जमशेदपुर में फंड का बड़ा खेल? उपायुक्त की बैठक में खुली विभागों की लापरवाही, दिए सख्त आदेश | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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Jamshedpur financial review meeting : झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के वित्तीय प्रबंधन की गहन समीक्षा की गई।

यह बैठक मुख्य रूप से एसी (Abstract Contingent) और डीसी (Detailed Contingent) बिलों की स्थिति, पीएल खातों में जमा राशि और उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) से जुड़े मामलों पर केंद्रित थी। बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं और वित्तीय नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

एसी-डीसी बिलों की स्थिति पर विशेष ध्यान

बैठक के दौरान उपायुक्त ने सभी विभागों से एसी और डीसी बिलों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने पाया कि कई विभागों में एसी बिल के विरुद्ध डीसी बिल लंबित हैं, जो वित्तीय प्रक्रियाओं में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने निर्देश दिया कि सभी विभाग निर्धारित समयसीमा के भीतर लंबित डीसी बिलों को समर्पित करें। उन्होंने कहा कि एसी बिल के माध्यम से जो राशि अग्रिम रूप से ली जाती है, उसका समय पर हिसाब देना अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि समय पर डीसी बिल जमा नहीं किए जाते हैं, तो इससे न केवल वित्तीय गड़बड़ी की आशंका बढ़ती है, बल्कि शासन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठते हैं।

पीएल खातों में जमा राशि पर सख्ती

बैठक के दौरान पीएल (Personal Ledger) खातों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने पाया कि कई विभागों के पीएल खातों में बड़ी मात्रा में राशि लंबे समय से पड़ी हुई है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है।

इस पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे खातों की पहचान कर उसमें जमा अनावश्यक राशि को शीघ्र सरेंडर किया जाए।

उपायुक्त ने कहा कि सरकारी धन का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि राशि खातों में बिना उपयोग के पड़ी रहती है, तो यह संसाधनों की बर्बादी के समान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) पर जोर

बैठक में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) का था। उपायुक्त ने कहा कि कई योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन उनके उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी तक जमा नहीं किए गए हैं।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे समय पर UC जमा करें, ताकि नई योजनाओं के लिए फंड आवंटन में कोई बाधा न आए।

उपायुक्त ने कहा कि जब तक पिछली योजनाओं का पूरा हिसाब नहीं दिया जाता, तब तक नई योजनाओं के लिए बजट जारी करने में दिक्कत होती है। इससे विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि उपयोगिता प्रमाण पत्र केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह यह दर्शाता है कि सरकारी धन का सही और पारदर्शी उपयोग हुआ है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

बैठक के दौरान उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने सभी अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि सभी विभागों को निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें उप नगर आयुक्त (JNAC), जिला कल्याण पदाधिकारी, कोषागार पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल थे।

सभी अधिकारियों को अपने-अपने विभागों की वित्तीय स्थिति को सुधारने और लंबित मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए।

क्यों जरूरी है वित्तीय अनुशासन?

प्रश्न: एसी और डीसी बिल क्या होते हैं?
एसी (Abstract Contingent) बिल वह होता है जिसके माध्यम से विभाग अग्रिम राशि निकालते हैं, जबकि डीसी (Detailed Contingent) बिल उस राशि का पूरा हिसाब प्रस्तुत करता है।

प्रश्न: पीएल खाता क्या है?
पीएल (Personal Ledger) खाता एक ऐसा सरकारी खाता होता है, जिसमें विशेष योजनाओं या विभागीय कार्यों के लिए राशि रखी जाती है।

प्रश्न: उपयोगिता प्रमाण पत्र क्यों जरूरी है?
उपयोगिता प्रमाण पत्र यह प्रमाणित करता है कि आवंटित राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए सही तरीके से किया गया है।

निष्कर्ष

जमशेदपुर में आयोजित यह समीक्षा बैठक प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी द्वारा दिए गए निर्देश स्पष्ट करते हैं कि अब वित्तीय मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

यह कदम न केवल सरकारी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि विकास योजनाओं को भी गति देगा। यदि सभी विभाग इन निर्देशों का पालन करते हैं, तो निश्चित रूप से जमशेदपुर में वित्तीय प्रबंधन की स्थिति और बेहतर होगी।

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