धनबाद/रांची: झारखंड में जारी LPG (रसोई गैस) संकट अब आम जनता के साथ-साथ स्कूलों तक भी पहुंच गया है। राज्य के कई जिलों, खासकर धनबाद में, गैस की कमी के कारण सरकारी स्कूलों में चलने वाली मिड-डे मील (PM पोषण योजना) प्रभावित होने लगी है। हालात को देखते हुए मिड-डे मील प्राधिकरण (Mid-Day Meal Authority) ने गैस एजेंसियों को पत्र भेजकर तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि झारखंड में लाखों बच्चे रोजाना इस योजना पर निर्भर हैं।
मिड-डे मील पर संकट के बादल
झारखंड में लगभग 35 हजार सरकारी स्कूलों में करीब 40 लाख बच्चे मिड-डे मील योजना का लाभ उठाते हैं।
इस योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषण देना और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है। लेकिन LPG की कमी के कारण अब यह योजना प्रभावित होने लगी है।
- कई स्कूलों में गैस सिलेंडर खत्म होने की स्थिति
- खाना बनाने में परेशानी
- कुछ जगहों पर भोजन व्यवस्था बाधित
अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह संकट और गहरा सकता है।
गैस एजेंसियों को भेजा गया पत्र
स्थिति को गंभीर देखते हुए मिड-डे मील प्राधिकरण ने संबंधित गैस एजेंसियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि:
- स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर LPG सप्लाई दी जाए
- मिड-डे मील योजना प्रभावित न हो
- नियमित सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बच्चों को मिलने वाला भोजन बाधित न हो।
धनबाद में सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, धनबाद जिले में स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है।
- स्कूलों में सिलेंडर की कमी
- गैस बुकिंग में देरी
- एजेंसियों में स्टॉक की कमी
कई स्कूलों ने प्रशासन को जानकारी दी है कि अगर जल्द गैस नहीं मिली, तो मिड-डे मील बनाना मुश्किल हो जाएगा।
देशभर में दिख रहा असर
यह समस्या सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है। देश के अन्य राज्यों में भी LPG की कमी का असर स्कूलों पर पड़ रहा है।उदाहरण के तौर पर, कुछ राज्यों में स्कूलों ने बताया कि गैस की कमी से मिड-डे मील योजना बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं, कई जगहों पर प्रशासन को विशेष निर्देश जारी करने पड़े हैं कि स्कूलों को गैस की सप्लाई प्राथमिकता से दी जाए।
क्यों बढ़ा LPG संकट?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गैस संकट के पीछे कई कारण हैं:
1. अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां
मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है।
2. बढ़ती मांग
घरेलू और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में गैस की मांग तेजी से बढ़ी है।
3. सप्लाई चेन में समस्या
गैस एजेंसियों तक समय पर सिलेंडर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
4. डिस्ट्रीब्यूशन में गड़बड़ी
कुछ जगहों पर वितरण प्रणाली भी प्रभावित हुई है।
बच्चों के पोषण पर असर
मिड-डे मील योजना सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है।
- गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे इस पर निर्भर
- कुपोषण से बचाने में मदद
- स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने में अहम भूमिका
अगर यह योजना बाधित होती है, तो इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ेगा।
वैकल्पिक उपायों पर विचार
कुछ जगहों पर स्कूलों ने वैकल्पिक उपाय अपनाने शुरू कर दिए हैं:
- लकड़ी या पारंपरिक चूल्हे का उपयोग
- सीमित भोजन तैयार करना
- मेन्यू में बदलाव
हालांकि, यह स्थायी समाधान नहीं है और इससे कई समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रशासन की चिंता बढ़ी
प्रशासन इस स्थिति को लेकर गंभीर है और लगातार निगरानी कर रहा है।
- जिला स्तर पर बैठकें
- गैस एजेंसियों के साथ समन्वय
- आपूर्ति व्यवस्था सुधारने की कोशिश
सरकार का प्रयास है कि किसी भी स्थिति में मिड-डे मील योजना बंद न हो।
स्कूलों और शिक्षकों की परेशानी
इस संकट का असर शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन पर भी पड़ा है:
- रोज गैस की चिंता
- खाना बनाने में देरी
- छात्रों और अभिभावकों का दबाव
कई स्कूलों ने कहा है कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं संभाली जा सकती।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- LPG सप्लाई को प्राथमिकता देना जरूरी है
- मिड-डे मील जैसी योजनाओं को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी विचार करना चाहिए
क्या हो सकता है समाधान?
✔ प्राथमिकता सप्लाई
स्कूलों को पहले गैस उपलब्ध कराई जाए
✔ स्टॉक बढ़ाना
गैस एजेंसियों में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए
✔ वैकल्पिक ईंधन
इमरजेंसी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
✔ निगरानी
प्रशासन द्वारा नियमित मॉनिटरिंग
निष्कर्ष
झारखंड में LPG संकट अब एक गंभीर सामाजिक समस्या का रूप लेता जा रहा है। इसका असर सिर्फ घरेलू जीवन तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण और शिक्षा पर भी पड़ रहा है।मिड-डे मील योजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का प्रभावित होना चिंता का विषय है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार, प्रशासन और गैस एजेंसियां मिलकर जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालें।अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर लाखों बच्चों के भविष्य पर पड़ सकता है।




