानकारी जुटाई। ऑडिट के दौरान सर्वे किए गए 342 लाभार्थियों में से 122 यानी 35.67 प्रतिशत ने बताया कि उनके पानी के कनेक्शन से पानी नहीं आ रहा था या पानी की आपूर्ति केवल दिन में दो से चार घंटे तक सीमित थी। कुछ स्थानों पर पानी सप्ताह में केवल एक या दो बार मिलने की बात सामने आई।
यह आंकड़ा Jal Jeevan Mission के मूल उद्देश्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। योजना का लक्ष्य केवल ग्रामीण घरों तक पाइप पहुंचाना नहीं, बल्कि लोगों को नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
इसी वजह से CAG ने ऐसे कनेक्शनों को पूरी तरह Functional Tap Connections मानने पर सवाल उठाया है, क्योंकि नियमितता, पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता जैसे मानक पूरे नहीं हो रहे थे।
सिर्फ कनेक्शन देना पर्याप्त नहीं
Jal Jeevan Mission के तहत किसी ग्रामीण परिवार के घर में नल लग जाने के बाद यह मान लेना कि योजना का उद्देश्य पूरा हो गया, सही तस्वीर नहीं बताता। वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि उस नल से कितनी नियमितता के साथ पानी आता है।
कई जगह पाइपलाइन और कनेक्शन मौजूद होने के बावजूद पानी की उपलब्धता सीमित रहने से ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे योजना के खर्च और वास्तविक लाभ के बीच अंतर पैदा होता है।
CAG की रिपोर्ट ने इसी अंतर को महत्वपूर्ण तरीके से सामने रखा है। कागज पर कनेक्शन और जमीन पर नियमित जलापूर्ति—इन दोनों के बीच का अंतर योजना की प्रभावशीलता का अहम संकेतक है।
जल गुणवत्ता की निगरानी भी चुनौती
रिपोर्ट में केवल कवरेज और सप्लाई ही नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता और उसकी जांच से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया गया है। Jal Jeevan Mission के तहत ग्रामीण लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना योजना का प्रमुख उद्देश्य है।
इसके लिए नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण, निगरानी और आवश्यक सुधार की व्यवस्था जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, तो केवल पाइपलाइन बिछाने से समस्या का समाधान नहीं होता।
CAG की रिपोर्ट में जल गुणवत्ता की निगरानी से जुड़े कई पहलुओं की जांच की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि योजना की सफलता को केवल कनेक्शन की संख्या से नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता और नियमित उपलब्धता से भी मापना जरूरी है।
निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत
किसी भी बड़े ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम की सफलता के लिए मजबूत monitoring system जरूरी है। पानी की मात्रा, सप्लाई की नियमितता और गुणवत्ता की लगातार निगरानी होने पर खराबी की पहचान जल्दी की जा सकती है।
CAG के ऑडिट में सेंसर आधारित निगरानी से संबंधित कमियां भी सामने आईं। रिपोर्ट में कहा गया कि जांच किए गए गांवों में flow sensors, pressure sensors और water-quality sensors की स्थापना नहीं हुई थी और पानी की आपूर्ति की मात्रा मापने की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी।
इस तरह की तकनीकी निगरानी व्यवस्था मजबूत होने पर यह पता लगाना आसान हो सकता है कि किस गांव में कितने समय तक पानी पहुंच रहा है और कहां सप्लाई में लगातार समस्या बनी हुई है।
सरकार ने भी बताई कुछ चुनौतियां
ऑडिट रिपोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कार्यान्वयन की धीमी गति को लेकर कुछ कारण बताए गए हैं। सरकार ने बड़े प्रोजेक्ट की लंबी अवधि, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समस्या और फंड के प्रवाह में देरी को कुछ प्रमुख कारणों के रूप में बताया।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि Jal Jeevan Mission जैसी बड़ी योजना को जमीन पर लागू करने में केवल बजट उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क, जल स्रोत, बिजली, भूमि, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
ग्रामीण परिवारों के लिए इसका क्या मतलब?
ग्रामीण परिवारों के लिए नल से नियमित पानी मिलना रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा विषय है। यदि कनेक्शन होने के बावजूद पानी नियमित नहीं आता, तो परिवारों को पुराने जल स्रोतों, हैंडपंप, कुएं या अन्य विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
महिलाओं और बच्चों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में पानी जुटाने की जिम्मेदारी आज भी परिवार के इन्हीं सदस्यों पर अधिक होती है। नियमित पाइप्ड वाटर सप्लाई मिलने से समय की बचत और स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिल सकते हैं, लेकिन इसके लिए कनेक्शन का वास्तव में कार्यात्मक होना जरूरी है।
अब सरकार के सामने क्या चुनौती है?
CAG की रिपोर्ट के बाद सबसे बड़ी चुनौती उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां कनेक्शन उपलब्ध होने के बावजूद पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है। इसके साथ ही खराब पाइपलाइन, जल स्रोत, मोटर, बिजली, पानी की गुणवत्ता और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना जरूरी होगा।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण से देखें तो योजना की प्रगति का मूल्यांकन केवल यह देखकर नहीं होना चाहिए कि कितने घरों में नल लगा है। यह भी देखना होगा कि कितने घरों में नियमित, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंच रहा है।
विकास योजनाओं में जवाबदेही क्यों जरूरी?
Jal Jeevan Mission जैसी योजनाएं सीधे आम लोगों के जीवन से जुड़ी होती हैं। इसलिए सरकारी योजनाओं में खर्च, काम की गुणवत्ता और वास्तविक लाभ की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है।
CAG जैसी संवैधानिक संस्था की Performance Audit रिपोर्ट का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह योजना के क्रियान्वयन को रिकॉर्ड और जमीनी जांच के आधार पर परखती है। रिपोर्ट में सामने आई कमियों का उद्देश्य केवल सवाल उठाना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी क्षेत्रों की पहचान करना भी है।
निष्कर्ष
झारखंड में Jal Jeevan Mission की CAG ऑडिट रिपोर्ट ने साफ किया है कि ग्रामीण घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने के साथ-साथ नियमित जलापूर्ति और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। मार्च 2024 तक 52.46 प्रतिशत कवरेज और सर्वे में 35.67 प्रतिशत लाभार्थियों द्वारा पानी की आपूर्ति से जुड़ी समस्या बताना योजना के सामने मौजूद चुनौतियों को दर्शाता है।
अब जरूरत है कि सरकार CAG की रिपोर्ट में सामने आई कमियों की समीक्षा करे, प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए और नियमित निगरानी सुनिश्चित करे। इससे Jal Jeevan Mission का लाभ केवल कागज पर दर्ज कनेक्शन तक सीमित न रहकर वास्तव में ग्रामीण परिवारों के घर तक नियमित और सुरक्षित पानी के रूप में पहुंच सकेगा।







